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गर्भस्थ शिशु की मौत पर परिजनों का हंगामा
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रामनगर सरकारी अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के बाद नारेबाजी करते हुए परिजन।
- फोटो : RAMNAGAR
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रामनगर (नैनीताल)। पीपीपी मोड पर संचालित सरकारी अस्पताल में आपरेशन के दौरान गर्भवती महिला की तबीयत खराब होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। निजी अस्पताल में उपचार के दौरान पता चला कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई। परिजनों ने सरकारी डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर हंगामा किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मोहल्ला खताड़ी निवासी मोहम्मद शारिक ने बताया कि 30 जून सुबह वह अपनी पत्नी इकरा को नॉर्मल डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने नार्मल डिलीवरी का आश्वासन दिया था। शाम को अचानक महिला की हालत खराब होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। आरोप है कि अस्पताल में तैनात नर्सों ने गर्भवती महिला के आपरेशन के नाम पर कट लगाया था। इससे गर्भ में पल रहे शिशु के सिर पर गंभीर घाव होने से उसकी मौत हो गई। महिला का उपचार भी काशीपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
सोमवार को परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर हंगामा किया और लापरवाह डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान शारिक, इरशादी बेगम, मो. मुजाहिद, मो. नाजिर, अजमल, मुस्तकीम, मो. मुजाहिद हुसैन ओवेसी आदि थे। लोगों ने सरकार से इस अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाकर सरकारी स्तर पर संचालित कराने की मांग की है। इधर, सीएमएस डॉ. चंद्रा पंत ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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मोहल्ला खताड़ी निवासी मोहम्मद शारिक ने बताया कि 30 जून सुबह वह अपनी पत्नी इकरा को नॉर्मल डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने नार्मल डिलीवरी का आश्वासन दिया था। शाम को अचानक महिला की हालत खराब होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। आरोप है कि अस्पताल में तैनात नर्सों ने गर्भवती महिला के आपरेशन के नाम पर कट लगाया था। इससे गर्भ में पल रहे शिशु के सिर पर गंभीर घाव होने से उसकी मौत हो गई। महिला का उपचार भी काशीपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
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सोमवार को परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर हंगामा किया और लापरवाह डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान शारिक, इरशादी बेगम, मो. मुजाहिद, मो. नाजिर, अजमल, मुस्तकीम, मो. मुजाहिद हुसैन ओवेसी आदि थे। लोगों ने सरकार से इस अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाकर सरकारी स्तर पर संचालित कराने की मांग की है। इधर, सीएमएस डॉ. चंद्रा पंत ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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