फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Treatment of ATH patients with the advice of AIIMS experts

एटीएच के मरीजों का एम्स के विशेषज्ञों की सलाह से भी इलाज

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 12:45 AM IST
विज्ञापन
Treatment of ATH patients with the advice of AIIMS experts
हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज के अधीन एसटीएच के बाल रोग में भर्ती रहे दो रोगियों के उपचार में टेली मेडिसिन तकनीक मददगार बनी है। टेली मेडिसिन के जरिए एसटीएच के डॉक्टरों ने एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों के परामर्श से इलाज किया है। डॉक्टरों के अनुसार इसके लिए रोगियों को एम्स नहीं जाना पड़ा है।
विज्ञापन

रोग की और गहनता से पड़ताल और गंभीर मरीजों को एम्स आदि हायर सेंटर को रेफर किया जाता है। इसमें समय, पैसा दोनों लगता है और रोगियों को परेशानी भी होती है। ऐसे में एसटीएच प्रबंधन ने तकनीक के जरिए रोगियों को एम्स के डॉक्टरों की सलाह लेकर उपचार करने की कोशिश की है। बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋतु रखोलिया कहती हैं कि हाल के दिनों में दो बच्चे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे, इन्हें वात रोग संबंधी शिकायत थी। इस तरह के दो से तीन साल में एक-दो बार ऐसे केस आते हैं। रोगी के त्वचा और मांसपेशियों में दिक्कत थी। वह चल, बैठ नहीं पा रहा था। एम्स में रुमेटोलॉजी के विशेषज्ञ हैं। ऐसे में उनसे परामर्श लेकर इलाज करने का फैसला किया गया। टेली मेडिसिन के जरिए यह संभव हो सका और परामर्श के अनुसार इलाज प्रारंभ किया गया। डॉ. रखोलिया कहती हैं कि अगर रोगी एम्स में जाकर भी इलाज करना चाहेंगे, तो क्योंकि एम्स के डॉक्टरों ने केस को देखा और समझा हुआ तो उन्हें इलाज, भर्ती करने में मदद मिलेगी। ज्यादा आसानी से इलाज हो सकेगा। आगे भी आवश्यकतानुसार एम्स के विशेषज्ञों की परामर्श लेकर इलाज किया जाएगा।
विज्ञापन

एक घंटे से अधिक का समय दिया
हल्द्वानी। एसटीएच प्रबंधन के अनुसार एम्स के विशेषज्ञों के पास मरीज की डिटेल पहले भेज दी गई थी, उसके बाद समय मिला। एम्स के चिकित्सकों ने करीब एक घंटे से अधिक समय तक एक मरीज को समय दिया और बीमारी से जुड़ी जानकारी चिकित्सक व अन्य लोगों से प्राप्त की।
विज्ञापन
विज्ञापन

एसटीएच में इंप्लांट भी उपलब्ध होगा
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में आने वाले रोगियों को काफी दवाएं निशुल्क मिलती हैं।लेकिन आर्थोपेडिक से जुड़ी बीमारी के इलाज में लगने वाले इंप्लांट को बाहर से खरीदना होता था। अब अस्पताल प्रबंधन यह सुविधा भी प्रदान करने की योजना बनाई है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी कहते हैं कि आर्थोपेडिक से जुड़े इंप्लांट रोगियों को अस्पताल में मिल सके, इसका प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह आंखों में लगने वाले लेंस के विकल्प भी उपलब्ध हो, इसकी भी कोशिश की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed