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मशरूम में औषधीय गुणों का खजाना: नैनीताल में मिलती 30 से 40 प्रजातियां, सेवन के लिए पहचान जरूरी

Sun, 30 Aug 2026 11:14 AM IST
गायत्री जोशी रवींद्र पांडे रवि
रवींद्र पांडे रवि Published by: गायत्री जोशी Updated Sun, 30 Aug 2026 11:14 AM IST
सार

मशरूम केवल पौष्टिक आहार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण आधार हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फंगस के अनुकूल वातावरण से मशरूम की पैदावार बढ़ने के साथ जैव विविधता और मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ावा मिलता है।

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Treasure Trove of Medicinal Properties in Mushrooms: 30 to 40 Species Found in Nainital
गोल्डन और अमेनिटा मशरूम। - फोटो : संवाद

विस्तार

मशरूम न केवल पौष्टिक और औषधीय रूप से उपयोगी हैं बल्कि यह पर्यावरण का भी एक महत्वपूर्ण आधार हैं। विषय विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर पर्यावरण के लिए फंगस के अनुकूल परिस्थितियां बनाना अनिवार्य है। इससे मशरूम की पैदावार में वृद्धि होगी और प्रकृति का भी बेहतर संरक्षण होगा। नैनीताल व इसके आसपास भी मशरूम की करीब 30 से 40 प्रजातियां मौजूद हैं।

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वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी और मशरूम विशेषज्ञ विनोद पांडे ने बताया कि मशरूम की औषधीय उपयोगिता बहुत अधिक है। कैंसर की रोकथाम तक के लिए इसे उपयोगी माना गया है। सामान्य तौर पर 100 रुपये किलोग्राम से लेकर 30 हजार किग्रा इससे अधिक धनराशि के मशरूम बाजार में पाए जाते हैं।

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उन्होंने कहा कि मशरूम पर्यावरण में अपघटन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मृत कार्बनिक पदार्थों को तोड़कर मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं। मशरूम उत्पादन के लिए फंगस को बढ़ावा देना जरूरी है जो पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है। यह जैव विविधता को बनाए रखने में भी सहायक है। उन्होंने कहा कि फंगस के अनुकूल परिस्थितियां बनने पर मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है जो बांज, चीड़ समेत अन्य पौधों के विकास और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जरूरी है।

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नैनीताल में मशरूम की 30 से 40 प्रजातियां

मशरूम विशेषज्ञ विनोद पांडे बताते हैं कि नैनीताल शहर व आसपास मशरूम की नैनीताल में मशरूम की 30 से 40 प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें कॉलीफ्लावर मशरूम, कोप्रिनस, अर्थस्टार, गोल्डन, लायन मेन (चिकन ऑफ द वुड), बन (बोलिटस) मशरूम, अमेनिटा सेजेरिया, पफ बॉल मशरूम, शिताके, सारंगी क्रेथेलस, इयर मशरूम आदि शामिल हैं। प्लोरोटस मशरूम सिर के आकार से बड़ा डेढ़ किग्रा तक हो सकता है। कहा कि मशरूम के सेवन के लिए इसको पहचानना भी जरूरी है। अमेनिटा मसकेसिया मशरूम नशीला होता है जबकि अमानिटा फालोइड्स (डेथ कैप) मशरूम सबसे जहरीला है इसके सेवन से जान तक जा सकती है।

कैंसर रोधी के साथ ही कई गुणों का भंडार है मशरूम

मशरूम विशेषज्ञ विनोद पांडे बताते हैं कि मशरूम को अब सिर्फ एक स्वादिष्ट सब्जी नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर आहार के रूप में देखा जा रहा है। वैज्ञानिक शोधों से इसकी कई बीमारियों में उपयोगिता सामने आई है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। मशरूम में कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं। यह मधुमेह, हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के साथ अल्सर एवं मेंटल हेल्थ में भी मदद करता है। यह विटामिन डी का भी अच्छा स्रोत है और इससे शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं। यह पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

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