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Nainital News: जिम्मेदारी का बोझ उठाने की आ रही बारी तो टूट रहे रिश्ते
Thu, 10 Apr 2025 02:27 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 10 Apr 2025 02:27 AM IST
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प्रतीकात्मक
नैनीताल। युवाओं पर शादी के बाद जब जिम्मेदारियों का बोझ पड़ रहा है तो उनके रिश्तों में दरार आ जा रही है। ज्यादातर मामलों में बच्चे होने के बाद विवाद बढ़ना सामने आ रहा है। यहां तक कि एक दूसरे पर केस दर्ज कराकर अलग होते जा रहे हैं। ऐसे पारिवारिक मामले ट्रायल कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंच जा रहे हैं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के काउंसलिंग सेंटर में ऐसे मामले लगातार आ रहे हैं।
केस एक
पढ़े-लिखे युवक और युवती की 2015 में शादी हुई। दंपती को एक बच्चा हुआ। पत्नी परिवार से अलग रहना चाहती थी। इसके बाद उनके बीच विवाद शुरू हो गए। नाराज पत्नी बच्चे के साथ अपने मायके चली गई। पति ने उसे बुलाने के लिए न्यायालय में केस किया। जब वह नहीं आई तो युवक ने एक साल बाद तलाक लेकर दूसरी शादी कर ली। अब पत्नी ने इस आधार पर शादी को कोर्ट में चैलेंज किया। कहा, उसे नियमों के विरुद्ध तलाक दिया गया। पत्नी के मायके वालों ने युवक पर चार स्थानों पर मुकदमे दर्ज करा दिए। अब यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
केस दो
वर्ष 2016 में एक इंजीनियर युवक की पोस्ट ग्रेजुएट पास युवती से शादी हुई। महिला पति के परिवार के साथ नहीं रहना चाहती थी। शादी के दो वर्ष बाद छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगे। महिला ने अपने मायके वालों से सलाह लेने लगी। इससे विवाद गहरा होता गया। पत्नी के मायके वालों के अलावा उसके अन्य रिश्तेदारों ने भी आठ मुकदमे दर्ज करा दिए। बाद में दोनों में वार्ता बंद हो गई। युवक ने तलाक का मुकदमा भी दाखिल कर दिया। युवक को कुछ समय जेल में भी रहना पड़ा। पत्नी अब गुजारा भत्ता ले रही है और पति के घर में एक कमरे में रह रही है। मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है।
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मात्र 10 दिन चली शादी
वर्ष 2013 में यूपी के एक इंजीनियर की शादी उत्तराखंड की युवती से मेट्रोमोनियल साइट के जरिये हुई। परिवार में विवाद के बाद युवती शादी के 10 दिन बाद घर छोड़कर चली गई। पति ने कई बार बुलाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब युवक अपने माता-पिता से अलग रहने के लिए तैयार है। उसे हर माह 25 हजार रुपये गुजारा भत्ता भी दे रहा है। काउंसलिंग के लिए बुलाने पर महिला नहीं आ रही है।
मनोचिकित्सक बोले, विवाह के तीन-चार साल बाद शुरू हो रही कलह
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण काउंसलिंग सेंटर के मनोचिकित्सक डॉ. जीके त्रिपाठी और राखी माधवा के अनुसार विवाह के तीन-चार साल बाद जब जिम्मेदारी उठाने की बारी आ रही है तो दंपती में कलह शुरू हो जा रही है। इसके बाद वार्ता टूटने और दूसरों के हस्तक्षेप से असहमति गहरा हो रही है। काउंसलिंग करने पर पता चल रहा है कि माता-पिता या बच्चों की जिम्मेदारी उठाने की बातों पर विवाद शुरू हो रहे हैं। छोटी-छोटी बातें इन विवादों को बड़ा कर देती हैं। इसके बाद केस करने पर मामले और जटिल हो जा रहे हैं। काउंसलिंग में कई दंपती साथ रहने को राजी हो जा रहे हैं।
वर्जन
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के काउंसलिंग सेंटर में आपसी विवाद सुलझाने के लिए दंपती की काउंसलिंग की जाती है। ऐसे कई परिवार हैं जो काउंसलिंग के बाद जुड़ गए हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या पर काउंसलिंग सेंटर से निशुल्क सलाह ले सकता है। -प्रदीप मणि त्रिपाठी, सदस्य सचिव, उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण।
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केस एक
पढ़े-लिखे युवक और युवती की 2015 में शादी हुई। दंपती को एक बच्चा हुआ। पत्नी परिवार से अलग रहना चाहती थी। इसके बाद उनके बीच विवाद शुरू हो गए। नाराज पत्नी बच्चे के साथ अपने मायके चली गई। पति ने उसे बुलाने के लिए न्यायालय में केस किया। जब वह नहीं आई तो युवक ने एक साल बाद तलाक लेकर दूसरी शादी कर ली। अब पत्नी ने इस आधार पर शादी को कोर्ट में चैलेंज किया। कहा, उसे नियमों के विरुद्ध तलाक दिया गया। पत्नी के मायके वालों ने युवक पर चार स्थानों पर मुकदमे दर्ज करा दिए। अब यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
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केस दो
वर्ष 2016 में एक इंजीनियर युवक की पोस्ट ग्रेजुएट पास युवती से शादी हुई। महिला पति के परिवार के साथ नहीं रहना चाहती थी। शादी के दो वर्ष बाद छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगे। महिला ने अपने मायके वालों से सलाह लेने लगी। इससे विवाद गहरा होता गया। पत्नी के मायके वालों के अलावा उसके अन्य रिश्तेदारों ने भी आठ मुकदमे दर्ज करा दिए। बाद में दोनों में वार्ता बंद हो गई। युवक ने तलाक का मुकदमा भी दाखिल कर दिया। युवक को कुछ समय जेल में भी रहना पड़ा। पत्नी अब गुजारा भत्ता ले रही है और पति के घर में एक कमरे में रह रही है। मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है।
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मात्र 10 दिन चली शादी
वर्ष 2013 में यूपी के एक इंजीनियर की शादी उत्तराखंड की युवती से मेट्रोमोनियल साइट के जरिये हुई। परिवार में विवाद के बाद युवती शादी के 10 दिन बाद घर छोड़कर चली गई। पति ने कई बार बुलाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब युवक अपने माता-पिता से अलग रहने के लिए तैयार है। उसे हर माह 25 हजार रुपये गुजारा भत्ता भी दे रहा है। काउंसलिंग के लिए बुलाने पर महिला नहीं आ रही है।
मनोचिकित्सक बोले, विवाह के तीन-चार साल बाद शुरू हो रही कलह
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण काउंसलिंग सेंटर के मनोचिकित्सक डॉ. जीके त्रिपाठी और राखी माधवा के अनुसार विवाह के तीन-चार साल बाद जब जिम्मेदारी उठाने की बारी आ रही है तो दंपती में कलह शुरू हो जा रही है। इसके बाद वार्ता टूटने और दूसरों के हस्तक्षेप से असहमति गहरा हो रही है। काउंसलिंग करने पर पता चल रहा है कि माता-पिता या बच्चों की जिम्मेदारी उठाने की बातों पर विवाद शुरू हो रहे हैं। छोटी-छोटी बातें इन विवादों को बड़ा कर देती हैं। इसके बाद केस करने पर मामले और जटिल हो जा रहे हैं। काउंसलिंग में कई दंपती साथ रहने को राजी हो जा रहे हैं।
वर्जन
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के काउंसलिंग सेंटर में आपसी विवाद सुलझाने के लिए दंपती की काउंसलिंग की जाती है। ऐसे कई परिवार हैं जो काउंसलिंग के बाद जुड़ गए हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या पर काउंसलिंग सेंटर से निशुल्क सलाह ले सकता है। -प्रदीप मणि त्रिपाठी, सदस्य सचिव, उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण।