फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Thousands of rupees have to be spent on offering water to the roof.

Nainital News: पानी छत में चढ़ाने पर खर्च करने पड़ते हैं हजारों रुपये

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jan 2023 11:51 PM IST
विज्ञापन
Thousands of rupees have to be spent on offering water to the roof.
हल्द्वानी। पेयजल उपभोक्ताओं को पानी का बिल चुकाने के साथ ही पानी को छत में चढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लो प्रेशर की समस्या के चलते शहर और ग्रामीण इलाकों में 40,000 से अधिक परिवार मोटर का इस्तेमाल करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक छत की टंकी में पानी चढ़ाने में सालाना 1.5 करोड़ यूनिट बिजली की खपत हो रही है जिसमें पेयजल उपभोक्ताओं के साल में न्यूनतम छह करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
विज्ञापन

पिछले कुछ वर्षों में हल्द्वानी शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में जलसंस्थान के 77,000 से अधिक पेयजल उपभोक्ता हैं जबकि पुराने संसाधनों पर ही पेयजल व्यवस्था टिकी हुई है। जनदबाव बढ़ने से लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल रहा है। कई इलाकों में लो प्रेशर की समस्या है।
विज्ञापन

पेयजल लाइन के अंतिम छोर में अक्सर पेयजल संकट बना रहता है। अधिकतर लोग पानी की आपूर्ति के लिए मोटर का इस्तेमाल करते हैं। अगर मोटर ना हो तो दो या तीन मंजिला घरों में पानी नहीं चढ़ पाता। आम तौर पर पानी आने पर लोग भूमिगत टैंकों में भर लेते हैं और पानी को छत तक पहुंचाने के लिए लोग घरों में मोटर का प्रयोग करते है। जलसंस्थान जब पानी खोलता है तब पर्याप्त दबाव से पानी आए इसलिए लोग मोटर चला देते हैं। इसका नतीजा यह है कि जिन घरों में मोटर नहीं लगी है वहां पानी मुश्किल से आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हर महीने एक करोड़ की बिजली खर्च करता है जल संस्थान
हल्द्वानी शहर और ग्रामीण इलाकों में पांच लाख से अधिक आबादी को पानी की आपूर्ति करने में बिजली की भारी खपत होती है। नलकूपों और पेयजल योजनाओं के संचालन में जल संस्थान हर महीने एक करोड़ से अधिक की बिजली खर्च करता है। इसमें राज्य सरकार की ओर से बिजली का खर्च वहन किया जाता है।
कोट
पेयजल उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ गई है। पेयजल लाइन के अंतिम छोर पर लो प्रेशर की समस्या रहती है। ओवरहैड टैंक से मकान जितना दूर होगा वहां पानी का प्रेशर उतना ही कम होगा। कई लोग पानी छत पर चढ़ाने के लिए मोटर का इस्तेमाल करते हैं।

- एस के श्रीवास्तवए अधिशासी अभियंताए जल संस्थान
मोटर चलाने में अधिक होता है बिजली का उपयोग
हल्द्वानी। आम तौर पर घरेलू उपभोक्ता महीने में 100 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं। 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर उपभोक्ताओं को 4.20 और 201 से 400 यूनिट तक 5.80 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। भूमिगत टैंक से पानी को छत की टंकी तक चढ़ाने के लिए लोग मोटर का इस्तेमाल करते हैं। आधे हॉर्सपावर की मोटर एक घंटे में 400 वाट बिजली और एक हॉर्स पावर की मोटर एक घंटे में 800 वाट बिजली लेती है। मोटर की क्षमता कम होने पर पानी चढ़ाने में अधिक समय लगता है। सामान्यतया पानी चढ़ाने में प्रतिदिन लोगों की एक यूनिट बिजली खर्च हो रही है। इस हिसाब से साल में 365 यूनिट बिजली खर्च करने पर एक उपभोक्ताओं को 4.20 प्रति यूनिट के हिसाब से 1533 रुपये खर्च आता है। मोटर चलाने के कारण बिजली की खपत भी बढ़ती है जिससे बिजली का उपयोग बढ़ने पर लोगों को अधिक भुगतान करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed