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Nainital News: पानी छत में चढ़ाने पर खर्च करने पड़ते हैं हजारों रुपये
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हल्द्वानी। पेयजल उपभोक्ताओं को पानी का बिल चुकाने के साथ ही पानी को छत में चढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लो प्रेशर की समस्या के चलते शहर और ग्रामीण इलाकों में 40,000 से अधिक परिवार मोटर का इस्तेमाल करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक छत की टंकी में पानी चढ़ाने में सालाना 1.5 करोड़ यूनिट बिजली की खपत हो रही है जिसमें पेयजल उपभोक्ताओं के साल में न्यूनतम छह करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में हल्द्वानी शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में जलसंस्थान के 77,000 से अधिक पेयजल उपभोक्ता हैं जबकि पुराने संसाधनों पर ही पेयजल व्यवस्था टिकी हुई है। जनदबाव बढ़ने से लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल रहा है। कई इलाकों में लो प्रेशर की समस्या है।
पेयजल लाइन के अंतिम छोर में अक्सर पेयजल संकट बना रहता है। अधिकतर लोग पानी की आपूर्ति के लिए मोटर का इस्तेमाल करते हैं। अगर मोटर ना हो तो दो या तीन मंजिला घरों में पानी नहीं चढ़ पाता। आम तौर पर पानी आने पर लोग भूमिगत टैंकों में भर लेते हैं और पानी को छत तक पहुंचाने के लिए लोग घरों में मोटर का प्रयोग करते है। जलसंस्थान जब पानी खोलता है तब पर्याप्त दबाव से पानी आए इसलिए लोग मोटर चला देते हैं। इसका नतीजा यह है कि जिन घरों में मोटर नहीं लगी है वहां पानी मुश्किल से आता है।
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हर महीने एक करोड़ की बिजली खर्च करता है जल संस्थान
हल्द्वानी शहर और ग्रामीण इलाकों में पांच लाख से अधिक आबादी को पानी की आपूर्ति करने में बिजली की भारी खपत होती है। नलकूपों और पेयजल योजनाओं के संचालन में जल संस्थान हर महीने एक करोड़ से अधिक की बिजली खर्च करता है। इसमें राज्य सरकार की ओर से बिजली का खर्च वहन किया जाता है।
कोट
पेयजल उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ गई है। पेयजल लाइन के अंतिम छोर पर लो प्रेशर की समस्या रहती है। ओवरहैड टैंक से मकान जितना दूर होगा वहां पानी का प्रेशर उतना ही कम होगा। कई लोग पानी छत पर चढ़ाने के लिए मोटर का इस्तेमाल करते हैं।
- एस के श्रीवास्तवए अधिशासी अभियंताए जल संस्थान
मोटर चलाने में अधिक होता है बिजली का उपयोग
हल्द्वानी। आम तौर पर घरेलू उपभोक्ता महीने में 100 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं। 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर उपभोक्ताओं को 4.20 और 201 से 400 यूनिट तक 5.80 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। भूमिगत टैंक से पानी को छत की टंकी तक चढ़ाने के लिए लोग मोटर का इस्तेमाल करते हैं। आधे हॉर्सपावर की मोटर एक घंटे में 400 वाट बिजली और एक हॉर्स पावर की मोटर एक घंटे में 800 वाट बिजली लेती है। मोटर की क्षमता कम होने पर पानी चढ़ाने में अधिक समय लगता है। सामान्यतया पानी चढ़ाने में प्रतिदिन लोगों की एक यूनिट बिजली खर्च हो रही है। इस हिसाब से साल में 365 यूनिट बिजली खर्च करने पर एक उपभोक्ताओं को 4.20 प्रति यूनिट के हिसाब से 1533 रुपये खर्च आता है। मोटर चलाने के कारण बिजली की खपत भी बढ़ती है जिससे बिजली का उपयोग बढ़ने पर लोगों को अधिक भुगतान करना पड़ता है।
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पिछले कुछ वर्षों में हल्द्वानी शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में जलसंस्थान के 77,000 से अधिक पेयजल उपभोक्ता हैं जबकि पुराने संसाधनों पर ही पेयजल व्यवस्था टिकी हुई है। जनदबाव बढ़ने से लोगों को पर्याप्त पेयजल नहीं मिल रहा है। कई इलाकों में लो प्रेशर की समस्या है।
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पेयजल लाइन के अंतिम छोर में अक्सर पेयजल संकट बना रहता है। अधिकतर लोग पानी की आपूर्ति के लिए मोटर का इस्तेमाल करते हैं। अगर मोटर ना हो तो दो या तीन मंजिला घरों में पानी नहीं चढ़ पाता। आम तौर पर पानी आने पर लोग भूमिगत टैंकों में भर लेते हैं और पानी को छत तक पहुंचाने के लिए लोग घरों में मोटर का प्रयोग करते है। जलसंस्थान जब पानी खोलता है तब पर्याप्त दबाव से पानी आए इसलिए लोग मोटर चला देते हैं। इसका नतीजा यह है कि जिन घरों में मोटर नहीं लगी है वहां पानी मुश्किल से आता है।
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हर महीने एक करोड़ की बिजली खर्च करता है जल संस्थान
हल्द्वानी शहर और ग्रामीण इलाकों में पांच लाख से अधिक आबादी को पानी की आपूर्ति करने में बिजली की भारी खपत होती है। नलकूपों और पेयजल योजनाओं के संचालन में जल संस्थान हर महीने एक करोड़ से अधिक की बिजली खर्च करता है। इसमें राज्य सरकार की ओर से बिजली का खर्च वहन किया जाता है।
कोट
पेयजल उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ गई है। पेयजल लाइन के अंतिम छोर पर लो प्रेशर की समस्या रहती है। ओवरहैड टैंक से मकान जितना दूर होगा वहां पानी का प्रेशर उतना ही कम होगा। कई लोग पानी छत पर चढ़ाने के लिए मोटर का इस्तेमाल करते हैं।
- एस के श्रीवास्तवए अधिशासी अभियंताए जल संस्थान
मोटर चलाने में अधिक होता है बिजली का उपयोग
हल्द्वानी। आम तौर पर घरेलू उपभोक्ता महीने में 100 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं। 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर उपभोक्ताओं को 4.20 और 201 से 400 यूनिट तक 5.80 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। भूमिगत टैंक से पानी को छत की टंकी तक चढ़ाने के लिए लोग मोटर का इस्तेमाल करते हैं। आधे हॉर्सपावर की मोटर एक घंटे में 400 वाट बिजली और एक हॉर्स पावर की मोटर एक घंटे में 800 वाट बिजली लेती है। मोटर की क्षमता कम होने पर पानी चढ़ाने में अधिक समय लगता है। सामान्यतया पानी चढ़ाने में प्रतिदिन लोगों की एक यूनिट बिजली खर्च हो रही है। इस हिसाब से साल में 365 यूनिट बिजली खर्च करने पर एक उपभोक्ताओं को 4.20 प्रति यूनिट के हिसाब से 1533 रुपये खर्च आता है। मोटर चलाने के कारण बिजली की खपत भी बढ़ती है जिससे बिजली का उपयोग बढ़ने पर लोगों को अधिक भुगतान करना पड़ता है।