{"_id":"5d3cb2f78ebc3e6d1525abb0","slug":"this-is-the-chance-to-fulfill-the-nights-of-the-night-nainital-news-hld350637362","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज की रात मन्नतें पूरी करने का है मौका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज की रात मन्नतें पूरी करने का है मौका
विज्ञापन
नैनीताल। रविवार 28 जुलाई की रात मन्नतें पूरी करने का मौका है। पूरी रात टूटे तारे देखने को मिलेंगे लेकिन उससे पहले मन्नत मांगिये की इस रात आकाश साफ रहे।
रविवार की रात डेल्टा एक्वेरिड उल्कापात का शानदार नजारा देखने को मिल सकता है। इस रात यह उल्कापात अपने चरम पर रहेगा और रात 12 बजे से सुबह तक नजर आएगा। खास बात यह है कि इन दिनों अमावस्या निकट होने के कारण चांद की रोशनी बहुत मद्धिम है ऐसे में यह उल्कापात अधिक साफ और चमकदार नजर आएगा।
यह उल्कापात एक्वेरिड नक्षत्र की दिशा से आता नजर आएगा। इसमें मार्सडेन और क्रैच धूमकेतुओं के कण वायुमंडल में प्रवेश के बाद घर्षण से प्रज्ज्वलित होकर उल्कापात का नजारा प्रस्तुत करेंगे।
विज्ञापन
यह उल्कापात 12 जुलाई को शुरू हो चुका है और 23 अगस्त तक चलेगा लेकिन 28 जुलाई की रात यह अपने चरम पर होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार इन दिनों परसीड उल्कापात भी चल रहा है जिसकी अवधि 17 जुलाई से 24 अगस्त तक है। यह 12 अगस्त को चरम पर रहेगा लेकिन उन दिनों पूर्णिमा का समय होने के कारण साफ नजर नहीं आ सकेगा।
-डॉ. अनिल पांडे, पूर्व निदेशक और खगोल वैज्ञानिक, आर्यभट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज)
विज्ञापन
रविवार की रात डेल्टा एक्वेरिड उल्कापात का शानदार नजारा देखने को मिल सकता है। इस रात यह उल्कापात अपने चरम पर रहेगा और रात 12 बजे से सुबह तक नजर आएगा। खास बात यह है कि इन दिनों अमावस्या निकट होने के कारण चांद की रोशनी बहुत मद्धिम है ऐसे में यह उल्कापात अधिक साफ और चमकदार नजर आएगा।
विज्ञापन
यह उल्कापात एक्वेरिड नक्षत्र की दिशा से आता नजर आएगा। इसमें मार्सडेन और क्रैच धूमकेतुओं के कण वायुमंडल में प्रवेश के बाद घर्षण से प्रज्ज्वलित होकर उल्कापात का नजारा प्रस्तुत करेंगे।
विज्ञापन
यह उल्कापात 12 जुलाई को शुरू हो चुका है और 23 अगस्त तक चलेगा लेकिन 28 जुलाई की रात यह अपने चरम पर होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार इन दिनों परसीड उल्कापात भी चल रहा है जिसकी अवधि 17 जुलाई से 24 अगस्त तक है। यह 12 अगस्त को चरम पर रहेगा लेकिन उन दिनों पूर्णिमा का समय होने के कारण साफ नजर नहीं आ सकेगा।
-डॉ. अनिल पांडे, पूर्व निदेशक और खगोल वैज्ञानिक, आर्यभट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज)