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क्षमता से तीन गुना अधिक हुई जेल में कैदियों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sun, 31 Jul 2016 12:06 AM IST
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हल्द्वानी जेल में कैदियों की संख्या क्षमता से तीन गुना अधिक हो गई है। इसी प्रकार नैनीताल जेल की संख्या भी दो गुनी हो गई है। इन हालातों से निबटने के लिए ऊधमसिंह नगर जेल बनने के आसार नहीं है। क्योंकि सरकार भी नई जेल बनाने के लिए प्रति गंभीर दिखायी नहीं दे रही है। जल में खाने और दवा के खर्च का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन जेल को आर्थिक तंगी से निबटने के लिए बजट नहीं मिला है।
हल्द्वानी उप कारागार में कैदियों को रखने की क्षमता 250 है। इसी हिसाब से प्रदेश सरकार बनने के बाद बैरक भी बनाए गए थे। वर्तमान समय में कैदियों की संख्या बढ़कर 864 हो गई है। कैदियों की संख्या पिछले साल 750 थी। कैदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हाईकोर्ट के जज ने भी पिछले साल ऊधमसिंह नगर जेल शीघ्र बनाने की सलाह प्रदेश सरकार को दी थी। प्रदेश सरकार के निर्देश पर जेल अधिकारियों ने छिनकी फार्म में जमीन देखी था लेकिन आगे बात बढ़ नहीं सकी।
इधर, जेल प्रशासन पर खाने और दवा का कर्ज 75 लाख रुपये है। इसके अलावा अन्य मदों में भी दस लाख रुपये की देनदारी है। किसी तरह जुगाड़ से जेल में मैस और अन्य काम किये जा रहे हैं। यदि किसी कैदी को गंभीर बीमारी हो गई तो मजदूरी का पैसा बैंक से आकस्मिक तौर पर निकालना पडे़गा।
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यह समस्या प्रदेश सरकार से बजट नहीं मिलने के कारण पैदा हुई है। जेल अधिकारी भी मानते हैं कि किसी कैदी की दवा को भी नहीं रोका जा सकता है। इसी प्रकार नैनीताल जेल की क्षमता 71 है लेकिन वर्तमान समय में दो गुना कैदी मौजूद हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्या का कहना है कि किसी प्रकार काम चलाया जा रहा है। संभावना है कि शीघ्र ही बजट मिल जाएगा।
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हल्द्वानी उप कारागार में कैदियों को रखने की क्षमता 250 है। इसी हिसाब से प्रदेश सरकार बनने के बाद बैरक भी बनाए गए थे। वर्तमान समय में कैदियों की संख्या बढ़कर 864 हो गई है। कैदियों की संख्या पिछले साल 750 थी। कैदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हाईकोर्ट के जज ने भी पिछले साल ऊधमसिंह नगर जेल शीघ्र बनाने की सलाह प्रदेश सरकार को दी थी। प्रदेश सरकार के निर्देश पर जेल अधिकारियों ने छिनकी फार्म में जमीन देखी था लेकिन आगे बात बढ़ नहीं सकी।
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इधर, जेल प्रशासन पर खाने और दवा का कर्ज 75 लाख रुपये है। इसके अलावा अन्य मदों में भी दस लाख रुपये की देनदारी है। किसी तरह जुगाड़ से जेल में मैस और अन्य काम किये जा रहे हैं। यदि किसी कैदी को गंभीर बीमारी हो गई तो मजदूरी का पैसा बैंक से आकस्मिक तौर पर निकालना पडे़गा।
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यह समस्या प्रदेश सरकार से बजट नहीं मिलने के कारण पैदा हुई है। जेल अधिकारी भी मानते हैं कि किसी कैदी की दवा को भी नहीं रोका जा सकता है। इसी प्रकार नैनीताल जेल की क्षमता 71 है लेकिन वर्तमान समय में दो गुना कैदी मौजूद हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्या का कहना है कि किसी प्रकार काम चलाया जा रहा है। संभावना है कि शीघ्र ही बजट मिल जाएगा।