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रामनगर में निकला जुलूस

Sat, 06 Feb 2016 01:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर। Updated Sat, 06 Feb 2016 01:35 AM IST
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The procession turned in Ramnagar

जमीनों पर मालिकाना हक और बाढ़ सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग को लेकर पम्पापुरी, भरतपुरी, दुर्गापुरी, कौशल्यापुरी के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

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नगर के मुख्य मार्ग और बाजार से होकर जुलूस तहसील मुख्यालय पहुंचा। जहां उपजिलाधिकारी सीएस मर्तोलिया के माध्यम से मुख्यमंत्री हरीश रावत को ज्ञापन भेजा गया।
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 शुक्रवार की सुबह पम्पापुरी, भरतपुरी, दुर्गापुरी, कौशल्यापुरी नियमितीकरण समिति एवं विभिन्न संगठनों के बैनर तले लोग भरतपुरी मंदिर धर्मशाला पर एकत्र हुए। जिनमें सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं। उसके बाद जुलूस लेकर तहसील पहुंचे।
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 तहसील परिसर में में गणेश रावत के संचालन में चली हंगामेदार सभा में वक्ताओं ने राज्य सरकार से मांग की कि 15 हजार की आबादी की बरसों पुरानी मांग को आश्वासन देकर टरकाया जा रहा है। यहां दशकों से बसे लोगों की मांग पर नियमितीकरण करने की पूर्व मे जिलाधिकारियों द्वारा भेजी गई संस्तुतियों को शासन में ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

 वहीं कोसी नदी में बाढ़ सुरक्षा को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी एवं विजय बहुगुणा द्वारा की गई घोषणाओं को पूरा करके तटबंध बनाने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि लोग अपनी जमा पूंजी से बने आशियानों को बचाने और उनपर कानूनी अधिकार पाने की लड़ाई को तेज करेंगे।

जुलूस प्रदर्शन में भरतपुरी मंदिर समिति के अध्यक्ष ललित घुघत्याल, डॉ. धनेश्वरी घिल्डियाल, हम संयोजक यशपाल रावत, मोहन चंद्र सती, प्रणय श्रीवास्तव, वाईपी देवरानी, विमला आर्य, सरिता मेहरा, मदन राम आर्य, दामोदर जोशी, सभासद माया रावत, टीएस गुसांई, मनोज रावत, रामसिंह रावत, विभा श्रीवास्तव, गौरव सक्सेना, पीएस बिष्ट, कमला रावत, बीडी पाण्डे, संजय मेहता, मनमोहन बिष्ट, राकेश नैनवाल, सत्यप्रकाश शर्मा, प्रेमसिंह समेत सैकड़ों महिलाएं, युवा एवं सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी आदि मौजूद रहे।

पंपापुरी, भरतपुरी इलाका वर्ष 2008 से पहले नगरपालिका की सीमा में नहीं था। उससे पहले यहां के लोग राजस्व ग्राम बनाने की मांग कर रहे थे। राजस्व ग्राम में शामिल होने से यहां के लोगों को जमीनों और मकानों का राजस्व ग्रामों की दर पर नियमितीकरण हो जाना था।

मगर नगरपालिका में आने के बाद यहां की जमीनों और मकानों के मालिकाना हक का मामला लटका हुआ है। नगर पालिका क्षेत्र में नजूल को फ्रीहोल्ड करवाकर काबिज लोगों को मालिकाना हक दिया जा रहा है। मगर उक्त क्षेत्रों में राजस्व की भूमि के नियमितीकरण के मामले में डीएम नैनीताल की ओर से दो दो बार संस्तुतियों के बावजूद शासन स्तर पर कोई निर्णय नहीं हो पाया हैं।


इन मोहल्लों के मकानों का वजूद खतरे में है। अगर यहां तबाही हुई तो रामनगर शहर को भी भारी खतरा पैदा होगा। प्रदेश के दो मुख्यमंत्रियों ने कोसी नदी पर तटबंध बनाने की घोषणा की। वर्ष 2005 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी की कोसी बैराज से पंपापुरी होकर आमडंडा तक तटबंध,बाईपास बनाने की घोषणा की।

उसके लिए करीब चालीस करोड़ रुपए का बजट दस साल बाद भी मंजूर नहीं हुआ। दस साल बाद अब जाकर जनता के दबाव में सर्वे का काम शुरू हो सका है। लोगों के आंदोलन के बाद वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कोसी पर बाढ़ सुरक्षा के लिए तटबंध व स्पर बनाने की घोषणा की। लेकिन वह प्रस्ताव भी शासन स्तर पर ठण्डे बस्ते में रखा हुआ है। लगता है सरकार को आपदा का इंतजार है।

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