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टीएचडीसी प्रबंधन का दायित्व एनटीपीसी देने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
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प्रतीकात्मक फोटो
नैनीताल। हाईकोर्ट ने टीएचडीसी प्रबंधन एवं नियंत्रण का दायित्व एनटीपीसी को दिए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार, टीएचडीस्री औ एनटीपीसी को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। टिहरी निवासी भूपेंद्र सिंह बिष्ट व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 12 दिसंबर 2019 को केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी कर टीएचडीसी के प्रबंधन व नियंत्रण का दायित्व एनटीपीसी को दे दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एनटीपीसी थर्मल पावर है जबकि टीएचडीसी हाइड्रो पावर से संबंधित है।
याचिका में कहा कि ऐसे में यदि भविष्य में यहां कोई घटना घटित होती है तो एनटीपीसी उसे सुलझाने में नाकाम साबित हो सकती है। याचिका में कहा गया कि एनटीपीसी को हाइड्रो पावर के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव नहीं है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, टीएचडीसी व एनटीपीसी को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। टिहरी निवासी भूपेंद्र सिंह बिष्ट व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 12 दिसंबर 2019 को केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी कर टीएचडीसी के प्रबंधन व नियंत्रण का दायित्व एनटीपीसी को दे दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एनटीपीसी थर्मल पावर है जबकि टीएचडीसी हाइड्रो पावर से संबंधित है।
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याचिका में कहा कि ऐसे में यदि भविष्य में यहां कोई घटना घटित होती है तो एनटीपीसी उसे सुलझाने में नाकाम साबित हो सकती है। याचिका में कहा गया कि एनटीपीसी को हाइड्रो पावर के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव नहीं है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, टीएचडीसी व एनटीपीसी को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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