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नक्शा तक सही बना नहीं पाए, बांध सही बना पाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sat, 28 Oct 2017 02:10 AM IST
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नक्शा तक सही बना नहीं पाए, बांध सही बना पाएंगे
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों की परियोजना पंचेश्वर बांध को लेकर पंचेश्वर बांध प्राधिकरण कितना संजीदा है, यह शुरुआती तैयारी से ही जाहिर हो रहा है। परियोजना में जुटे लोग बांध क्षेत्र का नक्शा तक सही नहीं बना पाए हैं। आधिकारिक रूप से जारी नक्शे में महाकाली या शारदा नदी की सहायक सरयू का पूरा रास्ता ही गलत दर्शाया गया है। साफ है कि परियोजना को बनाने के लिए धरातल पर उतनी गंभीरता से काम नहीं किया गया, जितना होना चाहिए था।
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1210 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बनने वाले पंचेश्वर बांध के निर्माण प्रक्रिया में तेजी करीब ढाई साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेपाल दौरे के बाद आई थी। प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान पिथौरागढ़ में हुई जनसभा में मोदी ने पंचेश्वर बांध को क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताया था। उन्होंने कहा था कि यह बांध पिथौरागढ़ के लिए वरदान साबित होगा।
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अब धरातल पर प्रधानमंत्री के दावे के उलट तस्वीर दिखाई दे रही है। परियोजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए नक्शे में महाकाली की मुख्य सहायक सरयू नदी का रास्ता ही गलत दर्शाया गया है। नक्शे के मुताबिक सरयू बागेश्वर से दक्षिण पश्चिम में अल्मोड़ा जिले में बह रही है। नक्शे में नदी को अल्मोड़ा और नैनीताल की सीमा पर बहता हुआ भी दिखाया गया है। वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। सरयू बागेश्वर से दक्षिण पूर्व में बहती है और पिथौरागढ़ तथा अल्मोड़ा जिले की सीमा निर्धारित करती है।
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नक्शे की इस खामी के सामने आने के बाद अब पंचेश्वर बांध को लेकर किए गए तमाम धरातलीय सर्वेक्षणों पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में पर्यावरणीय जन सुनवाई के दौरान यह सामने भी आया था। बांध केडूब क्षेत्र को लेकर भी अभी तक गांव के लोगों के सामने तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। पर्यावरणीय जन सुनवाई में मुआवजों और विस्थापन का मुद्दा उठता रहा। जन सुनवाई में परियोजना अधिकारियों ने पर्यावरण के नुकसान को कम करने का कोई रोडमैप भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखा।