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चरनी दिलाती है याद, प्रभु बनकर आए इंसान हमारे पास

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 24 Dec 2019 12:07 AM IST
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The manger reminds us, humans who come as lord to us
क्रिसमस के मौके पर चर्च कम्पाउंड के एक घर के आंगन में सजी चरनी। अमर उजाला
हल्द्वानी। क्रिसमस पर्व पर सिर्फ एक दिन बचा है। हर कोई अपने तरीके से क्रिसमस मनाने की तैयारी में लगा हुआ है। इस मौके पर क्रिसमस ट्री को सजाने और सेंटा क्लॉज के साथ मस्ती करने का हर किसी को इंतजार है, लेकिन क्रिसमस पर बनने वाली चरनी से ज्यादातर लोग अंजान हैं।
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काठगोदाम के संत टेरेसा चर्च के पुरोहित फादर रॉयल एंथोनी ने बताया कि क्रिसमस पर लोगों के घरों और गिरिजाघरों में चरनी बनाई जाती है। चरनी में प्रभु यीशु के जन्म स्थल की सुंदर झांकी तैयार की जाती है, ताकि लोग उनकी तकलीफों को याद रखें। आज लोग चरनी बनाने में नए प्रयोग कर रहे हैं। कई लोग नए जमाने से जुड़ी किसी थीम का इस्तेमाल भी करते हैं लेकिन अधिकतर चरनी पारंपरिक तरीके से ही बनाई जाती है। प्रभु यीशु के जन्म की कहानी को इसी माध्यम से दर्शाया जाता है। ईसाई समुदाय के लोगों का मानना है कि ईश्वर की संतान होने के बाद भी प्रभु यीशु ने एक आम इंसान की तरह जन्म लिया। उनका जन्म किसी महल में नहीं, बल्कि एक साधारण गौशाला में हुआ था। सर्द रात में गौशाला में जन्म लेना मानवता के लिए संदेश था कि वह धरती पर आम लोगों के लिए आए हैं।
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चरनी का अपना एक अंदाज है
चरनी को बनाते वक्त कागज, लाइट, पत्थर और मिट्टी के सहारे पहाड़, गौशाला, येरूस्लेम का महल और आसपास के गांव को सजाया जाता है। क्रिसमस के एक हफ्ते पहले से ही घर-घर में कैरल सिंगिंग की जाती है। समुदाय के लोग घरों में जाकर चरनी के सामने एकत्र होते हैं और गीतों से क्रिसमस की बधाई देते हैं। साथ ही परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दौरान कई जगहों पर चरनी पर प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।
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क्रिसमस ट्री से बढ़कर है बड़ा दिन
फादर रॉयल ने बताया कि क्रिसमस सेंटा क्लॉज और क्रिसमस ट्री से बढ़कर है। क्रिसमस के दौरान की जाने वाली प्रार्थना बेहद अहम है। बताया कि क्रिसमस ईव (24 दिसंबर) को रात 12 बजे पूरे विश्व भर में मिस्सा (प्रार्थना की विधि) चढ़ाई जाती है। इसके बाद लोग एक दूसरे को बधाई देते हैं। इसके बाद क्रिसमस केक बांटा जाता है।
क्या अलग है क्रिसमस केक में
क्रिसमस के अवसर पर स्पेशल केक काटा जाता है। फादर रॉयल ने कहा कि क्रिसमस प्रभु यीशु का जन्मदिन है। इसी कारण केक काटा जाता है। दरअसल यह विदेशी संस्कृति है। केक काट कर जन्मदिन मनाया जाता है। भारत में जैसे खुशी जाहिर करने के लिए लोग पेड़े, लड्डू, खीर और पायसम जैसे पकवान बनाते हैं। उसी तरह यहां पर केक काटा जाता है। क्रिसमस का केक और दूसरे जन्मदिन के केक से अलग होता है क्योंकि इसे ठंड को ध्यान में रख कर बनाया जाता है। क्रिसमस का केक ड्राई फ्रूट से भरपूर होता है। इस केक को खाने से शरीर में गर्मी बनी रहती है।

कैरल सिंगिंग से दिया जाता है तैयारी का संदेश
बड़े दिन पर प्रभु यीशु का स्वागत करने के लिए लोग तैयार हैं। घर घर जाकर लोग एक दूसरे को गीतों से क्रिसमस का संदेश दे रहे हैं। कैरल सिंगिंग के पीछे भेड़ और बकरी पालने वालों की कहानी है। ऐसी मान्यता है कि यीशु के जन्म पर स्वर्ग दूतों ने उन्हें सबसे पहले संदेश दिया था। इसी घटना को याद कर लोग कैरल सिंगिंग से हर घर में जाकर क्रिसमस पर यीशु के जन्म का संदेश देते हैं।
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