{"_id":"67e06ca965efa0187402b825","slug":"the-forest-department-took-possession-of-40-hectares-of-land-ramnagar-news-c-239-1-rnr1001-106487-2025-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: वन विभाग ने 40 हेक्टेयर भूमि कब्जे में ली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: वन विभाग ने 40 हेक्टेयर भूमि कब्जे में ली
Mon, 24 Mar 2025 01:48 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 24 Mar 2025 01:48 AM IST
विज्ञापन
रामनगर। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के रामनगर रेंज के जुड़का में रविवार को वन कर्मियों और पुलिस की संयुक्त टीम ने अतिक्रमणकारियों से 40 हेक्टेयर भूमि को कब्जे में लिया। इस कार्य में पांच जेसीबी मशीन से अवैध कब्जे ढहाए गए।
डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि जुड़का में अतिक्रमण करने वालों ने 40 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया था। बताया कि इस क्षेत्र में हाल में खनन माफिया ने वनकर्मियों की टीम पर हमला किया था जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
डीएफओ आर्य ने बताया कि रविवार को एसडीओ मनीष जोशी के नेतृत्व में रेंजर रामनगर जेपी डिमरी, रेंजर आमपोखरा पूरन सिंह खनायत, रेंजर बैलपड़ाव विजेंद्र अधिकारी सहित 150 से अधिक वन कर्मियों की टीम गठित की गई। इसके बाद पुलिस के साथ टीम ने अतिक्रमणकारियों से वन कर्मियों ने वन भूमि पर कब्जा लिया।
विज्ञापन
बताया कि पांच जेसीबी मशीन के अलावा आठ गड्ढे खोदने की ड्रिल मशीन समेत 40 श्रमिकों ने अवैध कब्जे हटवाए। इसके बाद वन भूमि को समतल किया गया।
विज्ञापन
डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि जुड़का में अतिक्रमण करने वालों ने 40 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया था। बताया कि इस क्षेत्र में हाल में खनन माफिया ने वनकर्मियों की टीम पर हमला किया था जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
विज्ञापन
डीएफओ आर्य ने बताया कि रविवार को एसडीओ मनीष जोशी के नेतृत्व में रेंजर रामनगर जेपी डिमरी, रेंजर आमपोखरा पूरन सिंह खनायत, रेंजर बैलपड़ाव विजेंद्र अधिकारी सहित 150 से अधिक वन कर्मियों की टीम गठित की गई। इसके बाद पुलिस के साथ टीम ने अतिक्रमणकारियों से वन कर्मियों ने वन भूमि पर कब्जा लिया।
विज्ञापन
बताया कि पांच जेसीबी मशीन के अलावा आठ गड्ढे खोदने की ड्रिल मशीन समेत 40 श्रमिकों ने अवैध कब्जे हटवाए। इसके बाद वन भूमि को समतल किया गया।