फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   The family sent the smiling child, the hospital returned the body

सुशीला तिवारी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही: परिजनों ने हंसता-बोलता बच्चा भेजा, अस्पताल ने शव लौटाया

Sun, 08 Oct 2023 10:25 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो विकास यादव, संवाद
विकास यादव, संवाद Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Sun, 08 Oct 2023 10:25 AM IST
सार

ह्ल्दावी के सुशीला तिवारी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है।बृहस्पतिवार को अस्पताल में बागेश्वर जिले के गरुड़ के पाटली निवासी 11 वर्षीय कृष्णा को परिजन हंसता खेलता लाए थे लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से उन्हें कृष्णा का शव ले जाना पड़ा।

विज्ञापन
The family sent the smiling child, the hospital returned the body
hospital - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुमाऊं का सबसे बड़ा अस्पताल, लेकिन संवेदनशीलता शून्य। लोग बड़ी उम्मीद लेकर पहाड़ से अपने बच्चों व परिजनों को इलाज के लिए यहां लाते हैं लेकिन सुशीला तिवारी अस्पताल प्रबंधन को इसकी तनिक भी परवाह नहीं।

विज्ञापन


बृहस्पतिवार को अस्पताल में बागेश्वर जिले के गरुड़ के पाटली निवासी 11 वर्षीय कृष्णा को परिजन हंसता खेलता लाए थे लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से उन्हें अपने लाडले का शव ले जाना पड़ा। उसे ब्रेन हेमरेज हुआ था। उसका ऑपरेशन किया जाना था पर कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल में यह ऑपरेशन नहीं हो सका। बच्चे के परिजनों ने ऑपरेशन में देरी का आरोप लगाया। न्यूरो सर्जरी-एनेस्थीसिया विभाग इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन मामले की जांच कराने की बात कह रहा है।

विज्ञापन


कृष्णा की मौसी आरती ने बताया कि पांच अक्तूबर को घर के पास खेलते समय वह चोटिल हो गया था। उसके सिर में चोट लगी थी। बच्चे को गरुड़ के निजी अस्पताल लेकर गए थे। वहां से उसे अल्मोड़ा के बेस अस्पताल रेफर किया गया। अल्मोड़ा से हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए भेज दिया गया। बताया कि पांच अक्तूबर की रात नौ बजे बच्चे को एसटीएच की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां से बच्चे को न्यूरोसर्जरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। सीटी स्कैन से ब्रेन हैमरेज का पता चला।

विज्ञापन
विज्ञापन

मां मेरे सिर में दर्द हो रहा है

ऑपरेशन से पहले बच्चे ने अपनी मां को बताया कि उसके सिर में दर्द हो रहा है। वहां मौजूद स्टाफ ने बच्चे से बोला कि हाथ-पैर हिलाओ दर्द सही हो जाएगा। इसके कुछ घंटों बाद ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।


सर्जरी के लिए कपड़े पहनाए पर ऑपरेशन नहीं किया

आरती ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि ऑपरेशन किया जाएगा। ऑपरेशन के लिए दिन में करीब 12 बजे कपड़े बदले गए। इसके बाद करीब ढाई बजे तक रुके रहे, लेकिन कोई ऑपरेशन के लिए नहीं पहुंचा। आरोप है कि अस्पताल में भी बच्चे को देखने के लिए सीनियर डॉक्टर नहीं आए। बच्चे की मौसी ने अधिकारियों को मामले में शिकायत करने की बात कही है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बच्चे का इलाज सीनियर डॉक्टर की निगरानी में चल रहा था।


ओटी में ले गए 12 बजे, डॉक्टर आए तीन बजे

परिजनों का आरोप है कि वे बच्चे को ऑपरेशन थियेटर के बाहर 12 बजे लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर का इंतजार करते रहे लेकिन वह तीन बजे बाद पहुंचे। ओटी के अंदर तक नहीं ले गए। ऑपरेशन की तैयारी हो गई है कहकर ऑपरेशन थियेटर के बाहर लेकर आए थे।



जिम्मेदारों का गैर जिम्मेदाराना तर्क

किसी बच्चे के गंभीर होने की सूचना मिली थी। ऑपरेशन के लिए न्यूरोसर्जन नहीं आए। बच्चे को शुक्रवार रात में ही शिफ्ट करने के लिए कहा गया था। शनिवार सुबह आठ बजे फिर से शिफ्ट करने के लिए एनेस्थीसिया की टीम ने निर्देश दिए थे, लेकिन मरीज को शिफ्ट नहीं किया गया। फिर डेढ़ बजे जब टीम इमरजेंसी ओटी में थी, तब फिर कॉल आई, लेकिन आईसीयू में कोई बच्चा नहीं था। पता चला कि बच्चा ट्रॉमा ओटी में है। वहां बच्चे को ओटी के बाहर किसने शिफ्ट किया, किसी को नहीं पता।- डॉ. गीता भंडारी, विभागाध्यक्ष एनस्थीसिया।

 

बच्चे को ब्रेन हैमरेज था, मरीज को ऑपरेशन की जरूरत थी। सिर की चोट के मरीजों की एक-दो घंटे में ऑपरेशन पर जान बचाई जा सकती है। शुक्रवार को ही ऑपरेशन की तैयारी कर ली गई थी। सुबह नौ बजे ही ऑपरेशन के लिए रेफरेंस एनेस्थीसिया को भिजवाया। शाम छह बजे एनेस्थीसिया ने देखा, जबकि एक घंटे में ओटी में शिफ्ट हो जाना चाहिए था। एनेस्थीसिया से मरीज को फिर से खून चढ़ाने, बच्चे के डॉक्टर को दिखाने और रिपोर्ट कराने लिए कहा गया, ये कराते हुए सुबह हो गई। शनिवार सुबह एक ओटी के बाद शिफ्ट करने के लिए बताया गया, तब तक बच्चे की मौत हो गई। अधिकारियों को मामले में जानकारी दे दी है। - डॉ. अभिषेक राज, न्यूरो सर्जन।

 

बच्चे की मौत के मामले में शिकायत मिलने पर जांच कराएंगे। ऑपरेशन में क्यों देरी हुई, किस वजह से सर्जरी नहीं हो सकी, इस मामले में संबंधित विभागाध्यक्षों से रिपोर्ट ली जाएगी।
-डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed