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Uttarakhand News: बर्फ की चादर ओढ़ते ही जग जाएगी, सेब की सोई मिठास

Sat, 03 Jan 2026 11:11 AM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Sat, 03 Jan 2026 11:11 AM IST
सार

नैनीताल जिले के रामगढ़, मुक्तेश्वर और धानाचूली का फल पट्टी क्षेत्र इन दिनों सेब समेत अन्य फलों की शुरुआती फसल से लदा हुआ है। पेड़ों के झुरमुट से झांकते छोटे-छोटे सेब तो ठीक-ठाक नजर आ रहे हैं, मगर उनके अंदर की मिठास अभी जगी नहीं है।

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The dormant sweetness of the apples will awaken as soon as they are covered with a blanket of snow
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

नैनीताल जिले के रामगढ़, मुक्तेश्वर और धानाचूली का फल पट्टी क्षेत्र इन दिनों सेब समेत अन्य फलों की शुरुआती फसल से लदा हुआ है। पेड़ों के झुरमुट से झांकते छोटे-छोटे सेब तो ठीक-ठाक नजर आ रहे हैं, मगर उनके अंदर की मिठास अभी जगी नहीं है। फलों का आकार बढ़ने के साथ ही उनके भीतर की मिठास को जरूरत है बर्फबारी के चादर की उस नेमत की, जो फिलहाल प्रकृति के खजाने से अभी यहां नहीं बरसी है। यही बात फल उत्पादकों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। हालांकि उम्मीद यह है कि जनवरी आखिर तक हिमपात होगा, ताकि उनकी फसल पर होने वाला तुषारापात न हो सके।

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रामगढ़ क्षेत्र में होने वाले सेब की मिठास देश भर में जानी जाती है। जिले में 2300 से अधिक किसान सेब का उत्पादन करते हैं। बीते कुछ वर्षों से समय से बर्फबारी नहीं होने से सेब के मिठास और साइज में असर देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि इस बार भी किसानों को सेब के उत्पादन को लेकर चिंता है। किसानों को डर है कि जनवरी के अंतिम सप्ताह तक बर्फबारी नहीं हुई तो सेब की मिठास फीकी होने के साथ फल का साइज छोटा और उत्पादन कम हो सकता है। हालांकि किसानों और उद्यान विभाग के अधिकारियों को जनवरी में अच्छी बर्फबारी होने की उम्मीद है। जिले में वर्ष 2025-26 में 1039.68 हेक्टेयर भूमि पर सेब का उत्पादन 4420.00 मैट्रिक टन था।

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सेब के बेहतर उत्पादन के लिए करीब 1200 घंटे की चिलिंग की जरूरत होती है। तब सेब के उत्पादन, साइज और मिठास में वृद्धि होती है। लेकिन अभी तक बर्फबारी नहीं होने से सेब की बागवानी करने वाले किसानों को उत्पादन को लेकर चिंता है। वहीं गेहूं, सरसों, जौ की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि इस महीने तक बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में काफी कमी देखने को मिल सकती है। फसलों में रोग लगने से किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका सबसे अधिक असर ओखलकांडा, बेतालघाट, धारी, रामगढ़ और भीमताल क्षेत्र के किसानों को उठाना पड़ सकता है।

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सेब के उत्पादन में चिलिंग का होना जरूरी होता है। जनवरी माह में बर्फबारी होते ही सेब का उत्पादन अच्छा होगा। फिलहाल अभी ज्यादा चिंता की बात नहीं है।- प्रेमा राणा, मुख्य उद्यान अधिकारी, नैनीताल

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