उत्तराखंड: हाईकोर्ट का फैसला, गंगा घाटों पर स्नान करने वालों की सुरक्षा को लेकर डीएम लेंगे निर्णय
नैनीताल हाईकोर्ट ने टिहरी के तपोवन में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने टिहरी गढ़वाल में गंगा नदी के किनारे स्थित तपोवन के साईं घाट, हनुमानघाट, नीम बीच, गौ घाट, पूर्णनंद घाट, स्वामी नारायण घाटों सहित अन्य घाटों में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं, उनके बच्चों, बुजुर्गों और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह सुरक्षा को लेकर जो भी कमियां हैं, उनका विस्तृत प्रत्यावेदन बनाकर दस दिन के भीतर जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल को दें। जिलाधिकारी आठ सप्ताह के भीतर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्यावेदन पर विधि अनुसार निर्णय लें।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार, हरिद्वार निवासी राज ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि गंगा के किनारे स्थित तपोवन में कई स्नान घाट बनाए गए हैं, जिनमें सालभर श्रद्धालु और पर्यटक अपने बच्चों व बुजुर्गों के साथ स्नान करते हैं। लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि गंगा कितनी गहरी है, जिसकी वजह से अक्सर डूबने से हादसे होते रहते हैं। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई थी कि इन घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराने को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएं, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि तपोवन में जल पुलिस, एसडीआरएफ और 40वीं वाहिनी पीएसी हर समय मौजूद रहती है और समय-समय पर पर्यटकों व श्रद्धालुओं को लाउडस्पीकर के माध्यम से सूचित किया जाता है। कोई दुर्घटना होते ही त्वरित कार्रवाई की जाती है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह जन सुरक्षा से जुड़ा मामला है, चाहे कितनी भी सुरक्षा क्यों न की गई हो, उसे बेहतर करने की आवश्यकता है। गंगा में कितने मीटर अंदर तक जाना है, इसका पता नहीं चलता क्योंकि गंगा का जलस्तर घटता-बढ़ता रहता है। इसके लिए समय अनुसार वहां बैरिकेडिंग की जानी चाहिए और लोगों को खतरे की चेतावनी दी जाए।