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मृत्यु दंड के दंडादेश की पुष्टि हेतु मामला पहुंचा हाईकोर्ट
ब्यूरो/ नैनीताल
Updated Thu, 17 Mar 2016 01:58 AM IST
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निचली अदालत की ओर से हल्द्वानी में लाडली के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या करने के मामले में फांसी की सजा पाए आरोपी को कोर्ट ने नोटिस जारी कर विचारण अदालत का रिकार्ड हाईकोर्ट में तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पूर्व में 11 मार्च 2016 को विशेषा न्यायाधीश पॉक्सो प्रीतू शर्मा की अदालत ने लाडली के बलात्कारी अख्तार अली को फांसी की सजा सुनाई थी तथा उसके सहयोगी को अदालत ने पांच साल की सजा के साथ जुर्माना भी लगया था।
पिथौरागढ से ट्रांसपोर्ट कारोबारी का परिवार 20 नवंबर 2014 को शीशमहल रामलीला मैदान स्थित एक शादी समारोह में आया था। ट्रांसपोर्ट की छह साल की बेटी लाडली समारोह में चाट खाने के बाद पानी पीने के लिए गई। इसी समय अभियुक्त ने उसका अपहरण कर लिया। 25 नवंबर 2014 को लाडली का शव गौलापार झाडियों में मिला।
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अदालत ने लाडली से बलात्कार के मामले में मुख्य आरोपी अख्तर अली को धारा 363 अपहरण के तहत सात साल की कैद और पांच हजार का जुर्माना, धारा 201 साक्ष्य छिपाने के तहत सात साल और पांच हजार रूपये का जुर्माना, आईटी एक्ट 66ग के तहत तीन वर्ष की सजा और धारा 376 क के तहत फांसी की सजा सुनाई। इस फांसी की सजा को सरकार ने हाईकोर्ट में पुष्टि के लिए भेजा था जिसमें हाईकोर्ट ने विपक्षी को नोटिस तथा विचारण अदालत का रिकार्ड हाईकोर्ट में तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पूर्व में 11 मार्च 2016 को विशेषा न्यायाधीश पॉक्सो प्रीतू शर्मा की अदालत ने लाडली के बलात्कारी अख्तार अली को फांसी की सजा सुनाई थी तथा उसके सहयोगी को अदालत ने पांच साल की सजा के साथ जुर्माना भी लगया था।
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पिथौरागढ से ट्रांसपोर्ट कारोबारी का परिवार 20 नवंबर 2014 को शीशमहल रामलीला मैदान स्थित एक शादी समारोह में आया था। ट्रांसपोर्ट की छह साल की बेटी लाडली समारोह में चाट खाने के बाद पानी पीने के लिए गई। इसी समय अभियुक्त ने उसका अपहरण कर लिया। 25 नवंबर 2014 को लाडली का शव गौलापार झाडियों में मिला।
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अदालत ने लाडली से बलात्कार के मामले में मुख्य आरोपी अख्तर अली को धारा 363 अपहरण के तहत सात साल की कैद और पांच हजार का जुर्माना, धारा 201 साक्ष्य छिपाने के तहत सात साल और पांच हजार रूपये का जुर्माना, आईटी एक्ट 66ग के तहत तीन वर्ष की सजा और धारा 376 क के तहत फांसी की सजा सुनाई। इस फांसी की सजा को सरकार ने हाईकोर्ट में पुष्टि के लिए भेजा था जिसमें हाईकोर्ट ने विपक्षी को नोटिस तथा विचारण अदालत का रिकार्ड हाईकोर्ट में तलब किया है।