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Nainital News: तकनीकी एवं ज्ञान संबंधी कमियां मत्स्य पालन में बन रही बाधा
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नैनीताल। मत्स्य पालन पिथौरागढ़ में आर्थिक मजबूती, महिला सशक्तीकरण और सतत पर्वतीय विकास का एक प्रमुख आधार बन सकता है। पर पारिस्थितिक संवेदनशीलता, सीमित संस्थागत सहयोग और तकनीकी एवं ज्ञान संबंधी कमियां इसमें आड़े आ रही हैं। यह तथ्य कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोधार्थी पंकज भट्ट के शोध में सामने आए हैं।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के शोधार्थी भट्ट ने प्री-पीएचडी के दौरान उत्तराखंड में मत्स्य पालन व्यवसाय की संभावनाएं एवं चुनौतियां विषय पर शोध किया है। शोधार्थी भट्ट ने कहा कि पिथौरागढ़ जिले के पास प्रचुर शीतजल संसाधन, समृद्ध जलीय जैव-विविधता तथा अनुकूल पारिस्थितिक परिस्थितियां हैं जो सतत मत्स्य विकास के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती हैं। पर्याप्त आधारभूत संरचना की कमी, सीमित संस्थागत सहयोग और तकनीकी एवं ज्ञान संबंधी कमियां इसके विकास में बाधा बनी हुई हैं। इस क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए सरकार की योजनाओं, वैज्ञानिक नवाचारों, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उचित योजना और दीर्घकालिक सहयोग के साथ मत्स्य पालन पिथौरागढ़ में आर्थिक मजबूती, महिला सशक्तीकरण और सतत पर्वतीय विकास का एक प्रमुख आधार बन सकता है।
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कुमाऊं विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के शोधार्थी भट्ट ने प्री-पीएचडी के दौरान उत्तराखंड में मत्स्य पालन व्यवसाय की संभावनाएं एवं चुनौतियां विषय पर शोध किया है। शोधार्थी भट्ट ने कहा कि पिथौरागढ़ जिले के पास प्रचुर शीतजल संसाधन, समृद्ध जलीय जैव-विविधता तथा अनुकूल पारिस्थितिक परिस्थितियां हैं जो सतत मत्स्य विकास के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती हैं। पर्याप्त आधारभूत संरचना की कमी, सीमित संस्थागत सहयोग और तकनीकी एवं ज्ञान संबंधी कमियां इसके विकास में बाधा बनी हुई हैं। इस क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए सरकार की योजनाओं, वैज्ञानिक नवाचारों, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उचित योजना और दीर्घकालिक सहयोग के साथ मत्स्य पालन पिथौरागढ़ में आर्थिक मजबूती, महिला सशक्तीकरण और सतत पर्वतीय विकास का एक प्रमुख आधार बन सकता है।
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