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Nainital: सुप्रीम कोर्ट ने IFS चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई के लिए किया तीन जजों की बेंच का गठन, जानें मामला

Wed, 31 Jul 2024 01:18 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 31 Jul 2024 01:18 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के चर्चित आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों को बड़ी पीठ का गठन किया है।  

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Supreme Court formed a bench of three judges to hear the case of IFS Chaturvedi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

 

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के चर्चित आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों को बड़ी पीठ का गठन किया है।  

नई पीठ में न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह शामिल हैं। दो न्यायाधीशों की डिवीजन पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति नागरलना शामिल थे, ने इस मामले को संबंधित उच्च न्यायालय की अधिकारिता पर विचार करने के लिए संदर्भित किया था। डिवीजन पीठ के आदेश में कहा गया था कि यह मामला देश के बहुत से कर्मचारियों को प्रभावित करता है और इसका सार्वजनिक महत्व है। इसमें रजिस्ट्री को निर्देशित किया गया कि वह इस मामले को उचित आदेश के लिए जल्द से जल्द भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करे ताकि उपरोक्त प्रकरण का शीघ्र समाधान हो सके। डिवीजन पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से दायर अपील पर अप्रैल 2022 में अपना निर्णय सुरक्षित रखा था और 11 महीने बाद मार्च 2023 में अंतिम निर्णय सुनाया था।

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यह मतभेद कोर्ट के
जनवरी 2023 के ऐसे ही एक मामले में एक फैसले के कारण उत्पन्न हुआ था जिसमें पश्चिम बंगाल से संबंधित एक प्रकरण में आदेश दिया गया था कि कैट की प्रिंसिपल बेंच नई दिल्ली के आदेश को केवल दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष ही चुनौती दी जा सकती थी और मामले से संबंधित प्रदेश के कोलकाता उच्च न्यायालय में नहीं। इधर उत्तराखंड में चतुर्वेदी के मामले में अक्टूबर, 2021 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार ने एक विशेष अनुमति याचिका दायर की थी जिसमें दिसंबर, 2020 में आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई स्थानांतरित करने के संबंध में कैट के अध्यक्ष के आदेश को निरस्त कर दिया गया था।

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ये था मामला?
इससे पहले फरवरी 2020 में संजीव ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की नैनीताल पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की थी, जिसमें केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर पर वर्तमान पैनल प्रणाली और संयुक्त सचिव स्तर पर लेटरल एंट्री की प्रणाली को चुनौती दी गई थी। दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार की याचिका पर कैट के तत्कालीन अध्यक्ष ने इस मामले की सुनवाई कैट की दिल्ली बेंच को स्थानांतरित करने का आदेश पारित करते हुए कहा था कि इसमें विचाराधीन प्रकरण राष्ट्रीय महत्व का है। इस आदेश को चतुर्वेदी ने नैनीताल उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिसने अक्टूबर में फैसला सुनाया था।

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