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नरभक्षी ने महिलाओं को मार डाला: डीएफओ बोले- खबर छापकर मुझे व्हाट्सएप पर भेज दीजिएगा, तो मेरी जान बच जाएगी

Thu, 14 Dec 2023 10:34 AM IST
हीरा मेहरा हरीश चंद्र पांडे, संवाद
हरीश चंद्र पांडे, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 14 Dec 2023 10:34 AM IST
सार

नैनीताल जिले में बाघ द्वारा मानव मृत्यु की दो घटनाएं किए जाने के बाद नैनीताल डीएफओ ने 9 दिसंबर को बाघ को अंतिम विकल्प के रूप में नष्ट करने की अनुमति मांगी थी। 10 दिसंबर को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के स्तर पर अनुमति भी दे दी गई।

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Statement of Nainital DFO Chandrashekhar Joshi in the case of tiger killing two women
नैनीताल डीएफओ चंद्रशेखर जोशी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल के भीमताल ब्लॉक स्थित मलुवाताल के तोक कसाइल और पिनरों के डोब गांव में नरभक्षी के दो महिलाओं को मौत के घाट उतारने वाले मामले में नया मोड़ आ गया है। नैनीताल डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने अमर उजाला से कहा कि आप दो चीज छपवा दीजिए कि मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। बाघ को अंतिम विकल्प के रूप में नष्ट करने के आदेश जारी हुए हैं। इतना छाप दीजिए मेरा काम हो जाएगा। खबर छापकर सुबह-सुबह मुझे व्हाट्सएप पर भेज दीजिएगा। मेरी जान बच जाएगी।

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दो महिलाओं को मौत के घाट उतारने वाला तेंदुए था या बाघ इस तथ्य की डीएफओ की ओर से पुष्टि नहीं की जा रही थी। सात दिसंबर को मलुवाताल के तोक कसाइल की इंद्रा देवी की बाघ के हमले से मौत होने के बाद सुरक्षा के दृष्टिगत बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने और ट्रैंक्यूलाइज करने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखंड को पत्र भेजकर अनुमति मांगी गई थी। 9 दिसंबर को भीमताल के पिनरों डोब निवासी पुष्पा देवी को भी बाघ ने मौत के घाट उतार दिया था। 
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बाघ द्वारा मानव मृत्यु की दो घटनाएं किए जाने के बाद नैनीताल डीएफओ ने 9 दिसंबर को बाघ को अंतिम विकल्प के रूप में नष्ट करने की अनुमति मांगी थी। 10 दिसंबर को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के स्तर पर अनुमति भी दे दी गई। लेकिन, महिलाओं को मौत के घाट उतारने वाला तेंदुआ था या बाघ? डीएफओ की ओर से मीडिया को स्पष्ट नहीं किया जा रहा था। वन्यजीव को लेकर मीडिया को भ्रम में रखा गया। उनका कहना था कि बाघ और गुलदार में ज्यादा अंतर नहीं होता है। केवल हिंसक वन्यजीव लिखिए।
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नैनीताल डीएफओ झूठ बोल रहे हैं। पल-पल अपनी बात बदल रहे हैं। पता नहीं, उन पर किस अधिकारी का दबाव है। 10 दिसंबर को डीएफओ ने दस गांव के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के समक्ष कहा था कि नरभक्षी को मारने की अनुमति मिल चुकी है। डीएफओ महिलाओं को मारने वाले जीव को बाघ कहने से बच रहे थे लेकिन हमला करने वाला बाघ ही था। डीएफओ को इस तरह गुमराह नहीं करना चाहिए। 
-राम सिंह कैड़ा, विधायक भीमताल

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