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Nainital News: उल्कापात के नजारे दिखाने के लिए एरीज में विशेष इंतजाम

Wed, 13 Dec 2023 01:56 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Wed, 13 Dec 2023 01:56 AM IST
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Special arrangements in Aries to show the views of meteorite fall
प्रतीकात्मक
नैनीताल। दिसंबर के पहले तीन हफ्ते आसमान में नजर आने वाले उल्कापातों में न केवल सबसे अधिक चमक होती है बल्कि उल्काओं की संख्या में कहीं अधिक रहती है। इन्हें जेमिनीड उल्कापात के रूप में पहचाना जाता है। इस बार 13-14 दिसंबर को होने वाले उल्कापात के नजारे को दिखाने के लिए आर्यभट्ट प्रेक्षण एवं शोध विज्ञान संस्थान में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
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एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डा. वीरेंद्र यादव ने बताया कि 13 दिसंबर से 15 दिसंबर तक आसमान में जमकर उत्कापात होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 14 दिसंबर को जेमिनीड उल्कापात अन्य वर्षों की अपेक्षा भव्य होने वाला है। डॉ. यादव ने बताया कि एरीज में 13 दिसंबर की रात 11 बजे से सुबह चार बजे तक उल्कापात देखने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। 14 दिसंबर को मौसम विभाग के पुर्वानुमान के मुताबिक बादल छाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि उल्कापात के इस नजारे को देखने के लिए - https://forms.gle/CGZT7U7HbXw2Dvwf6 लिंक पर जाकर फार्म भरकर पंजीकरण कर लें। बताया कि कोई भी व्यक्ति इस नजारे को देखने के लिए एरीज में आ सकता है।
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टूटता तारा तो मिथ्या नाम है, यही उल्का है

नैनीताल। जिसे सामान्य भाषा में टूटता तारा कहा जाता है वह टूटता तारा नहीं बल्कि उल्कापात ही है। खगोल वैज्ञानिक डॉ वीरेंद्र यादव बताते हैं कि टूटता तारा केवल एक मिथ्या नाम है क्योंकि उल्काओं का तारे से कोई लेना-देना नहीं है। यह किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह, जो पहले कभी पृथ्वी के करीब से गुजरा होगा के द्वारा छोड़े गए मलबे के बादल से आने वाला एक छोटा पत्थर या धूल का कण है। जब यह कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है तो घर्षण के कारण उसका तापमान बढ़ जाता है और अंततः वह जलने लगता है। चूंकि ज्यादातर कण बहुत छोटे होते हैं, इसलिए यह मुश्किल से एक सेकंड से भी कम समय तक प्रकाश की एक लकीर जैसे दिखाई देते हैं। उल्कापात तब होता है जब एक रात में बहुत सारी उल्काएं दिखाई देती हैं और पीछे की दिशा में खींचने पर आकाश के एक छोटे से क्षेत्र से उत्पन्न होती प्रतीत होती हैं। माई सिटी रिपोर्टर
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बगैर किसी उपकरण के देखें उल्कापात के नजारे

नैनीताल। डॉ. यादव कहते हैं कि यदि आप एरीज में नहीं आ सकते तो भी आप कम रोशनी वाले किसी खुले क्षेत्र में जा सकते हैं और उल्काओं को देखने के लिए आकाश की ओर निहार सकते हैं। माई सिटी रिपोर्टर
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