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सपा की साइकिल, नहीं जीत पाई उत्तराखंड का दिल
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पूर्व मंत्री प्रताप भैय्या के पुत्र ज्योति प्रकाश और रानीखेत के विधायक जसवंत सिंह की पुत्री तार?
- फोटो : NAINITAL
नैनीताल। उत्तराखंड राज्य की स्थापना में स्व. मुलायम सिंह यादव का अहम योगदान इस रूप में कहा जा सकता है कि यूपी का मुख्यमंत्री रहने के दौरान कैबिनेट मंत्री रमाशंकर कौशिक के नेतृत्व में समिति बनाकर उन्होंने इसके लिए व्यापक सर्वे कराया। इस समिति ने पृथक राज्य की मांग को उचित माना और इसका खाका भी तैयार किया। उनकी सरकार ने इसे स्वीकार भी किया, लेकिन अलग राज्य की मांग के दौरान हुए आंदोलन में पुलिस की बर्बरता ने उनकी छवि असर डाला। यही वजह है कि आज भी नेताजी के लिए उत्तराखंड के लोगों का मन मुलायम नहीं हुआ।
मुलायम सिंह ने पूर्व में हेमवती नंदन बहुगुणा की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए गठित पर्वतीय विकास विभाग को सशक्त बनाने के लिए इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद सृजित किया था। पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी देखते हुए शिक्षा मित्रों की नियुक्ति की पहल की, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिला। जनता दल से अलग होकर चार अक्तूबर 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन करने के बाद 1993 में सपा का पहला अधिवेशन उन्होंने नैनीताल में आयोजित किया जिसमें मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष के रूप में वे स्वयं उपस्थित रहे। इन सारी अच्छाइयों के बीच राज्य आंदोलन के दौरान 1994 में उनके शासनकाल में आंदोलनकारियों पर मसूरी, खटीमा और मुजफ्फरनगर सहित अन्यत्र हुईं ज्यादतियों, गोलीकांड और आहत करने वाले बयानों से उत्तराखंड की जनता के दिलों में जो घाव बने वे 28 वर्षों के बाद भी नहीं भरे। इसका खामियाजा उनकी समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ा और राज्य गठन के बाद से आज तक भी भुगत रही है। विधानसभा चुनावों में सपा को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। हालांकि 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने हरिद्वार पर जीत का परचम लहराया था। संवाद
हर चुनाव में राज्य में सपा का वोट प्रतिशत घटता गया।
वर्ष चुनाव लड़ा मत प्रतिशत
2002 56 सीटों आठ फीसदी
2007 42 सीटों साढ़े छह फीसदी
2012 32 सीटों डेढ़ प्रतिशत
2017 18 सीटों पर 0.4 प्रतिशत
2022 54 0.2 प्रतिशत
* 2022 में सपा को नोटा (0.8 प्रतिशत) से भी कम (0.8 प्रतिशत) वोट मिले। 54 में से 50 उम्मीदवार 500 वोट भी नहीं ला सके।
फोटो 10 एनटीएल 06 पी व 07 पी
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मुलायम के आने पर लगा था रानीखेत में कर्फ्यू
स्वास्थ्य मंत्री के बेटे के विवाह के दौरान हुई थी आगजनी और तोड़फोड़
संवाद न्यूज एजेंसी
नैनीताल। शहर के समाजवादी नेता और यूपी में स्वास्थ्य मंत्री रहे प्रताप भैय्या के पुत्र अधिवक्ता ज्योति प्रकाश का विवाह आठ दिसंबर 1990 को रानीखेत से यूकेडी विधायक जसवंत सिंह बिष्ट की पुत्री तारा से हुआ था। विवाह समारोह में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भी आए थे। इसके कुछ ही समय पहले केंद्र की तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने 7 अगस्त 1990 को मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू की थीं, जिसके विरोध में पहाड़ पर भी आंदोलन चल रहा था।
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मुलायम सिंह यादव, नितीश कुमार आदि इन सिफारिशों के प्रबल समर्थक थे। मुलायम सिंह यादव के रानीखेत आगमन की सूचना पर भाजपा नेताओं व अन्य लोगों ने उनका विरोध किया। कई बसों में तोड़फोड़ की गई, जहां विवाह समारोह हो रहा था उस होटल में पथराव और आगजनी की घटना हुई। इसके चलते रानीखेत में कर्फ्यू लगा दिया गया था। पुलिस की निगरानी और पहरे में बरात की विदाई हो सकी।
तारा बोरा बताती हैं कि आज भी जब विवाह की याद आती है तो वे दृश्य सामने आ जाते हैं कि पहाड़ के लोग दिल से सरल और ईमानदार होते हैं। अतिथि देवो भव की परंपरा को भी मानते हैं, लेकिन पहाड़ की एक पुत्री के विवाह में ऐसा सत्कार भी हुआ जिसकी कल्पना दशकों बाद भी सिहरन पैदा कर देती है। तारा ने मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस घटना को वह और उनका परिवार कभी नहीं भूल सकता।
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मुलायम सिंह ने पूर्व में हेमवती नंदन बहुगुणा की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए गठित पर्वतीय विकास विभाग को सशक्त बनाने के लिए इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद सृजित किया था। पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी देखते हुए शिक्षा मित्रों की नियुक्ति की पहल की, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिला। जनता दल से अलग होकर चार अक्तूबर 1992 को समाजवादी पार्टी का गठन करने के बाद 1993 में सपा का पहला अधिवेशन उन्होंने नैनीताल में आयोजित किया जिसमें मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष के रूप में वे स्वयं उपस्थित रहे। इन सारी अच्छाइयों के बीच राज्य आंदोलन के दौरान 1994 में उनके शासनकाल में आंदोलनकारियों पर मसूरी, खटीमा और मुजफ्फरनगर सहित अन्यत्र हुईं ज्यादतियों, गोलीकांड और आहत करने वाले बयानों से उत्तराखंड की जनता के दिलों में जो घाव बने वे 28 वर्षों के बाद भी नहीं भरे। इसका खामियाजा उनकी समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ा और राज्य गठन के बाद से आज तक भी भुगत रही है। विधानसभा चुनावों में सपा को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। हालांकि 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने हरिद्वार पर जीत का परचम लहराया था। संवाद
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हर चुनाव में राज्य में सपा का वोट प्रतिशत घटता गया।
वर्ष चुनाव लड़ा मत प्रतिशत
2002 56 सीटों आठ फीसदी
2007 42 सीटों साढ़े छह फीसदी
2012 32 सीटों डेढ़ प्रतिशत
2017 18 सीटों पर 0.4 प्रतिशत
2022 54 0.2 प्रतिशत
* 2022 में सपा को नोटा (0.8 प्रतिशत) से भी कम (0.8 प्रतिशत) वोट मिले। 54 में से 50 उम्मीदवार 500 वोट भी नहीं ला सके।
फोटो 10 एनटीएल 06 पी व 07 पी
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मुलायम के आने पर लगा था रानीखेत में कर्फ्यू
स्वास्थ्य मंत्री के बेटे के विवाह के दौरान हुई थी आगजनी और तोड़फोड़
संवाद न्यूज एजेंसी
नैनीताल। शहर के समाजवादी नेता और यूपी में स्वास्थ्य मंत्री रहे प्रताप भैय्या के पुत्र अधिवक्ता ज्योति प्रकाश का विवाह आठ दिसंबर 1990 को रानीखेत से यूकेडी विधायक जसवंत सिंह बिष्ट की पुत्री तारा से हुआ था। विवाह समारोह में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भी आए थे। इसके कुछ ही समय पहले केंद्र की तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने 7 अगस्त 1990 को मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू की थीं, जिसके विरोध में पहाड़ पर भी आंदोलन चल रहा था।
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मुलायम सिंह यादव, नितीश कुमार आदि इन सिफारिशों के प्रबल समर्थक थे। मुलायम सिंह यादव के रानीखेत आगमन की सूचना पर भाजपा नेताओं व अन्य लोगों ने उनका विरोध किया। कई बसों में तोड़फोड़ की गई, जहां विवाह समारोह हो रहा था उस होटल में पथराव और आगजनी की घटना हुई। इसके चलते रानीखेत में कर्फ्यू लगा दिया गया था। पुलिस की निगरानी और पहरे में बरात की विदाई हो सकी।
तारा बोरा बताती हैं कि आज भी जब विवाह की याद आती है तो वे दृश्य सामने आ जाते हैं कि पहाड़ के लोग दिल से सरल और ईमानदार होते हैं। अतिथि देवो भव की परंपरा को भी मानते हैं, लेकिन पहाड़ की एक पुत्री के विवाह में ऐसा सत्कार भी हुआ जिसकी कल्पना दशकों बाद भी सिहरन पैदा कर देती है। तारा ने मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस घटना को वह और उनका परिवार कभी नहीं भूल सकता।