प्रिंटिंग में गड़बड़ी: छपाई के गणित में लापरवाही का शास्त्र, अर्थशास्त्र की पुस्तक में समाजशास्त्र का सिलेबस
सरकारी विद्यालयों की पुस्तकों की प्रिंटिंग में भारी लापरवाही सामने आ रही है। जिस किताब को अर्थशास्त्र की समझकर बच्चों को बांटने के लिए स्कूल तक ले जाया गया, पन्ने पलटने पर वह पुस्तक समाजशास्त्र की निकली।
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सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को एक तो समय पर किताबें नहीं मिल पाईं और अब पुस्तकों की प्रिंटिंग में भारी लापरवाही सामने आ रही है। जिस किताब को अर्थशास्त्र की समझकर बच्चों को बांटने के लिए स्कूल तक ले जाया गया, पन्ने पलटने पर वह पुस्तक समाजशास्त्र की निकली। 11वीं कक्षा के बच्चों के लिए आई किताब का कवर तो अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी का है लेकिन भीतर समाजशास्त्र का सिलेबस है। जेल रोड स्थित सीआरसी में गलत प्रिंट की गईं किताबों के बंडल वापस आ रहे हैं। इससे समाजशास्त्र की किताबों की संख्या तो बढ़ गई लेकिन अर्थशास्त्र की पुस्तकों में कमी आई है।
किताबों के लिए हर साल होते हैं करोड़ों रुपये के टेंडर
सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से इंटमीडिएट तक के छात्र-छात्राओं को हर वर्ष निशुल्क किताबों का वितरण किया जाता है। इसके लिए करोड़ों रुपये के टेंडर होते हैं। पहले तो समय पर किताबें छपकर विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाती हैं और छपने के बाद इस तरह की लापरवाही उनकी शिक्षा को प्रभावित करती है। विषय और सिलेबस में अंतर होने से स्कूलों के शिक्षकों को सीआरसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अर्थशास्त्र की पुस्तक की कमी अब भी स्कूलों में बनी है। कई विद्यार्थी ऐसे हैं जिन्हें किताब ही नहीं मिल पाईं हैं।
हल्द्वानी में होती है छपाई
जिले के सरकारी विद्यालयों की अधिकतर किताबें हल्द्वानी से ही प्रिंट होकर आती हैं। सीईओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र की लगभग दस-दस हजार किताबों की डिमांड रहती है। इसी आधार पर किताबें छपती हैं।
हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र एक लाख से अधिक पुस्तकों का वितरण
हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में अब तक एक लाख से अधिक किताबों का वितरण किया जा चुका है। क्षेत्र में 57 सरकारी विद्यालय हैं जिनमें लगातार किताबें बांटी जा रही हैं। विषय और सिलेबस में अंतर होने के कारण हल्द्वानी सीआरसी में स्कूलों से किताबों के बंडल लौटाए जा रहे हैं।
इस प्रकार का मामला संज्ञान में नहीं है। यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो इस संबंध में प्रकाशक से बात की जाएगी। विद्यार्थियों को उनके विषयों से संबंधित हर किताब दी जाएगी। - जीआर जायसवाल, सीईओ नैनीताल।