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समाज कल्याण से आशा को मिली निराशा
राजेश नेगी लालकुआं (नैनीताल)।
Updated Fri, 27 May 2016 12:28 AM IST
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उत्तराखंड राज्य में सब कुछ संभव है। यहां प्रतिभाओं की उपेक्षा करना जैसे सरकारों के लिए कोई मायने नहीं रखता। माफियाराज पनप रहा है पर किसी का ध्यान इस ओर नहीं है। देश को गौरवान्वित करने वाले अपने प्रदेश में सरकारों की उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। कुछ इसी तरह की कहानी है प्रथम वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार के सम्मानित जन कवि और समाज सेवा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली आशा शैली की।
आशा शैली के जीवन यापन का एकमात्र साधन समाज कल्याण से मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन है। समाज कल्याण विभाग ने तीलू रौतेली पुरस्कार से नवाजी गई 73 वर्षीय आशा शैली को एक वर्ष से पेंशन नहीं दी है। तहसील से लेकर समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटते काटते थक चुकी आशा ने अपनी व्यथा ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को भी अवगत कराई मगर अब तक की संघर्ष भरी दास्तान का सिलसिला जारी है।
आशा को मिली है तो सिर्फ निराशा। कार रोड बिंदुखत्ता निवासी आशा शैली का जीवन बचपन से ही संघर्षों में बीता है। एकाकी जीवन जी रही आशा ने अपने नाम को सार्थक करते हुए जिंदगी को उम्मीद व आशा के सहारे जीना सीखा। तत्कालीन सरकार द्वारा उन्हें वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत की गई, जो अब अप्रैल 2015 से बंद पड़ी है। इसको लेकर उन्होंने सत्यापन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के साथ ही अन्य जरूरी कागजात भी उपलब्ध करा दिए, मगर बार बार उन्हें टाला जाता रहा।
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इस पर उन्होंने अपनी आपबीती महामहिम राज्यपाल को भी पत्र के माध्यम से बताई। इतना ही नहीं उन्होंने आरटीआई के तहत भी पेंशन न मिलने की वजह जानी। इस पर उन्हें बताया गया कि संबधित बैंक का आईएफएससी कोड नहीं देने से पेंशन अकाउंट में नहीं जा सकी। उन्होंने बैंक पास बुक की छाया प्रति मय कोड के उपलब्ध करा दी। आशा शैली ने बताया कि पेंशन तो उन्हें अब तक नहीं मिली।
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आशा शैली के जीवन यापन का एकमात्र साधन समाज कल्याण से मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन है। समाज कल्याण विभाग ने तीलू रौतेली पुरस्कार से नवाजी गई 73 वर्षीय आशा शैली को एक वर्ष से पेंशन नहीं दी है। तहसील से लेकर समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटते काटते थक चुकी आशा ने अपनी व्यथा ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को भी अवगत कराई मगर अब तक की संघर्ष भरी दास्तान का सिलसिला जारी है।
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आशा को मिली है तो सिर्फ निराशा। कार रोड बिंदुखत्ता निवासी आशा शैली का जीवन बचपन से ही संघर्षों में बीता है। एकाकी जीवन जी रही आशा ने अपने नाम को सार्थक करते हुए जिंदगी को उम्मीद व आशा के सहारे जीना सीखा। तत्कालीन सरकार द्वारा उन्हें वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत की गई, जो अब अप्रैल 2015 से बंद पड़ी है। इसको लेकर उन्होंने सत्यापन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के साथ ही अन्य जरूरी कागजात भी उपलब्ध करा दिए, मगर बार बार उन्हें टाला जाता रहा।
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इस पर उन्होंने अपनी आपबीती महामहिम राज्यपाल को भी पत्र के माध्यम से बताई। इतना ही नहीं उन्होंने आरटीआई के तहत भी पेंशन न मिलने की वजह जानी। इस पर उन्हें बताया गया कि संबधित बैंक का आईएफएससी कोड नहीं देने से पेंशन अकाउंट में नहीं जा सकी। उन्होंने बैंक पास बुक की छाया प्रति मय कोड के उपलब्ध करा दी। आशा शैली ने बताया कि पेंशन तो उन्हें अब तक नहीं मिली।