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सांपों को भूकंप का ‘घर निकाला’!
विजेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला,हल्द्वानी
Updated Sat, 09 May 2015 01:03 AM IST
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शहर समेत आसपास के क्षेत्र में सांपों की ‘बाढ़’ आ गई है। आलम यह है कि सप्ताह भर के भीतर ही मेडिकल कालेज में 14 फिट का किंग कोबरा, नौ फिट का अजगर, घोड़ा पछाड़ जैसे सांप वन विभाग की टीम ने पकड़े हैं। इसके पीछे महज बढ़ रही गर्मी ही नहीं, भूकंप को भी बड़ी वजह माना जा रहा है।
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वनाधिकारी इस वजह पर मुहर लगा ही रहे हैं, वन्य जीव विशेषज्ञ भी यह यह मान रहे हैं कि बिलों में रहने वाले जीवों मसलन सांप आदि को भूगर्भ में होने वाली हलचलों की जल्द जानकारी हो जाती है। उनके बिलों के बाहर आने के पीछे भूकंपीय कंपन वजह हो सकता है।
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भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून के विशेषज्ञ विभाष पांडव के मुताबिक इस संबंध में कोई अध्ययन नहीं हुआ है, लेकिन यह जरूर है कि सांप जैसे बिलों के भीतर रहने वाले जीव भूकंपीय कंपन के जरिए हल-चल को जल्द भांप लेते हैं। तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि सांप के तो वैसे भी कान नहीं होते हैं, उसका सारा मूवमेंट और एक्शन कंपन पर ही निर्भर करता है।
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ऐसे में बहुत संभव है कि सांप भूकंपीय कंपन या भूकंप की वजह से बिलों से बाहर निकल आए हों। गर्मी तो सांपों के बिलों से बाहर निकलने का एक अहम् कारण है ही। सांप ठंडे खून के जीव होते हैं, जब गर्मी बढ़ती है, तो वह और ठंडक की तलाश में बिलों से बाहर आ जाते हैं। प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन नीतिशमणि त्रिपाठी भी मानते हैं कि भूकंप भी सांप के बिलों से बाहर आने की वजह हो सकती है।
व्यवहार में भी बदलाव
वन्यजीव विशेषज्ञों को सांपों के व्यवहार में बदलाव के भी संकेत मिले हैं। नंधौर अभ्यारण्य के उप निदेशक प्रकाश आर्य ने तकरीबन तीन-चार साल पहले जाड़े में सांपों के व्यवहार को लेकर अध्ययन कराया था, इसमें जाड़े में भी खूब सांप निकले थे, जबकि सांप कड़ाके की ठंड में तुलनात्मक तौर पर बहुत कम बाहर निकलते हैं।