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शेरवुड कॉलेज : कार्यवाहक प्रधानाचार्य को कार्यभार सौंपने का मामला कोर्ट पहुंचा, न्यायमूर्ति मैठाणी ने सुनवाई से खुद को अलग किया

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Dec 2020 02:09 AM IST
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Sherwood College: Case for assigning charge to Acting Principal reached court, Justice Mathani recused himself from hearing
नैनीताल। शेरवुड कॉलेज में स्वामित्व तथा कार्यवाहक प्रधानाचार्य को कार्यभार न दिए जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। आगरा डायसिस ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य पीटर इमेन्युअल को सुरक्षा देने संबंधी आदेश को संशोधित करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ में सुनवाई हुई लेकिन न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। अब बृहस्पतिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली दूसरी खंडपीठ में मामले की सुनवाई होगी।
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आगरा डायसिस का दावा है कि शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को अनियमितताएं किए जाने पर 21 अक्तूबर को निलंबित करते हुए पीटर इमेन्युअल को कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया। 22 अक्तूबर को इमेन्युअल जब कार्यभार के लिए कॉलेज पहुंचे तो उन्हें गेट से अंदर नहीं जाने दिया गया। इसके बाद आगरा डायसिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए। इसके बाद पिछले सप्ताह आगरा डायसिस के चेयरमैन पीपी हाबिल कार्यवाहक प्रधानाचार्य पीटर इमेन्युअल के साथ कॉलेज पहुंचे तो वहां गेट में ताला जड़ दिया गया। इस बीच घंटों चली गहमा-गहमी के बाद वह लौट गए।
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आगरा डायसिस की ओर से अब हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। इसमें कार्यवाहक प्रधानाचार्य पीटर इमेन्युअल को सुरक्षा मुहैया कराने संबंधी आदेश को संशोधित करने की मांग की गई है। इधर शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू का कहना है कि आगरा डायसिस में 2010 के बाद से कोई चेयरमैन नहीं है। चेयरमैन पद पर कई लोगों ने दावा कर रखा है और यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में हाबिल को उन्हें हटाने या किसी और को नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। संधू के अनुसार एक अन्य प्रकरण में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच संधू को प्रधानाध्यापक पद पर कार्य करते रहने के निर्देश दे चुकी है और वे कोर्ट के आदेश से विधिक रूप से इस पद पर कार्यरत हैं।
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