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छात्रवृत्ति घोटाला : पैसा जमा कराने वाले संस्थानों के लिए अलग खाता खुलवाएं
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले की सुनवाई के बाद समाज कल्याण विभाग को 13 मार्च तक शपथपत्र पेश करने को कहा है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव वित्त को राशि जमा कराने वाले संस्थानों के लिए अलग से खाता खोलने को कहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान व अन्य की याचिका पर मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एसआईटी प्रमुख टीसी मंजूनाथ ने कोर्ट को बताया कि समाज कल्याण विभाग की ओर से जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा। इस वजह से जांच में देरी हो रही है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए समाज कल्याण सचिव को 13 मार्च तक शपथपत्र दाखिल कर जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि जवाब दाखिल न करने पर सचिव समाज कल्याण को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।
सुनवाई के दौरान कुछ कॉलेजों ने कोर्ट को बताया कि वे छात्रवृत्ति की राशि जमा कराना चाहते हैं लेकिन एसआईटी उसे जमा नहीं कर रही है। एसआईटी ने कोर्ट को बताया यह पैसा जमा कराने को उनके पास कोई अलग से खाता नहीं है। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव वित्त को आदेश दिया कि पैसा जमा कराने वाले संस्थानों के लिए अलग से खाता खुलवाएं।
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सीबीआई जांच चाहते हैं याची
देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2005 से प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति का घोटाला किया गया है। यह घोटाला करीब पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का है। इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। याचियों का कहना था कि छात्रवृत्ति का पैसा छात्रों को न देकर स्कूलों को दिया गया या फिर उन लोगों को दिया गया जो उस स्कूल के छात्र ही नहीं थे।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान व अन्य की याचिका पर मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एसआईटी प्रमुख टीसी मंजूनाथ ने कोर्ट को बताया कि समाज कल्याण विभाग की ओर से जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा। इस वजह से जांच में देरी हो रही है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए समाज कल्याण सचिव को 13 मार्च तक शपथपत्र दाखिल कर जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि जवाब दाखिल न करने पर सचिव समाज कल्याण को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।
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सुनवाई के दौरान कुछ कॉलेजों ने कोर्ट को बताया कि वे छात्रवृत्ति की राशि जमा कराना चाहते हैं लेकिन एसआईटी उसे जमा नहीं कर रही है। एसआईटी ने कोर्ट को बताया यह पैसा जमा कराने को उनके पास कोई अलग से खाता नहीं है। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव वित्त को आदेश दिया कि पैसा जमा कराने वाले संस्थानों के लिए अलग से खाता खुलवाएं।
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सीबीआई जांच चाहते हैं याची
देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2005 से प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति का घोटाला किया गया है। यह घोटाला करीब पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का है। इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। याचियों का कहना था कि छात्रवृत्ति का पैसा छात्रों को न देकर स्कूलों को दिया गया या फिर उन लोगों को दिया गया जो उस स्कूल के छात्र ही नहीं थे।