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सुरक्षित प्रसव में आड़े आता है कहीं डाक्टरों की कमी तो कहीं संसाधनों का टोटा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jul 2022 12:27 AM IST
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Safe delivery comes in the way of shortage of doctors and lack of resources
नैनीताल। जिले के पर्वतीय क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में कहीं चिकित्सकों तो कही संसाधनों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर प्रसव की सुुविधा नहीं मिलती है। सरकारी अस्पतालों से गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर के नाम पर हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले के सभी सीएचसी में प्रसव की सुविधा उपलब्ध है।
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जिले के ओखलकांडा ब्लाक स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है जिससे कि वहां गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराया जा सके। इसी तरह सीएचसी बेतालघाट व सुयालबाड़ी में गर्भवती महिलाओं की न तो जांच की सुविधा उपलब्ध है और न ही यहां प्रसव कराए जाते हैं। इन स्थानों के सरकारी अस्पतालों से अधिकांश गर्भवती महिलाओं को आपातकालीन वाहन 108 के माध्यम से हल्द्वानी को रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी गरमपानी से भी अधिकांश गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए हल्द्वानी भेजा जाता है। जबकि सीएचसी भवाली में स्थानीय स्तर पर ही गर्भवती महिलाओं के प्रसव कराए जाते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो पर्वतीय क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में महिला चिकित्सकों की कमी व अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण गर्भवती महिलाओं के प्रसव नहीं कराए जाते हैं।
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-इनसेट
नैनीताल-भीमताल के सरकारी अस्पतालों में होते हैं प्रसव
नैनीताल। बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल में ऐसे सरकारी अस्पताल हैं जहां कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी स्थानीय स्तर पर महिलाओं को प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
बीडी पांडे अस्पताल की गायनोलॉजिस्ट डॉ. द्रोपदी गर्ब्याल ने बताया कि अस्पताल में महीने में औसतन 60-70 प्रसव कराए जाते हैं, जिसमें से 15-20 का आपरेशन किया जाता है जबकि अन्य सभी की नार्मल डिलीवरी होती है। इक्का दुक्का केस रेफर किए जाते हैं। जबकि भीमताल में महीने में प्रसव का औसत 25 से अधिक रहता है। (माई सिटी रिपोर्टर)

कोट-
जिले में दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन सभी अस्पतालों में प्रसव कराए जाते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में केवल एक चिकित्सक और एक फार्मासिस्ट ही होता है। वहां डिलीवरी नहीं हो सकती। ओखलकांडा, मोटाहल्दू व बैलपड़ाव में टाइप बी के पीएचसी हैं, वहां भी प्रसव कराए जा रहे हैं। कई बार गर्भवती महिलाओं की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें प्रसव के लिए अन्यत्र रेफर करना पड़ता है। डॉ. भागीरथी जोशी मुख्य चिकित्साधिकारी नैनीताल।
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