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जब महिलाओं ने अपने जेवर गांधी जी को सौंप दिए थे
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अल्मोड़ा के लक्ष्मेश्वर में गांधी सभा स्थल पर बना शहीद स्मारक। 20 जून 1929 को बापू ने इसी जगह विशाल जन?
- फोटो : ALMORA
नैनीताल। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों से कुमाऊं के लोग खासे प्रभावित थे। यही कारण था कि उनके एक आह्वान पर नैनीताल और अल्मोड़ा समेत कई स्थानों पर महिलाओं ने राष्ट्र हित के लिए अपने जेवर तक उतारकर दे दिए थे।
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. अजय सिंह रावत बताते हैं कि महात्मा गांधी 13 जून 1938 को पहली बार नैनीताल आए थे। उनके साथ उनकी पत्नी कस्तूरबा, बेटी देवदास समेत प्यारे लाल, जवाहर लाल नेहरू, आचार्य कृपलानी और सुचिता कृपलानी भी थीं। गांधी जी 13 जून से 14 जुलाई 1938 तक कुमाऊं में रहे। इस दौरान उन्होंने भवाली, ताड़ीखेत, अल्मोड़ा, बागेश्वर और कौसानी की यात्रा की। 14 जून 1929 को महात्मा गांधी ने नैनीताल में भवाली रोड पर अपने भाषण में कांग्रेस को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का आह्वान किया था। यहां महिलाओं ने गांधी जी को अपने जेवर तक सौंप दिए थे।
प्रो. रावत के मुताबिक 18 जून 1929 को महात्मा गांधी ने अल्मोड़ा के चौघानपाटा में जनसभा को संबोधित किया। कुमाऊं प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने 434.52 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने 26 जनसभाएं कीं और 31 स्थानों पर उन्हें सम्मानित किया गया।
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खासी प्रभावित रहीं महिलाएं
नैनीताल। प्रो. रावत बताते हैं कि महिलाएं गांधी जी से इतना अधिक प्रभावित थीं कि उन्होंने नमक सत्याग्रह से लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन तक में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इन आंदोलनों का नेतृत्व विशनी देवी, तुलसी देवी रावत और भक्ति त्रिवेदी ने किया था। अल्मोड़ा में महिलाओं ने अंग्रेजी सामान का बहिष्कार शुरू किया और शराब बंदी के लिए भी आंदोलन किया।
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प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. अजय सिंह रावत बताते हैं कि महात्मा गांधी 13 जून 1938 को पहली बार नैनीताल आए थे। उनके साथ उनकी पत्नी कस्तूरबा, बेटी देवदास समेत प्यारे लाल, जवाहर लाल नेहरू, आचार्य कृपलानी और सुचिता कृपलानी भी थीं। गांधी जी 13 जून से 14 जुलाई 1938 तक कुमाऊं में रहे। इस दौरान उन्होंने भवाली, ताड़ीखेत, अल्मोड़ा, बागेश्वर और कौसानी की यात्रा की। 14 जून 1929 को महात्मा गांधी ने नैनीताल में भवाली रोड पर अपने भाषण में कांग्रेस को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का आह्वान किया था। यहां महिलाओं ने गांधी जी को अपने जेवर तक सौंप दिए थे।
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प्रो. रावत के मुताबिक 18 जून 1929 को महात्मा गांधी ने अल्मोड़ा के चौघानपाटा में जनसभा को संबोधित किया। कुमाऊं प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने 434.52 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने 26 जनसभाएं कीं और 31 स्थानों पर उन्हें सम्मानित किया गया।
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खासी प्रभावित रहीं महिलाएं
नैनीताल। प्रो. रावत बताते हैं कि महिलाएं गांधी जी से इतना अधिक प्रभावित थीं कि उन्होंने नमक सत्याग्रह से लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन तक में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इन आंदोलनों का नेतृत्व विशनी देवी, तुलसी देवी रावत और भक्ति त्रिवेदी ने किया था। अल्मोड़ा में महिलाओं ने अंग्रेजी सामान का बहिष्कार शुरू किया और शराब बंदी के लिए भी आंदोलन किया।