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आईटीबीपी भर्ती दौड़ में हुई उल्टी, 14 दिन बाद दम तोड़ा
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पंकज पडियार। फाइल फोटो
लालकुआं/हल्द्वानी। आईटीबीपी भर्ती दौड़ में 14 अगस्त को बीमार पड़े युवक की 14 दिन बाद बरेली के एक अस्पताल में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दौड़ के बाद उसे उल्टी हुई थी। उसके दादा गणेश सिंह पडियार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।
नरतोला मुक्तेश्वर के मूल निवासी भुवन सिंह पडियार ने बताया कि उसके ताऊ नेकपाल सिंह का 21 वर्षीय बेटा पंकज सिंह पडियार (21) अपनी बड़ी बहन भावना के साथ भोटिया पड़ाव किराए के कमरे में लेकर बीएससी कर रहा था। 14 अगस्त को दौड़ते समय पंकज को उल्टी होने लगी। फिर भी उसने दौड़ पूरी कर ली। हालत बिगड़ने पर आईटीबीपी के जवानों ने उसे दवाएं दी। वह अपने दोस्त की स्कूटी पर बैठकर कुसुमखेड़ा हरिगोविंद सुयाल की गली में आया। कमरे में पानी पीने के बाद पंकज बेहोश होने लगा।
इसके बाद बड़ी बहन ने फोन कर भुवन को बुलाया। पंकज को लेकर परिजन पहले मुखानी चौराहा स्थित एक निजी चिकित्सालय गए। यहां डाक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद हाथ खड़े कर दिए। परेशान परिजनों ने उसे एसटीएच में भर्ती कराया। सुशीला तिवारी अस्पताल के डाक्टरों ने 15 अगस्त को उसे अन्य अस्पताल लेकर जाने की सलाह दी। परिजन उसे बरेली स्थित राममूर्ति अस्पताल गए। यहां इलाज के दौरान मंगलवार की शाम पंकज ने दम तोड़ दिया।
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पढ़ाई में अव्वल था
पंकज के चाचा राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह पढ़ाई में अव्वल था। उसने इसी साल एमबीपीजी हल्द्वानी से बीएससी अच्छे नंबरों से पास की थी। वह पार्ट टाइम बिग बाजार में भी काम करता था। उसके पिता नरतोला में ही छोटा सा मेडिकल स्टोर चलाते हैं। चार भाई-बहनों में वह दूसरे नंबर का था।
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नरतोला मुक्तेश्वर के मूल निवासी भुवन सिंह पडियार ने बताया कि उसके ताऊ नेकपाल सिंह का 21 वर्षीय बेटा पंकज सिंह पडियार (21) अपनी बड़ी बहन भावना के साथ भोटिया पड़ाव किराए के कमरे में लेकर बीएससी कर रहा था। 14 अगस्त को दौड़ते समय पंकज को उल्टी होने लगी। फिर भी उसने दौड़ पूरी कर ली। हालत बिगड़ने पर आईटीबीपी के जवानों ने उसे दवाएं दी। वह अपने दोस्त की स्कूटी पर बैठकर कुसुमखेड़ा हरिगोविंद सुयाल की गली में आया। कमरे में पानी पीने के बाद पंकज बेहोश होने लगा।
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इसके बाद बड़ी बहन ने फोन कर भुवन को बुलाया। पंकज को लेकर परिजन पहले मुखानी चौराहा स्थित एक निजी चिकित्सालय गए। यहां डाक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद हाथ खड़े कर दिए। परेशान परिजनों ने उसे एसटीएच में भर्ती कराया। सुशीला तिवारी अस्पताल के डाक्टरों ने 15 अगस्त को उसे अन्य अस्पताल लेकर जाने की सलाह दी। परिजन उसे बरेली स्थित राममूर्ति अस्पताल गए। यहां इलाज के दौरान मंगलवार की शाम पंकज ने दम तोड़ दिया।
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पढ़ाई में अव्वल था
पंकज के चाचा राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह पढ़ाई में अव्वल था। उसने इसी साल एमबीपीजी हल्द्वानी से बीएससी अच्छे नंबरों से पास की थी। वह पार्ट टाइम बिग बाजार में भी काम करता था। उसके पिता नरतोला में ही छोटा सा मेडिकल स्टोर चलाते हैं। चार भाई-बहनों में वह दूसरे नंबर का था।