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सड़क हादसे में विख्यात पर्वतारोही पद्मश्री अनूप साह पत्नी समेत घायल
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अंतराष्ट्रीय छायाकार अनूप साह व पत्नी दीपा साह दिल्ली के सड़क हादसे में घायल।
- फोटो : NAINITAL
नैनीताल। माउंटेन डे के दिन ख्याति प्राप्त अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर, पर्वतारोही एवं पद्मश्री से सम्मानित अनूप साह एवं उनकी पत्नी दीपा साह के दिल्ली में सड़क हादसे में घायल होने की खबर ने सरोवर नगरी और आसपास के क्षेत्र के लोगों को बेचैन कर दिया। साह दंपती की हालत में सुधार की खबर मिलने के बाद विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने राहत महसूस करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
प्रसिद्ध छायाकार और प्रकृति प्रेमी अनूप साह मंगलवार तड़के लगभग तीन बजे जब दिल्ली एयरपोर्ट से अपनी पत्नी दीपा के साथ कार में आ रहे तो नोएडा स्थित अपने घर के बिल्कुल नजदीक एक ट्रक ने उनकी टैक्सी में टक्कर मार दी, जिससे टैक्सी अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। वह मंगलवार को ही पत्नी को लेने नैनीताल से दिल्ली गए थे। अनूप साह के नजदीकी मित्र विनोद पांडे ने बताया कि दुर्घटना में उनकी हिप बोन डिसलोकेट हो गई थी जो अस्पताल में ठीक कर दी गई है, लेकिन उनके फेफड़ों में खून आ गया था तथा पेट में भी चोट का असर था। इनके आबजरवेशन के लिए उन्हें आईसीयू में रखा गया है। उनकी पत्नी दीपा के पैर में जांघ के निचले हिस्से में फ्रेक्चर है। वैसे दोनों ही खतरे से बाहर हैं। अनूप साह के भाई राजेश उनके साथ हैं। उनका इलाज नोएडा के कैलास हास्पिटल में चल रहा है। अनूप साह को इसी वर्ष 26 मार्च को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। अनूप साह और उनकी पत्नी दीपा के हादसे में घायल होने की खबर सोशल मीडिया में वायरल होते ही सरोवर नगरी के लोग बेचैन हो गए और साह दंपती के स्वास्थ्य लाभ की कामना करने लगे। दोपहर में जब साह दंपती की हालत सामान्य होने की खबर मिली तो लोगों ने राहत महसूस की।
नंदाखाट चोटी को फतह करने वाले पहले पर्वतारोही हैं साह
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले अनूप शाह का जीवन पर्वतारोहण, पर्यावरण संरक्षण और फोटोग्राफी को समर्पित रहा है। बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए उन्हें अब तक देश-विदेश के साढ़े तीन सौ से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं और वह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की साढ़े तीन हजार से अधिक प्रदर्शनियों में शिरकत कर चुके हैं। बेहद शांत और सरल स्वभाव के अनूप साह ने वर्ष 1970 में हिमालय की 6611 मीटर की ऊंची दुर्गम अविजित चोटी नंदाखाट को सबसे पहले फतह किया था। यही नहीं ट्रेल पास को भी 53 वर्षों के अंतराल के बाद वर्ष 2004 में साह ने फतह किया था। साह आईएमएफ के स्थायी सदस्य और इंडियन इंटरनेशनल फोटोग्राफिक काउंसिल के उपाध्यक्ष भी हैं। इंडो जापान नंदा देवी संयुक्त अभियान में वह शामिल रहे। वह वर्ष 1990 में अस्कोट आराकोट यात्रा और वर्ष 2002 में कैलाश मानसरोवर यात्रा भी कर चुके हैं।
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इसलिए कहे जाते हैं इनसाइक्लोपीडिया
ख्याति प्राप्त फोटोग्राफर अनूप साह को उत्तराखंड के पर्यावरण और जैव विविधता में न केवल गहरी समझ है बल्कि उन्हें हिमालय, हिमालयी वनस्पतियों और जैव विविधता का इनसाइक्लोपिडिया भी कहा जाता है। वर्तमान में भी वह जड़ी-बूटियों और बुग्यालों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
...ये कैसा संयोग
नैनीताल। यह एक संयोग की बात है कि हिमालय पर्वत की दुर्गम चोटियों को फतह करने वाले पर्वत प्रेमी अनूप साह अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के दिन ही दुर्घटना में घायल हुए। यह भी संयोग ही कहा जाएगा कि पहाड़ों, हिमालय एवं जंगलों की दुर्गम खाई और रास्तों को सदैव सकुशल विजित करने वाले साह को कंक्रीट के जंगल में दुर्घटना का शिकार होना पड़ा।
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प्रसिद्ध छायाकार और प्रकृति प्रेमी अनूप साह मंगलवार तड़के लगभग तीन बजे जब दिल्ली एयरपोर्ट से अपनी पत्नी दीपा के साथ कार में आ रहे तो नोएडा स्थित अपने घर के बिल्कुल नजदीक एक ट्रक ने उनकी टैक्सी में टक्कर मार दी, जिससे टैक्सी अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। वह मंगलवार को ही पत्नी को लेने नैनीताल से दिल्ली गए थे। अनूप साह के नजदीकी मित्र विनोद पांडे ने बताया कि दुर्घटना में उनकी हिप बोन डिसलोकेट हो गई थी जो अस्पताल में ठीक कर दी गई है, लेकिन उनके फेफड़ों में खून आ गया था तथा पेट में भी चोट का असर था। इनके आबजरवेशन के लिए उन्हें आईसीयू में रखा गया है। उनकी पत्नी दीपा के पैर में जांघ के निचले हिस्से में फ्रेक्चर है। वैसे दोनों ही खतरे से बाहर हैं। अनूप साह के भाई राजेश उनके साथ हैं। उनका इलाज नोएडा के कैलास हास्पिटल में चल रहा है। अनूप साह को इसी वर्ष 26 मार्च को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। अनूप साह और उनकी पत्नी दीपा के हादसे में घायल होने की खबर सोशल मीडिया में वायरल होते ही सरोवर नगरी के लोग बेचैन हो गए और साह दंपती के स्वास्थ्य लाभ की कामना करने लगे। दोपहर में जब साह दंपती की हालत सामान्य होने की खबर मिली तो लोगों ने राहत महसूस की।
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नंदाखाट चोटी को फतह करने वाले पहले पर्वतारोही हैं साह
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले अनूप शाह का जीवन पर्वतारोहण, पर्यावरण संरक्षण और फोटोग्राफी को समर्पित रहा है। बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए उन्हें अब तक देश-विदेश के साढ़े तीन सौ से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं और वह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की साढ़े तीन हजार से अधिक प्रदर्शनियों में शिरकत कर चुके हैं। बेहद शांत और सरल स्वभाव के अनूप साह ने वर्ष 1970 में हिमालय की 6611 मीटर की ऊंची दुर्गम अविजित चोटी नंदाखाट को सबसे पहले फतह किया था। यही नहीं ट्रेल पास को भी 53 वर्षों के अंतराल के बाद वर्ष 2004 में साह ने फतह किया था। साह आईएमएफ के स्थायी सदस्य और इंडियन इंटरनेशनल फोटोग्राफिक काउंसिल के उपाध्यक्ष भी हैं। इंडो जापान नंदा देवी संयुक्त अभियान में वह शामिल रहे। वह वर्ष 1990 में अस्कोट आराकोट यात्रा और वर्ष 2002 में कैलाश मानसरोवर यात्रा भी कर चुके हैं।
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इसलिए कहे जाते हैं इनसाइक्लोपीडिया
ख्याति प्राप्त फोटोग्राफर अनूप साह को उत्तराखंड के पर्यावरण और जैव विविधता में न केवल गहरी समझ है बल्कि उन्हें हिमालय, हिमालयी वनस्पतियों और जैव विविधता का इनसाइक्लोपिडिया भी कहा जाता है। वर्तमान में भी वह जड़ी-बूटियों और बुग्यालों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
...ये कैसा संयोग
नैनीताल। यह एक संयोग की बात है कि हिमालय पर्वत की दुर्गम चोटियों को फतह करने वाले पर्वत प्रेमी अनूप साह अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के दिन ही दुर्घटना में घायल हुए। यह भी संयोग ही कहा जाएगा कि पहाड़ों, हिमालय एवं जंगलों की दुर्गम खाई और रास्तों को सदैव सकुशल विजित करने वाले साह को कंक्रीट के जंगल में दुर्घटना का शिकार होना पड़ा।