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सबै नानतिनों कें म्योर प्यार, आशीष
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हल्द्वानी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुमाऊंनी भाषा में गोलज्यू की पवित्र धरती कुमाऊं में आपूं सबै भाई बैंणिन कें म्योर शत शत नमस्कार, सबै नानतिनान कैं म्योर प्यार आशीष, जागेश्वर, बागेश्वर, सोमेश्वर, रामेश्वर शिव स्थली को शत-शत प्रणाम शब्द के साथ जैसे ही अपना संबोधन शुरू किया रैली में मौजूद भीड़ गदगद हो गई और खूब तालियां बजने लगी। उनका कुमाऊंनी बोलने का अंदाज लोगों को काफी अच्छा लगा और मोदी ने अपने इस खास अंदाज से खूब तालियां बटोरीं।
पीएम ने करीब 37 मिनट तक मंच से संबोधन किया। उनके संबोधन के खास अंदाज से लोग और समर्थक गदगद नजर आए। उन्होंने भाषण के बीच में आसपास के घरों की छतों पर बैठे लोगों से कहा कि भाई काफी उत्साह है। जरा संभलकर रहना, आपको ऐसे छतों पर देखकर डर लगता है। उन्होंने भाषण के शुरुआत में कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का नाम लिया और उत्तरायणी मेले में कुली बेगार प्रथा के अंत की बातें कीं और कहा कि उन्हें आज यहां आने का मौका मिला है तो उनकी यादें ताजा हो गईं।
मुख्यमंत्री की ओर से उनके स्वागत में उन्हें पहनाई गई उत्तराखंडी टोपी पर भी प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें जितनी आत्मीयता से यह टोपी पहनाई गई है यह उनके लिए बड़े गर्व की बात है।
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उन्होंने अपने भाषण का समापन भी कुमाऊंनी भाषा में कुछ इस तरह किया। पोरू बटि साल 2022 उनेर छ आपूं सब उत्तराखंडीन कैं नई सालै बधै ऊंण साथै घुघुती त्यारैकि लेक बधै। (हालांकि घुघुती को वह धुरुती बोल गए थे)। पीएम ने इन दोनों संबोधनों से उत्तराखंड के प्रति अपनी आत्मीयता और गहरे संबंधों की ओर इशारा किया।
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पीएम ने करीब 37 मिनट तक मंच से संबोधन किया। उनके संबोधन के खास अंदाज से लोग और समर्थक गदगद नजर आए। उन्होंने भाषण के बीच में आसपास के घरों की छतों पर बैठे लोगों से कहा कि भाई काफी उत्साह है। जरा संभलकर रहना, आपको ऐसे छतों पर देखकर डर लगता है। उन्होंने भाषण के शुरुआत में कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का नाम लिया और उत्तरायणी मेले में कुली बेगार प्रथा के अंत की बातें कीं और कहा कि उन्हें आज यहां आने का मौका मिला है तो उनकी यादें ताजा हो गईं।
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मुख्यमंत्री की ओर से उनके स्वागत में उन्हें पहनाई गई उत्तराखंडी टोपी पर भी प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें जितनी आत्मीयता से यह टोपी पहनाई गई है यह उनके लिए बड़े गर्व की बात है।
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उन्होंने अपने भाषण का समापन भी कुमाऊंनी भाषा में कुछ इस तरह किया। पोरू बटि साल 2022 उनेर छ आपूं सब उत्तराखंडीन कैं नई सालै बधै ऊंण साथै घुघुती त्यारैकि लेक बधै। (हालांकि घुघुती को वह धुरुती बोल गए थे)। पीएम ने इन दोनों संबोधनों से उत्तराखंड के प्रति अपनी आत्मीयता और गहरे संबंधों की ओर इशारा किया।