{"_id":"6262ff86dac6de2c5f3fe3af","slug":"proposed-on-book-day-haldwani-news-hld4603103147","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुस्तक दिवस के लिए प्रस्तावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुस्तक दिवस के लिए प्रस्तावित
विज्ञापन
हल्द्वानी पंडित गोविंद बल्लभ पंत पुस्तकालय में आए युवक सें बातचीत। अमर उजाला
हल्द्वानी। नगर निगम के पुस्तकालय खस्ताहाल हैं। लाइब्रेरी की अलमारियों में कैद इन किताबों में धूल जमने लगी है। पाठकों की आवश्यकता और समय के अनुसार नई किताबें नहीं आने से अब लोग भी पुस्तकालयों की ओर कम ही जा रहे हैं। निगम के तीन पुस्तकालय छह समाचार पत्रों के सहारे संचालित हो रहे हैं।
रोडवेज बस अड्डे के समीप सन 1953 में स्थापित किए गए पंडित गोविंद बल्लभ पंत पुस्तकालय धीरे-धीरे खस्ताहाल की ओर जा रहा है। इस पुस्तकालय में 3500 किताबें अलमारियों में धूल फांक रही हैं। अमर उजाला की टीम ने इस पुस्तकालय का जायजा लिया। यहां एक बड़े हाल में लकड़ी की पुरानी टेबल और कुर्सियां लगी थीं। कमरे में पर्याप्त उजाला भी नहीं था। इस कमरे में कुछ लोग अखबार पढ़ रहे थे। फर्श पर जमी धूल साफ गवाही दे रही है कि यहां लंबे समय से साफ सफाई नहीं हुई।
शौचालय भी बहुत गंदे थे। यहां सिर्फ छह समाचार पत्र आते हैं। इन समाचार पत्रों को पढ़ने के लिए मात्र 20 से 25 लोग ही यहां आते हैं। लंबे समय से लाइब्रेरी के लिए पुस्तकों की खरीद नहीं की गई है। निगम के काठगोदाम और लाइन नंबर आठ में स्थित वाचनालय की स्थिति भी ठीक नहीं है। महज सात-आठ सौ किताबें ही यहां आने वाले पाठकों का मन बहला रही हैं।
विज्ञापन
एक लाइब्रेरी तो अभी तक नहीं बनी
हल्द्वानी। बनभूलपुरा चोरगलिया मार्ग पर बने पुस्तकालय को नगर निगम ने 2006 में तोड़ दिया था। तब से यह पुस्तकालय अभी तक नहीं बना है। जबकि बोर्ड में कई बार इस पुस्तकालय बनाने का प्रस्ताव पारित हो चुका है।
कोट-
नगर निगम के पुस्तकालयों को सुधारा जाएगा। जल्द ही यहां नई किताबें मंगवाई जाएंगी। सफाई, प्रकाश व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाएगा।
- पंकज उपाध्याय नगर आयुक्त
जीबी पंत पुस्तकालय की अव्यवस्थाओं पर बोले छात्र
आर्मी की तैयारी के लिए प्रतिदिन पुस्तकालय आता हूं। पुस्तकालय में पढ़ने के लिए नई किताबें नहीं हैं। घर से ही किताबें लाकर पड़ते हैं। पुस्तकालय में बिजली जाने पर अंधेरा हो जाता है। जिस कारण पढ़ाई में व्यवधान होता है।
- चंदन शर्मा, तिकोनिया चौराहा
पुस्तकालय में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। उत्तराखंड से रिलेटेड किताबें भी नहीं हैं। पुस्तकालय में अंग्रेजी के अखबार, मासिक मैगजीन और लिटरेचर की व्यवस्था होनी चाहिए। वाचनालय छोटा है, इसका विस्तार किया जाए। पुस्तकालय का रंगरोगन कर इसे नया रूप दिया जाए।
- कमलेश शर्मा, तिकोनिया चौराहा
पुस्तकालय में लाइट जाने पर अंधेरा हो जाता है। जिस कारण पढ़ाई नहीं हो पाती है। पुस्तकालय में जरनेटर या इनवर्टर की व्यवस्था की जानी चाहिए। पुस्तकालय की टाइमिंग बढ़नी चाहिए ताकि छात्रों को इसका लाभ मिल सके।
- राहुल भट्ट, बिठौरिया।
विज्ञापन
रोडवेज बस अड्डे के समीप सन 1953 में स्थापित किए गए पंडित गोविंद बल्लभ पंत पुस्तकालय धीरे-धीरे खस्ताहाल की ओर जा रहा है। इस पुस्तकालय में 3500 किताबें अलमारियों में धूल फांक रही हैं। अमर उजाला की टीम ने इस पुस्तकालय का जायजा लिया। यहां एक बड़े हाल में लकड़ी की पुरानी टेबल और कुर्सियां लगी थीं। कमरे में पर्याप्त उजाला भी नहीं था। इस कमरे में कुछ लोग अखबार पढ़ रहे थे। फर्श पर जमी धूल साफ गवाही दे रही है कि यहां लंबे समय से साफ सफाई नहीं हुई।
विज्ञापन
शौचालय भी बहुत गंदे थे। यहां सिर्फ छह समाचार पत्र आते हैं। इन समाचार पत्रों को पढ़ने के लिए मात्र 20 से 25 लोग ही यहां आते हैं। लंबे समय से लाइब्रेरी के लिए पुस्तकों की खरीद नहीं की गई है। निगम के काठगोदाम और लाइन नंबर आठ में स्थित वाचनालय की स्थिति भी ठीक नहीं है। महज सात-आठ सौ किताबें ही यहां आने वाले पाठकों का मन बहला रही हैं।
विज्ञापन
एक लाइब्रेरी तो अभी तक नहीं बनी
हल्द्वानी। बनभूलपुरा चोरगलिया मार्ग पर बने पुस्तकालय को नगर निगम ने 2006 में तोड़ दिया था। तब से यह पुस्तकालय अभी तक नहीं बना है। जबकि बोर्ड में कई बार इस पुस्तकालय बनाने का प्रस्ताव पारित हो चुका है।
कोट-
नगर निगम के पुस्तकालयों को सुधारा जाएगा। जल्द ही यहां नई किताबें मंगवाई जाएंगी। सफाई, प्रकाश व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाएगा।
- पंकज उपाध्याय नगर आयुक्त
जीबी पंत पुस्तकालय की अव्यवस्थाओं पर बोले छात्र
आर्मी की तैयारी के लिए प्रतिदिन पुस्तकालय आता हूं। पुस्तकालय में पढ़ने के लिए नई किताबें नहीं हैं। घर से ही किताबें लाकर पड़ते हैं। पुस्तकालय में बिजली जाने पर अंधेरा हो जाता है। जिस कारण पढ़ाई में व्यवधान होता है।
- चंदन शर्मा, तिकोनिया चौराहा
पुस्तकालय में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। उत्तराखंड से रिलेटेड किताबें भी नहीं हैं। पुस्तकालय में अंग्रेजी के अखबार, मासिक मैगजीन और लिटरेचर की व्यवस्था होनी चाहिए। वाचनालय छोटा है, इसका विस्तार किया जाए। पुस्तकालय का रंगरोगन कर इसे नया रूप दिया जाए।
- कमलेश शर्मा, तिकोनिया चौराहा
पुस्तकालय में लाइट जाने पर अंधेरा हो जाता है। जिस कारण पढ़ाई नहीं हो पाती है। पुस्तकालय में जरनेटर या इनवर्टर की व्यवस्था की जानी चाहिए। पुस्तकालय की टाइमिंग बढ़नी चाहिए ताकि छात्रों को इसका लाभ मिल सके।
- राहुल भट्ट, बिठौरिया।