नेताओं ने डुबो दिया नहर कवरिंग प्रोजेक्ट
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शहर की जनता का दुर्भाग्य है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ही ने विकास से मुंह मोड़ लिया है। नेताओं को एक-दूसरे की खिंचाई करने और दुकानों के उद्घाटन के फीते काटने से ही फुर्सत नहीं है। किसी भी नेता के पास शहर के ढांचागत बुनियादी विकास की प्लानिंग नहीं है। जिसके चलते ही नगर निगम के पास से मुखानी तक नहर कवरिंग का प्रोजेक्ट डूब गया।
प्रमुख शहरों के बुनियादी विकास के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की कई योजनाएं हैं। इन योजनाओं से शहर का कायाकल्प करने के सपने दिखाकर जनता को सिर्फ गुमराह किया जा रहा है। वोट बैंक की राजनीति से शहर का विकास नहीं हो पा रहा है।
भारत सरकार की अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम फार स्माल एंड मीडियम टाउन (यूडीआईएसएसएमटी) में नगर निगम और एसबीआई से सटी खुली नहर कवरिंग करने की योजना थी। नहर कवर करके श्री महादेव गिरी संस्कृत महाविद्यालय तक बाईपास और मुखानी तक दोपहिया वाहनों के लिए संपर्क मार्ग बनाने का प्रस्ताव था। इसके लिए पांच करोड़ की डीपीआर भी तैयार हुई।
नहर कवरिंग के बाद सड़क चौड़ी होने से शहर में यातायात का दबाव काफी हद तक कम हो जाता। एसडीएम कोर्ट, थाना, तहसील और आसपास कार्यालयों के अलावा बाजार आने एवं जाने वालों को कालाढूंगी रोड और स्टेडियम रोड के संपर्क मार्ग से नहीं जाना पड़ता।
नहर कवरिंग के बाद यह सड़क बाईपास के रूप में नैनीताल रोड और कालाढूंगी रोड को जोड़ सकती थी। लेकिन नेताओं की खींचतान और शासन स्तर पर पैरवी नहीं होने से नहर कवरिंग का यह प्रोजेक्ट भी बंद हो गया।