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आकर्षण: पॉलीनेटर पार्क बन रहा चिड़िया व कीट-पतंगों का प्राकृतिक वासस्थल, 50 से अधिक तितलियों की प्रजाति मौजूद

Fri, 13 Sep 2024 10:51 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 13 Sep 2024 10:51 AM IST
सार

वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में देश का पहला पॉलीनेटर पार्क 50 से अधिक तितली और 35 से अधिक प्रजातियों की चिड़ियां, मुधमक्खी, गिलहरी और अन्य कीट-पतंगों का प्राकृतिक वासस्थल बन गया है। 

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Pollinator Park is becoming a natural habitat for birds and insects in haldwani
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में देश का पहला पॉलीनेटर (पराग कण) पार्क 50 से अधिक तितली और 35 से अधिक प्रजातियों की चिड़ियां, मुधमक्खी, गिलहरी और अन्य कीट-पतंगों का प्राकृतिक वासस्थल बन गया है। यह पार्क पर्यटकों की पहली पसंद बनने के साथ-साथ ही छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों के लिए ज्ञान अर्जित करने का केंद्र बन गया है।

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वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में जैव विविधता के साथ-साथ विलुप्त प्रजातियों के पौधों और वनस्पतियों को संरक्षण के लिए वर्ष 2019 में पॉलीनेटर पार्क विकसित किया गया था। पार्क 50 से अधिक प्रजातियों की तितलियों के अलावा मधुमक्खियों और चिड़ियों का रैन बसेरा बन गया है। चार एकड़ वन भूमि पर बने पार्क ने खूबसूरत रूप ले लिया है। यहां पर तरह-तरह की तितलियां, चिड़िया, कीट पंतग और गिलहरी को देखने के लिए पर्यटक और स्कूली बच्चे पहुंच रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी अनुसंधान मदन सिंह बिष्ट का कहना है कि भूमि पर कीटनाशक के कारण पौधों को दिक्कत हो रही है। पॉलीनेटर पार्क में कई पक्षियों का बसेरा है।

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देसी मधुमक्खी की प्रजाति को भी किया संरक्षित
वन अनुसंधान केंद्र को देसी प्रजाति की मधुमक्खियों को तलाशने में सबसे अधिक मेहनत करनी पड़ी। वन अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में यूरोपियन प्रजाति की मधुमक्खियों का पालन बढ़ता जा रहा है। इस वजह से देसी प्रजातियों की मधुमक्खियों पर संकट है। अधिकारियों को बड़ी मुश्किल से कुमाऊं की गरुड़ घाटी में एक व्यक्ति के पास देसी प्रजाति की मधुमक्खियां मिलीं। पार्क में इस प्रजाति को संरक्षित किया है।

1.08 लाख किस्म के पौधों का जीवन निर्भर है पॉलीनेटर पर
डॉ. बिष्ट के मुताबिक करीब 95 प्रतिशत फूल वाले पौधों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए तितली, मधुमक्खी आदि अन्य पॉलीनेटर की जरूरत होती है। इस तरह 1.08 लाख किस्म के पौधों का जीवन पॉलीनेटर पर निर्भर है।

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