{"_id":"627d5a9e332c3b6e375ff3a3","slug":"plans-did-not-go-ahead-with-files-doctors-posts-are-also-running-vacant-haldwani-news-hld462424387","type":"story","status":"publish","title_hn":"योजनाएं फाइलों से आगे नहीं बढ़ी, डॉक्टरों के पद भी रिक्त चल रहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
योजनाएं फाइलों से आगे नहीं बढ़ी, डॉक्टरों के पद भी रिक्त चल रहे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के दावे और वादे तो खूब किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर हालात एकदम उलट हैं। अस्पतालों में न पर्याप्त डॉक्टर हैं, न तकनीकी स्टाफ। कुमाऊं के दो बडे़ अस्पतालों एसटीएच और बेस में एक भी कार्डियोलाजिस्ट नहीं है। एसटीएच में कैथ लैब बनाने की योजना भी फाइलों में ही दम तोड़ गई। मजबूरन लोगों को दिल की बीमारी का इलाज कराने के लिए या तो निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है या दूसरे शहरों का। जिले में मेडिकल ऑफिसर के 90 पद रिक्त हैं।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल और बेस अस्पताल में लंबे समय से कार्डियोलाजिस्ट के पद रिक्त हैं। एसटीएच में कैथ लैब बनाने की योजना बनी। प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। करीब 15 साल पहले एक कार्डियोलॉजिस्ट तैनात भी हुए। कुछ रोगियों को पेस मेकर लगाने की सुविधा भी शुरू हुई, लेकिन उनके इस्तीफा देने के बाद से कोई हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हो सका है। बेस अस्पताल का हार्ट सेंटर भी सालों से बंद है। हार्ट सेंटर का भवन जर्जर हो चुका है। ऐसे में हृदय की बीमारी से जूझ रहे रोगियों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने की मजबूरी होती है। इसी तरह स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की योजना पर धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है। इस योजना के लिए बजट भी केंद्र सरकार से मिल चुका है।
डॉक्टरों के पदों का हाल
हल्द्वानी। जिले में मेडिकल ऑफिसर के 343 पद हैं, जबकि तैनाती सिर्फ 253 की है, 90 पद रिक्त हैं। माइक्रोबायोलाजिस्ट, फोरेंसिक के दो-दोे पद सृजित हैं, लेकिन तैनाती एक भी नहीं है। डेंटिस्ट के स्वीकृत पदों के सापेक्ष चार, एक्सरे टेक्नीशियन के 11, स्टाफ नर्स के 57, लैब टेक्नीशियन 20 और फार्मेसिस्ट के चार पद रिक्त हैं। मेडिकल कालेज हल्द्वानी का हाल भी खराब है। रेडियोलॉजी विभाग में कोई चिकित्सक नहीं है। बाल रोग, ईएनटी जैसे विभागों में विभागाध्यक्ष नहीं है। मेडिसिन विभाग से तीन डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया, एक ने छोड़ दिया और एक डॉक्टर ने छोड़ने का नोटिस दे दिया है। इस विभाग के प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर को प्राचार्य और चिकित्सा अधीक्षक पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर काम चलाया जा रहा है। मेडिकल कालेज में एनएमसी के मानकों के अनुसार करीब चालीस प्रतिशत चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। बीते दिनों हल्द्वानी में चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने फैकल्टी की तैनाती के लिए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को अधिकार दिलाने की बात कही थी। पर यह योजना कितना परवान चढ़ती है, यह अलग बात है।
विज्ञापन
एमआरआई, सीटी स्कैन की रिपोर्टिंग बाहर से, अल्ट्रासाउंड बंद
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज के अधीन एसटीएच के रेडियोलॉजी विभाग में चिकित्सक न होने से अल्ट्रासाउंड बंद हैं जबकि एमआरआई, सीटी स्कैन आदि की रिपोर्टिंग अधिकृत निजी संस्था के माध्यम से होती है। यह व्यवस्था भी लंबे समय से चल रही है।
कोट
-शासन के पास पूर्व में कैथ लैब का प्रस्ताव जा चुका है। कैथ लैब चलाने के लिए कार्डियोलाजिस्ट की जरूरत होती है, जो अभी नहीं है। रही बात एमआरआई, सीटी स्कैन की रिपोर्टिंग की बाहर से कराने की, तो चिकित्सकों की कमी के चलते इस व्यवस्था को लागू करना पड़ा था।
-डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य मेडिकल कालेज हल्द्वानी।
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल और बेस अस्पताल में लंबे समय से कार्डियोलाजिस्ट के पद रिक्त हैं। एसटीएच में कैथ लैब बनाने की योजना बनी। प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। करीब 15 साल पहले एक कार्डियोलॉजिस्ट तैनात भी हुए। कुछ रोगियों को पेस मेकर लगाने की सुविधा भी शुरू हुई, लेकिन उनके इस्तीफा देने के बाद से कोई हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हो सका है। बेस अस्पताल का हार्ट सेंटर भी सालों से बंद है। हार्ट सेंटर का भवन जर्जर हो चुका है। ऐसे में हृदय की बीमारी से जूझ रहे रोगियों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने की मजबूरी होती है। इसी तरह स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की योजना पर धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है। इस योजना के लिए बजट भी केंद्र सरकार से मिल चुका है।
विज्ञापन
डॉक्टरों के पदों का हाल
हल्द्वानी। जिले में मेडिकल ऑफिसर के 343 पद हैं, जबकि तैनाती सिर्फ 253 की है, 90 पद रिक्त हैं। माइक्रोबायोलाजिस्ट, फोरेंसिक के दो-दोे पद सृजित हैं, लेकिन तैनाती एक भी नहीं है। डेंटिस्ट के स्वीकृत पदों के सापेक्ष चार, एक्सरे टेक्नीशियन के 11, स्टाफ नर्स के 57, लैब टेक्नीशियन 20 और फार्मेसिस्ट के चार पद रिक्त हैं। मेडिकल कालेज हल्द्वानी का हाल भी खराब है। रेडियोलॉजी विभाग में कोई चिकित्सक नहीं है। बाल रोग, ईएनटी जैसे विभागों में विभागाध्यक्ष नहीं है। मेडिसिन विभाग से तीन डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया, एक ने छोड़ दिया और एक डॉक्टर ने छोड़ने का नोटिस दे दिया है। इस विभाग के प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर को प्राचार्य और चिकित्सा अधीक्षक पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर काम चलाया जा रहा है। मेडिकल कालेज में एनएमसी के मानकों के अनुसार करीब चालीस प्रतिशत चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। बीते दिनों हल्द्वानी में चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने फैकल्टी की तैनाती के लिए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को अधिकार दिलाने की बात कही थी। पर यह योजना कितना परवान चढ़ती है, यह अलग बात है।
विज्ञापन
एमआरआई, सीटी स्कैन की रिपोर्टिंग बाहर से, अल्ट्रासाउंड बंद
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज के अधीन एसटीएच के रेडियोलॉजी विभाग में चिकित्सक न होने से अल्ट्रासाउंड बंद हैं जबकि एमआरआई, सीटी स्कैन आदि की रिपोर्टिंग अधिकृत निजी संस्था के माध्यम से होती है। यह व्यवस्था भी लंबे समय से चल रही है।
कोट
-शासन के पास पूर्व में कैथ लैब का प्रस्ताव जा चुका है। कैथ लैब चलाने के लिए कार्डियोलाजिस्ट की जरूरत होती है, जो अभी नहीं है। रही बात एमआरआई, सीटी स्कैन की रिपोर्टिंग की बाहर से कराने की, तो चिकित्सकों की कमी के चलते इस व्यवस्था को लागू करना पड़ा था।
-डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य मेडिकल कालेज हल्द्वानी।