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सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका
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प्रतीकात्मक।
नैनीताल। हाईकोर्ट में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और शहरों में लगे गंदगी के ढेर से संक्रमण फैलने का खतरा होने के मामले में जनहित याचिका दायर की गई है। इस प्रकरण पर मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष 28 जुलाई को सुनवाई होगी।
हल्द्वानी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता नीरज तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि स्वच्छता कर्मियों की हड़ताल, सरकार द्वारा हड़ताल समाप्ति के लिए वार्ता या अन्य कोई कदम नहीं उठाने के चलते नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। इससे मानसून के समय खासकर तब जब कोरोना का जानलेवा खतरा है, ऐसे समय में शहरों में सफाई न होने से महामारी की आशंका है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण लोगों का मौलिक अधिकार है और सरकार की अनदेखी और हड़ताली कर्मियों की हठधर्मिता के चलते आम जनता कूड़े के ढेर के बीच रहने के लिए मजबूर है।
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याचिकाकर्ता ने स्वच्छता के वैकल्पिक इंतजाम करने, जरूरत पड़ने पर एस्मा लगाने व वार्ता या कार्रवाई के माध्यम से हड़ताल समाप्त करवाने के लिए हाईकोर्ट से सरकार को निर्देशित करने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने उन हड़ताली कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग भी की है जो उन सफाई कर्मचारियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, जो हड़ताल पर नहीं हैं और गलियों में जमा कूड़ा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। याचिका में सचिव शहरी विकास, निदेशक शहरी विकास, नगर निगम हल्द्वानी और नगर पालिका नैनीताल और रामनगर के अधिकारियों और एसएसपी नैनीताल को आवश्यक इंतजाम और कार्रवाई करने के निर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने मामले की जल्द सुनवाई की प्रार्थना की, जिस पर कोर्ट ने 28 जुलाई को मामले की सुनवाई की तिथि नियत की है।
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हल्द्वानी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता नीरज तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि स्वच्छता कर्मियों की हड़ताल, सरकार द्वारा हड़ताल समाप्ति के लिए वार्ता या अन्य कोई कदम नहीं उठाने के चलते नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। इससे मानसून के समय खासकर तब जब कोरोना का जानलेवा खतरा है, ऐसे समय में शहरों में सफाई न होने से महामारी की आशंका है।
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याचिकाकर्ता ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण लोगों का मौलिक अधिकार है और सरकार की अनदेखी और हड़ताली कर्मियों की हठधर्मिता के चलते आम जनता कूड़े के ढेर के बीच रहने के लिए मजबूर है।
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याचिकाकर्ता ने स्वच्छता के वैकल्पिक इंतजाम करने, जरूरत पड़ने पर एस्मा लगाने व वार्ता या कार्रवाई के माध्यम से हड़ताल समाप्त करवाने के लिए हाईकोर्ट से सरकार को निर्देशित करने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने उन हड़ताली कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग भी की है जो उन सफाई कर्मचारियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, जो हड़ताल पर नहीं हैं और गलियों में जमा कूड़ा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। याचिका में सचिव शहरी विकास, निदेशक शहरी विकास, नगर निगम हल्द्वानी और नगर पालिका नैनीताल और रामनगर के अधिकारियों और एसएसपी नैनीताल को आवश्यक इंतजाम और कार्रवाई करने के निर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने मामले की जल्द सुनवाई की प्रार्थना की, जिस पर कोर्ट ने 28 जुलाई को मामले की सुनवाई की तिथि नियत की है।