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मेन सेंट्रल थ्रस्ट के सक्रिय होने के कारण आ रहे हैं भूकंप : प्रो. राजीव
Wed, 04 Oct 2023 02:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 04 Oct 2023 02:04 AM IST
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नैनीताल। कुमाऊं मंडल के अधिकतर शहर और गांव भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह समूचा क्षेत्र जोन फाइव में शामिल है और यहां कई स्थानों से होकर मेन बाउंड्री थ्रस्ट (एमबीटी) गुजर रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार आ रहे भूकंप का कारण एमसीटी का तेजी से सक्रिय होना है।
मंगलवार को नेपाल में 5.5 तीव्रता का भूकंप आया तो कुमाऊं में भी धरती डोल उठी और कई जगह लोग घरों से बाहर आ निकले। भूकंप के इन झटकों ने लोगों में एक बार फिर से दहशत पैदा कर दी। इस संबंध में कुमाऊं विवि के भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. राजीव उपाध्याय का कहना है कि कश्मीर से हिमाचल, उत्तराखंड, नेपाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की ओर से होते हुए लगभग 2500 किमी के दायरे में एमसीटी गुजरती है।
उन्होंने बताया कि समूचे हिमालयी क्षेत्र में नार्थ वेस्ट से होकर एमसीटी गुजरती है और वर्तमान में एमसीटी बेहद सक्रिय है। इसके सक्रिय होने के कारण हिमालयी क्षेत्र में संचित दबाव बाहर निकल रहा है। प्रो. उपाध्याय ने बताया कि भारतीय महाद्वीप एशिया के साथ टकरा रहा है जिसके चलते इंडियन प्लेट, एशियन प्लेट को पांच सेंटीमीटर प्रति साल की दर से खिसका रही है। बताया कि जब जब इन प्लेटों में टकराव होता है तब तब पृथ्वी में कंपन होता है जिसे भूकंप के रूप में महसूस किया जाता है।
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यह क्षेत्र हैं संवेदनशील
नैनीताल। कुमाऊं विवि के भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. राजीव उपाध्याय का कहना है कि धारचूला, मुन्स्यारी, उत्तरकाशी, बद्रीनाथ क्षेत्र, चमोली, रुद्रप्रयाग, कुमाऊं के कपकोट भूकंप की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील है। जबकि उससे निचले क्षेत्रों को भी जोन फाइव में ही शामिल किया गया है। कहा कि भूकंप के दौरान जानमाल की सुरक्षा के लिए भूकंप रोधी और हल्के भवनों के निर्माण को महत्ता देनी होगी।
नैनीताल में भी खतरा बढ़ा
नैनीताल। अलग राज्य बनने से पहले और उसके बाद भी नैनीताल और इसके आसपास के क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में तेजी से इजाफा हुआ है। भू गर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि इन क्षेत्रों में तीव्र ढलान वाले पहाड़ों में भी बड़े बड़े निर्माण कार्य हुए हैं। वह भी तब जबकि अधिकतर क्षेत्रों में मिट्टी भुरभुरी है जो हल्की हलचल में ही गिरने लगती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि नैनीताल के नीचे से मेन बाउंड्री थ्रस्ट गुजरती है लिहाजा ऐसे में नैनीताल समेत इसके आसपास का इलाका भी भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है।
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मंगलवार को नेपाल में 5.5 तीव्रता का भूकंप आया तो कुमाऊं में भी धरती डोल उठी और कई जगह लोग घरों से बाहर आ निकले। भूकंप के इन झटकों ने लोगों में एक बार फिर से दहशत पैदा कर दी। इस संबंध में कुमाऊं विवि के भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. राजीव उपाध्याय का कहना है कि कश्मीर से हिमाचल, उत्तराखंड, नेपाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की ओर से होते हुए लगभग 2500 किमी के दायरे में एमसीटी गुजरती है।
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उन्होंने बताया कि समूचे हिमालयी क्षेत्र में नार्थ वेस्ट से होकर एमसीटी गुजरती है और वर्तमान में एमसीटी बेहद सक्रिय है। इसके सक्रिय होने के कारण हिमालयी क्षेत्र में संचित दबाव बाहर निकल रहा है। प्रो. उपाध्याय ने बताया कि भारतीय महाद्वीप एशिया के साथ टकरा रहा है जिसके चलते इंडियन प्लेट, एशियन प्लेट को पांच सेंटीमीटर प्रति साल की दर से खिसका रही है। बताया कि जब जब इन प्लेटों में टकराव होता है तब तब पृथ्वी में कंपन होता है जिसे भूकंप के रूप में महसूस किया जाता है।
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यह क्षेत्र हैं संवेदनशील
नैनीताल। कुमाऊं विवि के भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. राजीव उपाध्याय का कहना है कि धारचूला, मुन्स्यारी, उत्तरकाशी, बद्रीनाथ क्षेत्र, चमोली, रुद्रप्रयाग, कुमाऊं के कपकोट भूकंप की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील है। जबकि उससे निचले क्षेत्रों को भी जोन फाइव में ही शामिल किया गया है। कहा कि भूकंप के दौरान जानमाल की सुरक्षा के लिए भूकंप रोधी और हल्के भवनों के निर्माण को महत्ता देनी होगी।
नैनीताल में भी खतरा बढ़ा
नैनीताल। अलग राज्य बनने से पहले और उसके बाद भी नैनीताल और इसके आसपास के क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में तेजी से इजाफा हुआ है। भू गर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि इन क्षेत्रों में तीव्र ढलान वाले पहाड़ों में भी बड़े बड़े निर्माण कार्य हुए हैं। वह भी तब जबकि अधिकतर क्षेत्रों में मिट्टी भुरभुरी है जो हल्की हलचल में ही गिरने लगती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि नैनीताल के नीचे से मेन बाउंड्री थ्रस्ट गुजरती है लिहाजा ऐसे में नैनीताल समेत इसके आसपास का इलाका भी भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है।