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Nainital News: बरसों से नहीं बढ़ा संविदा डॉक्टर का वेतनमान
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माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। एक तरफ शासन में यू कोट वी पे योजना के तहत डॉक्टरों की भर्ती की योजना चल रही है, दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स से भर्ती होने वाले चिकित्सकों के वेतनमान में बढ़ोतरी के मामले में चुप्पी बनी हुई है, ऐसे में अस्पताल को डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं।
पहाड़ में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए यू कोट-वी पे योजना को शुरू किया गया था। स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनके इच्छा के हिसाब से वेतन देने की पहल की गई है। हालांकि इसके तहत केवल नैनीताल जिले में केवल एक डॉक्टर की तैनाती हुई है। इस योजना के इतर दूसरी तस्वीर भी है। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भर्ती के लिए आउटसोर्स का फार्मूला लागू है, इसके तहत मिलने वाले वेतनमान में आठ साल से बढ़ोतरी नहीं हुई है। नियमित और आउटसोर्स से भर्ती होने वाले प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के वेतनमान में काफी अंतर है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार वेतनमान बढ़ोतरी का केवल प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
डॉक्टर संविदा से, जांच प्राइवेट और नाम सरकारी अस्पताल
हल्द्वानी। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग का हाल गजब का है। यहां काम प्राइवेट के माध्यम से लिया जा रहा है जबकि नाम सरकारी अस्पताल का है। हाल यह है कि बेस, महिला अस्पताल की पैथालॉजी की जांच प्राइवेट के माध्यम से हो रही है। महिला अस्पताल में तो लैब ही बंद हो चुकी है। मेडिकल काॅलेज में रेडियोलॉजी की जांच कर्मचारी करते हैं पर उसकी रिपोर्टिंग (एमआरआई, एक्सरे में क्या बीमारी सामने आई है, उसका विवरण) का काम प्राइवेट के पास है। मेडिकल काॅलेज में डॉक्टरों की भर्ती संविदा (बीच में केवल एक बार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियमित भर्ती हुई है) के माध्यम से होती है। 60 प्रतिशत फैकल्टी आउटसोर्स के माध्यम से तैनात है। रामनगर में सरकारी अस्पताल पीपीपी मोड के माध्यम से चल रहा है।
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हल्द्वानी। एक तरफ शासन में यू कोट वी पे योजना के तहत डॉक्टरों की भर्ती की योजना चल रही है, दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स से भर्ती होने वाले चिकित्सकों के वेतनमान में बढ़ोतरी के मामले में चुप्पी बनी हुई है, ऐसे में अस्पताल को डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं।
पहाड़ में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए यू कोट-वी पे योजना को शुरू किया गया था। स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनके इच्छा के हिसाब से वेतन देने की पहल की गई है। हालांकि इसके तहत केवल नैनीताल जिले में केवल एक डॉक्टर की तैनाती हुई है। इस योजना के इतर दूसरी तस्वीर भी है। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भर्ती के लिए आउटसोर्स का फार्मूला लागू है, इसके तहत मिलने वाले वेतनमान में आठ साल से बढ़ोतरी नहीं हुई है। नियमित और आउटसोर्स से भर्ती होने वाले प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के वेतनमान में काफी अंतर है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार वेतनमान बढ़ोतरी का केवल प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
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डॉक्टर संविदा से, जांच प्राइवेट और नाम सरकारी अस्पताल
हल्द्वानी। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग का हाल गजब का है। यहां काम प्राइवेट के माध्यम से लिया जा रहा है जबकि नाम सरकारी अस्पताल का है। हाल यह है कि बेस, महिला अस्पताल की पैथालॉजी की जांच प्राइवेट के माध्यम से हो रही है। महिला अस्पताल में तो लैब ही बंद हो चुकी है। मेडिकल काॅलेज में रेडियोलॉजी की जांच कर्मचारी करते हैं पर उसकी रिपोर्टिंग (एमआरआई, एक्सरे में क्या बीमारी सामने आई है, उसका विवरण) का काम प्राइवेट के पास है। मेडिकल काॅलेज में डॉक्टरों की भर्ती संविदा (बीच में केवल एक बार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियमित भर्ती हुई है) के माध्यम से होती है। 60 प्रतिशत फैकल्टी आउटसोर्स के माध्यम से तैनात है। रामनगर में सरकारी अस्पताल पीपीपी मोड के माध्यम से चल रहा है।
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