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बारहसिंघा के वास स्थलों का अध्ययन कराएगा पार्क प्रशासन, लंबे समय से कॉर्बेट पार्क में नहीं दिखाई दिया

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2020 02:24 AM IST
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Park administration to study habitat of Barasingha, has not appeared in Corbett Park for a long time
प्रतीकात्मक फोटो।
रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट पार्क में बारहसिंघा नजर नहीं आते हैं। कालागढ़ डैम बनने के बाद बारहसिंघा धीरे-धीरे यहां से विलुप्त होता चला गया। बारहसिंघा के वास स्थल अब भी कॉर्बेट पार्क में मौजूद हैं। पार्क प्रशासन उन वास स्थलों का अध्ययन कराएगा, जिससे भविष्य में बारहसिंघा को यहां लाया जा सके।
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1974 में कालागढ़ डैम बनकर तैयार हुआ था। डैम बनने के बाद जिन स्थानों पर बारहसिंघा रहता था, वहां पर पानी भरता चला गया। आखिरी बार 1977 में बारहसिंघा कॉर्बेट के ढिकाला और कालागढ़ के यूपी बॉर्डर के पास दिखाई दिया था। इसके बाद से बारहसिंघा किसी भी गणना में रिकॉर्ड नहीं हुआ। कालागढ़ डैम बनने की वजह से बारहसिंघा कॉर्बेट से विलुप्त हो गया। दरअसल, बारहसिंगा दलदली स्थानों पर पाए जाते हैं।
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प्राय: ये गंगा नदी के मैदानी इलाकों में बहुतायत में पाए जाते हैं, इस कारण इसे दलदली हिरण भी कहा जाता है। यह हिरण की एक प्रजाति है, जिसकी ऊंचाई 44 से 46 इंच तक हो सकती है। तराई के इलाकों में बारहसिंगा दलदली क्षेत्रों में रहता है और मध्य भारत में यह वनों के पास स्थित घास के मैदानों में पाया जाता है। भारत में बारहसिंगा की मुख्य रूप से तीन उप-प्रजातियां पाई जाती हैं, जिन्हें, संकटग्रस्त जीव की श्रेणी में रखा गया है। इन प्रजातियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची एक के तहत शामिल किया है।
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जब तक कालागढ़ डैम नहीं बना था, तब ढिकाला, कालागढ़ आदि क्षेत्रों की जमीन दलदली थी, जो बारहसिंघा के वास के लिए मुफीद थी। कालागढ़ डैम बनने के बाद दलदली जगहों पर पानी भर गया और उसके बाद धीरे-धीरे कॉर्बेट से बारहसिंघा विलुप्त हो गया। वर्तमान में भी कॉर्बेट पार्क में बारहसिंघा के वास स्थल मौजूद हैं, जिन पर अध्ययन कराया जाएगा। भविष्य में यदि बारहसिंघा को कॉर्बेट में लाया जाए तो वह यहां पर जीवित रह सके।
राहुली, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व निदेशक
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