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अमेरिका में टाइगर में कोरोना के लक्षण मिलने के बाद जंगल में 300 कैमरा ट्रैप लगाने के आदेश
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प्रतीकात्मक फोटो।
हल्द्वानी। न्यूयार्क चिड़ियाघर की बाघिन के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद से वन विभाग अलर्ट हो गया है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ( एनटीसीए) और सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) ने कैमरा ट्रैप, सीसीटीवी लगाने समेत अन्य गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत पश्चिमी वृत्त के अधीन आने वाले जंगलों में कैमरा ट्रैप लगाने का काम शुरू किया गया है। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार 100 कैमरे ट्रैप लगा दिए हैं, दो सौ और जल्द लगाए जाएंगे।
पश्चिमी वृत्त के अधीन आने वाले प्रभागों में 130 से अधिक बाघ हैं। इसके अलावा तेंदुआ समेत अन्य शेड्यूल -1 के वन्यजीव हैं। जंगलों में स्थित वन मार्गों का इस्तेमाल आम लोग भी करते हैं। ऐसे में कोरोना के खतरे के मद्देनजर वन विभाग ने कई स्तर पर कोशिश तेज की हैं। इस संबंध में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी और सेंट्रल जू अथॉरिटी ने भी गाइडलाइन जारी की हैं। इसमें जंगल में कैमरा ट्रैप लगाने और वन्यजीवों के व्यवहार पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ पराग मधुकर लगाते के अनुसार एनटीसीए के निर्देश के क्रम में कैमरा ट्रैप लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
संवेदनशील जगहों पर कैमरा ट्रैप लगाए जाने हैं। अगर कोई बाघ-तेंदुआ आदि बीमार दिखता है तो उसे इलाज के लिए रेस्क्यू करना होगा। उसकी बीमारी के संबंध में जानकारी के लिए सैंपल भी भेजना होगा। अगर कोई वन्यजीव मरा हुआ मिलता है तो पीपीई किट पहनकर ही पशु डॉक्टराें की टीम को पोस्टमार्टम करने समेत सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए हैं। पोस्टमार्टम के बाद सैंपल को भी जांच के लिए नामित संस्था को भेजना होगा। वन संरक्षक के अनुसार सेंट्रल जू अथॉरिटी ने चिड़ियाघर के लिए भी गाइडलाइन जारी की है। इसमें चिड़िया घरों में 24 घंटे सीसीटीवी के माध्यम से वन्यजीवों पर नजर रखी जानी है।
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पश्चिमी वृत्त के अधीन आने वाले प्रभागों में 130 से अधिक बाघ हैं। इसके अलावा तेंदुआ समेत अन्य शेड्यूल -1 के वन्यजीव हैं। जंगलों में स्थित वन मार्गों का इस्तेमाल आम लोग भी करते हैं। ऐसे में कोरोना के खतरे के मद्देनजर वन विभाग ने कई स्तर पर कोशिश तेज की हैं। इस संबंध में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी और सेंट्रल जू अथॉरिटी ने भी गाइडलाइन जारी की हैं। इसमें जंगल में कैमरा ट्रैप लगाने और वन्यजीवों के व्यवहार पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ पराग मधुकर लगाते के अनुसार एनटीसीए के निर्देश के क्रम में कैमरा ट्रैप लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
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संवेदनशील जगहों पर कैमरा ट्रैप लगाए जाने हैं। अगर कोई बाघ-तेंदुआ आदि बीमार दिखता है तो उसे इलाज के लिए रेस्क्यू करना होगा। उसकी बीमारी के संबंध में जानकारी के लिए सैंपल भी भेजना होगा। अगर कोई वन्यजीव मरा हुआ मिलता है तो पीपीई किट पहनकर ही पशु डॉक्टराें की टीम को पोस्टमार्टम करने समेत सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए हैं। पोस्टमार्टम के बाद सैंपल को भी जांच के लिए नामित संस्था को भेजना होगा। वन संरक्षक के अनुसार सेंट्रल जू अथॉरिटी ने चिड़ियाघर के लिए भी गाइडलाइन जारी की है। इसमें चिड़िया घरों में 24 घंटे सीसीटीवी के माध्यम से वन्यजीवों पर नजर रखी जानी है।
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