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तुगलकी फरमान के विरोध में बंद कराई ओपीडी
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
Updated Fri, 21 Apr 2017 12:43 AM IST
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प्राचार्य से वार्ता करते उपनल कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
एनस्थीसिया विभाग की एचओडी के तुगलकी फरमान के विरोध बृहस्पतिवार को उपनल कर्मियों चार घंटे तक ओपीडी ठप कराकर विरोध किया और धरना दिया। कर्मियों ने एचओडी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्राचार्य के आश्वासन देने के बाद सुबह 11 बजे से ओपीडी सामान्य हो गई। हालांकि देर शाम को चली लंबी बैठक और प्राचार्य के आश्वासन के बाद उपनल कर्मी मान गए।
उपनल कर्मियों ने तीन दिन पूर्व एसटीएच के एमएस डॉ. एके पांडे को ज्ञापन दिया था। ज्ञापन में कहा गया था कि एनस्थीसिया विभाग में इमरजेंसी ड्यूटी/एआईसीयू में कार्यरत टेक्नीशियन को जब भी अवकाश की आवश्यकता होती है तो उन्हें छह घंटे की ड्यूटी की बजाए 12 से 18 घंटे ड्यूटी करने के लिए कहा जा रहा है। इस अवधि का वेतन नहीं मिलता है और कर्मचारी का अवकाश काट लिया जाता है। कोई भी कर्मचारी 12 से 18 घंटे की डबल ड्यूटी कैसे कर सकता है। आदेश के कारण एनस्थीसिया विभाग में कार्यरत उपनल कर्मियों को 10-10 अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके विरोध में बृहस्पतिवार को उपनल कर्मियों ने ओपीडी बंद करा दी।
काफी दूर से आए मरीज ओपीडी बंद होने से परेशान रहे। मरीजों में इस बात को लेकर असमंजस था कि डाक्टर आज देखेंगे या नहीं। कर्मी ओपीडी बंद कराने के बाद अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी। कर्मी एनस्थीसिया विभाग की एचओडी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। सुबह लगभग 11 बजे प्राचार्य ने कर्मियों से बात की और मामले को हल करने का आश्वासन दिया। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा के आश्वासन पर कर्मी मान गए और ओपीडी शुरू हो गई।
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दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे मेडिकल कालेज में बंद कमरे में सभी विभागाध्यक्षों की बैठक चली और मामले को निपटाने की रणनीति तैयार कर ली गई। कुछ देर बाद उपनल कर्मियों को बुलाकर बात की गई। बातचीत के दौरान एक डाक्टर ने कर्मियों पर नेतागिरी करने का आरोप जड़ दिया। कर्मियों और डाक्टर के बीच नोकझोंक हुई। नोकझोंक के बाद डाक्टर बैठक छोड़कर चले गए। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि मृतक प्रवीण कुमार विश्वकर्मा दस माह में दो माह की छुट्टी ले चुका था। एनस्थीसिया विभाग की एचओडी डॉ. गीता भंडारी को निर्देश दिए गए कि रोस्टर के अनुसार ही ड्यूटी लगाई जाए। हालांकि प्राचार्य ने स्वीकार किया कि उपनल कर्मियों की रात में ड्यूटी अधिक लगती है।
दूसरी ओर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और प्रवीण कुमार विश्वकर्मा के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। प्राचार्य ने मृतक के परिवार की मदद के लिए दो हजार रुपये दिए और स्टाफ से सहयोग करने की अपील की।
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उपनल कर्मियों ने तीन दिन पूर्व एसटीएच के एमएस डॉ. एके पांडे को ज्ञापन दिया था। ज्ञापन में कहा गया था कि एनस्थीसिया विभाग में इमरजेंसी ड्यूटी/एआईसीयू में कार्यरत टेक्नीशियन को जब भी अवकाश की आवश्यकता होती है तो उन्हें छह घंटे की ड्यूटी की बजाए 12 से 18 घंटे ड्यूटी करने के लिए कहा जा रहा है। इस अवधि का वेतन नहीं मिलता है और कर्मचारी का अवकाश काट लिया जाता है। कोई भी कर्मचारी 12 से 18 घंटे की डबल ड्यूटी कैसे कर सकता है। आदेश के कारण एनस्थीसिया विभाग में कार्यरत उपनल कर्मियों को 10-10 अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके विरोध में बृहस्पतिवार को उपनल कर्मियों ने ओपीडी बंद करा दी।
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काफी दूर से आए मरीज ओपीडी बंद होने से परेशान रहे। मरीजों में इस बात को लेकर असमंजस था कि डाक्टर आज देखेंगे या नहीं। कर्मी ओपीडी बंद कराने के बाद अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी। कर्मी एनस्थीसिया विभाग की एचओडी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। सुबह लगभग 11 बजे प्राचार्य ने कर्मियों से बात की और मामले को हल करने का आश्वासन दिया। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा के आश्वासन पर कर्मी मान गए और ओपीडी शुरू हो गई।
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दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे मेडिकल कालेज में बंद कमरे में सभी विभागाध्यक्षों की बैठक चली और मामले को निपटाने की रणनीति तैयार कर ली गई। कुछ देर बाद उपनल कर्मियों को बुलाकर बात की गई। बातचीत के दौरान एक डाक्टर ने कर्मियों पर नेतागिरी करने का आरोप जड़ दिया। कर्मियों और डाक्टर के बीच नोकझोंक हुई। नोकझोंक के बाद डाक्टर बैठक छोड़कर चले गए। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि मृतक प्रवीण कुमार विश्वकर्मा दस माह में दो माह की छुट्टी ले चुका था। एनस्थीसिया विभाग की एचओडी डॉ. गीता भंडारी को निर्देश दिए गए कि रोस्टर के अनुसार ही ड्यूटी लगाई जाए। हालांकि प्राचार्य ने स्वीकार किया कि उपनल कर्मियों की रात में ड्यूटी अधिक लगती है।
दूसरी ओर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और प्रवीण कुमार विश्वकर्मा के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। प्राचार्य ने मृतक के परिवार की मदद के लिए दो हजार रुपये दिए और स्टाफ से सहयोग करने की अपील की।