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साढ़े तीन लाख बच्चों पर पीआईसीयू बेड वाले केवल तीन सरकारी अस्पताल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jun 2021 12:37 AM IST
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Only three government hospitals with PICU beds for 3.5 lakh children
हल्द्वानी। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं, पर जिले में केवल तीन सरकारी अस्पतालों में पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) की सुविधा है। इन अस्पतालों में आवश्यकता पड़ने पर गंभीर रूप से बीमार बच्चों को भर्ती किया जा सकेगा। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग पीआईसीयू बेडों की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में पांच पीआईसीयू बेड तैयार किए जाएंगे।
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जिले में कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए संसाधनों की स्थिति, ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था और डॉक्टरों की संख्या आदि के बारे में स्वास्थ्य विभाग ने डाटा जुटाया है। इसमें निजी क्षेत्र के अस्पताल और डॉक्टरों को भी शामिल किया गया है। इसमें जानकारी सामने आई है कि जिले में तीन सरकारी अस्पताल एसटीएच (24 बेड), बेस (4 बेड) और मेडिकल कॉलेज स्थित कोविड अस्पताल में बच्चों के लिए पीआईसीयू की सुविधा है। निजी अस्पतालों में करीब सात पीआईसीयू बेड हैं।
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नए कोविड अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कहते हैं कि अस्पताल के चिकित्सा उपकरणों में कुछ तकनीकी बदलाव कर पीआईसीयू की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से अन्य जगहों पर पीआईसीयू बेड बढ़ाने का प्रयास तेज किया गया है। नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में पीआईसीयू के पांच बेड तैयार करने की योजना है। दूसरी तरफ निजी क्षेत्र के अस्पतालों में पीआईसीयू के सात बेड हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इसकी संख्या और बढ़ेगी। वहीं, संसाधनों में बढ़ोतरी के क्रम में महिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की भी योजना है। बता दें कि जिले में शून्य से 18 उम्र के साढ़े तीन लाख बच्चे हैं।
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एसटीएच और महिला अस्पताल में एसएनसीयू
हल्द्वानी। छोटे बच्चों के लिए सिक नियो नेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) होती है। एसटीएच में एसएनसीयू के 24 और महिला अस्पताल में 12 बेड हैं। चिकित्सकों के अनुसार बहुत छोटे बच्चों के लिए एसएनसीयू होता है। ऐसे में जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड हैं, उनका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर किशोरों के लिए हो सकता है। एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत कहती हैं कि गरमपानी और भवाली सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ हैं, ऐसे में प्रयास किया जा रहा है कि वहां पर आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कर ली जाए, जिससे आवश्यकता होने पर वहां पर हल्के मरीजों का इलाज हो सकेगा। बताया कि जरूरत होने पर सरकारी अस्पतालों में निजी बाल रोग विशेषज्ञ इलाज करेंगे और निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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