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एक ही टीके से मिल जाएगी जानवरों में होने वाले प्लेग और चेचक से निजात

Wed, 14 Oct 2020 03:33 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Wed, 14 Oct 2020 03:33 PM IST
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One will get relief from plague and smallpox
प्रतीकात्मक।

जानवरों में होने वाले प्लेग और चेचक रोग का इलाज करने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) मुक्तेश्वर ने एक संयुक्त टीका (कंबाइंड वैक्सीन) बनाया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद इस वैक्सीन को लांच करेगा। इसका परीक्षण हो चुका है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका एक बार प्रयोग करने से जानवरों में चार वर्षों तक चेचक और प्लेग नहीं होगा।

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आईवीआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2004 में जानवरों में होने वाली पेस्टी डी पेट्टिस रूमीनेंट (पीपीआर) यानी प्लेग बीमारी के लिए सुगरी नाम से वैक्सीन लांच हुई थी। आईवीआरआई में भेड़, भैंस, ऊंट और बकरी में होने वाले चेचक रोग का टीका बनाया गया था। टीका बनाने की तकनीक देश की पांच प्रमुख कंपनियों और चार राज्यों तेलगांना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र को भी दी गई थी।
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अब आईवीआरआई ने एक ऐसा टीका विकसित किया है जो प्लेग और चेचक दोनों ही बीमारियों से निजात दिलाएगा। यह कवायद भारत सरकार के वर्ष 2030 तक पीपीआर (प्लेग) नामक बीमारी से उन्मूलन के लक्ष्य के क्रम में की गई है। आईवीआरआई मुक्तेश्वर के स्टेशन इंचार्ज पुतान सिंह के निर्देशन में पीपीआर के प्रमुख डॉ. मुथू चेलवन, डॉ. चंद्रशेखर और डॉ. अमित कुमार ने यह शोध कार्य पूरा किया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद इस टीके को लांच करेगा।
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पीपीआर वायरस का वैक्टर भी बनाया

आईवीआरआई में पीपीआर वायरस से वैक्टर (ढांचा) बनाया गया है। वैक्टर में दूसरे वायरस का प्रोटीन डालने के बाद भेड़-बकरियों को ब्लू टंग से भी बचाया जा सकता है।

ब्लू टंग में भेड़-बकरियों की जीभ नीली पड़ जाने के साथ ही उनमें लंगड़ापन, मुंह सूज जाना जैसे लक्षण आते हैं और कभी-कभी मौत भी हो जाती है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया कि जानवरों का दूध निकालते समय दूध निकालने वाले के हाथ में चेचक हो जाती है। इसके बाद चेचक के दाने मुंह पर फैल जाते हैं, साथ ही बुखार भी आ जाता है। किसी व्यक्ति में जानवर से चेचक हुआ है या नहीं इसकी जांच करने के लिए विशेष प्रकार का एलाइजा टेस्ट विकसित किया गया है।

ऊंट और भैंस में नहीं होता है प्लेग

आईवीआरआई के वैज्ञानिक कहते हैं कि ऊंट और भैंस में प्लेग नहीं होता है जबकि भेड़ और बकरी में प्लेग होता है। प्लेग के कारण जानवर अधिक संख्या में मरते हैं। वैक्सीन आने के बाद से प्लेग से मृत्यु दर कम हुई है।

पशुओं में भी संपर्क में आने से फैलता है चेचक

चेचक एक से दूसरे पशु में फैलता है। संक्रमित पशु जहां खाना खा रहा है या पानी पी रहा है, वहां दूसरा पशु खाना खाएगा या पानी पीएगा तो वह भी चेचक की चपेट में आ जाएगा। ऊंट और भैंस का चेचक मनुष्यों में भी फैल जाता है। भैंस का दूध निकालते समय चेचक होने का खतरा अधिक होता है।


छह प्रदेशों में बीमारी अधिक

पीपीआर और भेड़ बकरी चेचक का प्रकोप उत्तराखंड समेत देश के लगभग सभी राज्यों में है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और जम्मू कश्मीर में रोग की अधिकता है।

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