{"_id":"3cc25c01fc45b2e51c8abab985ed73fa","slug":"one-room-11-children-and-five-classes-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक कमरा, 11 बच्चे और पांच कक्षाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक कमरा, 11 बच्चे और पांच कक्षाएं
गंगा सिंह बिष्ट /अमर उजाला ब्यूरो/धानाचूली (नैनीताल)।
Updated Thu, 03 Sep 2015 01:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारी ब्लाक के अघरिया ग्रामसभा के तोक ठींग में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन निर्माण का काम छह साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ। भवन के अभाव में स्कूल गांव में एक व्यक्ति के मकान के एक कमरे में चल रहा है। इस इकलौते कमरे में एक से पांच तक की कक्षाएं संचालित होती हैं।
विज्ञापन
वो तो गनीमत है कि स्कूल में छात्र संख्या महज 11 है। यदि अधिक होती तो पठन पाठन की क्या स्थिति होती इसका अंदाजा स्वयं ही लगाया जा सकता है। कमरा भी ऐसा है कि बरसात में पानी भीतर तक पहुंच जाता है। छह साल से विद्यालय भवन नहीं बना, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इसे देखने तक की जहमत नहीं उठाई।
विज्ञापन
ग्रामसभा के ठींग तोक में बमुश्किल दर्जन भर परिवार ही रहते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए गुनियालेख से पांच किमी पैदल मजेला तक का रास्ता घने जंगल से होकर तय करना होता है और उसके बाद मजेला से लगभग इतनी ही दूरी खड़ी चढ़ाई कर पार करनी होती है।
विज्ञापन
बताया जाता है कि वर्ष 2008-09 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत विद्यालय भवन निर्माण के लिए छह लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। विद्यालय भवन का निर्माण शुरू हुआ और दरवाजे और खिड़कियों की चौखटें लगाने के बाद धनाभाव के चलते काम बंद कर दिया गया। देखरेख के अभाव में अब तो चौखटें भी खराब होने लगी हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2008-09 से ही विद्यालय का संचालन ठींग गांव में उदयराम के घर के एक कमरे में हो रहा है। एक कमरे में पहली कक्षा से लेकर पांचवीं कक्षा तक के 11 बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है।
ग्रामीण बताते हैं कि चूंकि स्कूल तक पहुंचने के लिए कई किमी का पैदल रास्ता तय करना होता है, लिहाजा आज तक यहां विभाग का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है।
बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां एक शिक्षक और एक शिक्षा मित्र तैनात हैं। शिक्षा मित्र हीराबल्लभ बताते हैं कि एक कमरे में पांच कक्षाओं के संचालन में दिक्कतें आती हैं।
ग्राम प्रधान सुरेश चंद्र ने बताया कि धनभाव के चलते विद्यालय भवन का निर्माण अधूरा पड़ा था, दूसरी किश्त की धनराशि प्राप्त होने के बाद काम शुरू करा दिया है।