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अब प्रमाणपत्र में दर्ज होने लगी मौत की वजह
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रामनगर (नैनीताल)। कोरोना से मौत पर केंद्र और राज्य सरकार ने मृतकों के आश्रितों को विभिन्न सुविधाएं देने की घोषणाएं कीं हैं। अस्पताल से जारी होने वाले प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण दर्ज नहीं होने से उनके आश्रितों को परेशान होना पड़ रहा था। मृतक आश्रितों की परेशानियों को देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल से जारी होने वाले मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण कारण अंकित करना शुरू कर दिया है।
उत्तराखंड सरकार ने कोरोना से अनाथ हुए बच्चों या माता-पिता में किसी की भी मृत्यु होने पर उनके नाबालिग बच्चों को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का लाभ देने की घोषणा की है। ऐसे में किसी अस्पताल की ओर से जारी प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं होने से आश्रितों को परेशानी हो रही थी। सरकारी अस्पतालों में मृत्यु प्रमाणपत्र अस्पताल की ओर से ही जारी किया जाता है। पहले अस्थायी और फिर बाद में स्थायी प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भागीरथी जोशी का कहना है कि अस्पताल की ओर से परिजनों को शव सौंपते वक्त अस्थायी मृत्यु प्रमाणपत्र दिया जाता है, जिसमें मृत्यु का प्राथमिक और अन्य कारण स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं। अब मृत्यु के कारण का स्थायी प्रमाणपत्र अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि मृतक के आश्रितों को परेशानी न हो।
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मृत्यु प्रमाणपत्र के फॉर्मेट में नहीं हुआ बदलाव
रामनगर। मृत्यु प्रमाणपत्र के फॉर्मेट में स्वास्थ्य विभाग ने कोई बदलाव नहीं किया है। रामनगर सरकारी अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. मणिभूषण पंत ने बताया कि मृत्यु प्रमाणपत्र में एक कॉलम रिमॉर्क का था। उसी कॉलम में अब मृत्यु का कारण दर्ज किया जा रहा है।
ये आ रहीं थीं परेशानियां
रामनगर। अस्थायी प्रमाणपत्र में तो मृत्यु का कारण लिखा होता है, लेकिन इस स्थायी प्रमाणपत्र से मौत के कारण का कॉलम ही गायब है जबकि निजी अस्पतालों में अस्थायी मृत्यु प्रमाणपत्र नगर निगम या संबंधित निकायों को भेजा जाता है, जहां से जरूरी औपचारिकताओं के बाद स्थायी प्रमाण पत्र बनता है। सवाल उठ रहा था कि मृत्यु प्रमाणपत्र में जब कोरोना से मृत्यु का कारण ही नहीं लिखा है तो आश्रितों को सरकार की योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा।
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उत्तराखंड सरकार ने कोरोना से अनाथ हुए बच्चों या माता-पिता में किसी की भी मृत्यु होने पर उनके नाबालिग बच्चों को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का लाभ देने की घोषणा की है। ऐसे में किसी अस्पताल की ओर से जारी प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं होने से आश्रितों को परेशानी हो रही थी। सरकारी अस्पतालों में मृत्यु प्रमाणपत्र अस्पताल की ओर से ही जारी किया जाता है। पहले अस्थायी और फिर बाद में स्थायी प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भागीरथी जोशी का कहना है कि अस्पताल की ओर से परिजनों को शव सौंपते वक्त अस्थायी मृत्यु प्रमाणपत्र दिया जाता है, जिसमें मृत्यु का प्राथमिक और अन्य कारण स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं। अब मृत्यु के कारण का स्थायी प्रमाणपत्र अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि मृतक के आश्रितों को परेशानी न हो।
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मृत्यु प्रमाणपत्र के फॉर्मेट में नहीं हुआ बदलाव
रामनगर। मृत्यु प्रमाणपत्र के फॉर्मेट में स्वास्थ्य विभाग ने कोई बदलाव नहीं किया है। रामनगर सरकारी अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. मणिभूषण पंत ने बताया कि मृत्यु प्रमाणपत्र में एक कॉलम रिमॉर्क का था। उसी कॉलम में अब मृत्यु का कारण दर्ज किया जा रहा है।
ये आ रहीं थीं परेशानियां
रामनगर। अस्थायी प्रमाणपत्र में तो मृत्यु का कारण लिखा होता है, लेकिन इस स्थायी प्रमाणपत्र से मौत के कारण का कॉलम ही गायब है जबकि निजी अस्पतालों में अस्थायी मृत्यु प्रमाणपत्र नगर निगम या संबंधित निकायों को भेजा जाता है, जहां से जरूरी औपचारिकताओं के बाद स्थायी प्रमाण पत्र बनता है। सवाल उठ रहा था कि मृत्यु प्रमाणपत्र में जब कोरोना से मृत्यु का कारण ही नहीं लिखा है तो आश्रितों को सरकार की योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा।