{"_id":"632b536f04d2463a1770bb06","slug":"notice-to-government-university-administration-on-financial-irregularities-in-doon-university-haldwani-news-hld4764871181","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड हाईकोर्ट: दून विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार और विवि प्रशासन को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड हाईकोर्ट: दून विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार और विवि प्रशासन को नोटिस
Thu, 22 Sep 2022 01:19 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Published by: हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 01:19 AM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में देहरादून की समाज सेविका अनु पंत की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
विज्ञापन
नोटिस
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने बुधवार को दून विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताएं किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और अन्य को नोटिस जारी कर एक दिसंबर तक जवाब पेश करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई एक दिसंबर को होगी।
विज्ञापन
Uttarakhand High Court: शिक्षकों से रिकवरी के आदेश पर रोक, पक्षकारों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में देहरादून की समाज सेविका अनु पंत की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में अनु पंत ने कहा है कि वर्ष 2014 से 2016 तक विश्वविद्यालय में अनेक वित्तीय अनियमितताएं पाई र्गइं थीं। विवि की ओर से की गई क्रय-विक्रय प्रक्रिया में किसी भी तरह की पारदर्शिता नहीं अपनाई गई। कुर्सी, मेज जरूरत से कहीं ज्यादा खरीदे गए। इससे संस्थान और राज्य सरकार को आर्थिक क्षति हुई।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता की ओर से अपने प्रत्यावेदन के माध्यम से राज्य सरकार के संज्ञान में यह तथ्य लाया गया। सरकार ने 2017 में इसकी जांच की और इसमें अनियमितताओं की पुष्टि हुई। इसके बाद भी संस्थान या राज्य सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।