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नोटबंदी से राजनेता, अफसरशाही को परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Thu, 16 Feb 2017 01:19 AM IST
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मतदान कर लौटते युवा।
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। लोकतंत्र के महापर्व पर मताधिकार का प्रयोग करने मतदाता घरों से निकले तो वोट क्यों करना है, ये उद्देश्य उनके मन में साफ था। बदहाल शिक्षा और बेहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से जहां मतदाता नाराज थे, वहीं विकास के पक्ष में। मतदाताओं ने साफ तौर पर कहा कि विकास के मुद्दे पर वोट किया है और भ्रष्टाचार के विरोध में।
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हल्द्वानी विधानसभा में मतदान के लिए बुजुर्ग, महिलाएं और यूथ सभी घरों से निकले। 25 से 35 वर्ष की महिलाओं और युवकों ने बेबाकी के साथ बात भी की। कहा कि भ्रष्टाचार चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा है, साथ ही मूलभूत सुविधाओं के बदहाल स्थिति को लेकर खासी नाराजगी थी।
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कहा स्कूल, कॉलेज खुल रहे हैं मगर शिक्षकों का अभाव है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है। मतदाताओं ने कहा कि नोटबंदी चुनावी मुद्दा नहीं था। गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों को नोटबंदी से कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने नोटबंदी को सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि राजनेता और अफसरशाही इस0 निर्णय से प्रभावित हुआ है। आयकर चोरी करने वालों को परेशानी हुई है।
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हल्द्वानी। मतदान स्थल पर मत का प्रयोग करने आए मतदाताओं को प्रत्याशी समर्थकों ने लुभाने का प्रयास किया। मतदाताओं को रिश्तेदारी से लेकर दोस्ती तक का वास्ता दिया गया। प्रत्याशी समर्थकों ने कहा कि अगर परिवार में पांच मतदाता हैं तो चार वोट हमें दें।
हल्द्वानी। ललित आर्य महिला इंटर कालेज में आए मतदाताओं को खासी परेशानी हुई। लोगों का मतदाता सूची में नाम ही नहीं था। गफूर बस्ती निवासी हामिद खां के परिवार में 13 वोट हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उक्त केंद्र पर मतदान किया था।
उसके बाद उनका पता बदल गया। उनके परिवार से सिर्फ उनके भाई का नाम था शेष 12 सदस्यों का नाम ही नहीं था। उक्त मतदेय स्थल पर लगभग दो से तीन दर्जन लोग बिना वोट डाले निराश लौट गए। ब्यूरो