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पानी-पानी कहते रहे, किसी ने नहीं सुनी पुकार
अमर उजाला ब्यूरो पतलोट (नैनीताल)।
Updated Sun, 29 Oct 2017 02:13 AM IST
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किसी ने नहीं सुनी पानी की पुकार
- फोटो : अमर उजाला
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पतलोट (नैनीताल)। विकास का दावा करते-करते न जाने कितने चुनाव बीत गए। कितने नेता आए कितने गए मगर ओखलकांडा ब्लॉक की ग्रामसभा डालकन्या के चार तोकों छीड़, बूंगा, घाड़ी और बैड़ा में कोई पानी नहीं पहुंचा सका। यहां 35 से अधिक परिवार आज भी दो किमी दूर गधेरे से पानी लाने को मजबूर हैं। ऐसा नहीं कि यहां के लोगों की प्यास नहीं बुझ सकती।
यहां पानी पहुंच सकता है लेकिन गांव की सियासत और जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों की बेरुखी से ऐसा नहीं हो पा रहा है। खास बात यह है कि सरकारी आंकड़ों में सात साल पहले बैड़ा तोक को पेयजल वंचित दिखाया गया था, मगर बिना पानी पहुंचे 2011 में इसे पेयजल युक्त दिखा दिया गया। तत्कालीन सीडीओ साहब कह गए गलती से चढ़ गया होगा, मगर सही कैसे होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं।
खनोरी, छीड़, बुंगा, निमवाड़, मड्यू और प्राथमिक विद्यालय बैड़ा के लिए 18 साल पहले कलियागाड़ से पौने तीन किमी लंबी पेयजल लाइन बनी। वर्ष 2006-07 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत छीड़ाखान-मीडार मोटर मार्ग बनने के दौरान पेयजल लाइन ध्वस्त हुई तो खनोरी तोक को छोड़कर अन्य तोकों के लोगों को पानी मिलना बंद हो गया।
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घाड़ी तोक के आठ परिवारों के लिए कोई भी पेयजल लाइन नहीं बनी है। यहां के लोग गधेरे से पानी ला रहे हैं। गर्मी में गधेरे के पानी के सूखने पर उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। बैड़ा तोक के 20 परिवार का भी यही हाल है। 22 साल पहले कुनरा गधेरे से लगर तोक के लिए एक किमी लंबी पेयजल लाइन बनी थी लेकिन तीन साल बाद ही स्रोत के पास टैंक क्षतिग्रस्त होने और देखरेख के अभाव की कमियों के चलते यहां भी पानी का संकट हो गया।
समाधान तो यह भी है
ग्रामीणों का कहना है यदि कलियागाड़ से दो इंच की पाइपलाइन बिछाकर छीड़ में टैंक बने और यहां से तोक के सभी परिवारों के लिए पानी की आपूर्ति हो तो समस्या का समाधान हो सकता है।
ग्रामीणों का दर्द
छीड़ तोक के हेम पनेरू का कहना है निजी प्रयासों से ढाई किमी दूर से प्लास्टिक के पाइपों से पानी लाने की हमारी मुहिम सफल नहीं हो पाई। बूंगा तोक के खीमानंद पनेरू और कमलापति भट्ट का कहना है कि बरसात के बाद से एक किमी दूर से सिर पर ढोकर पानी ला रहे हैं।
बच्चों को काफी परेशानी होती है। घाड़ी के देवी दत्त और ईश्वरी दत्त बुगियाल का कहना है अक्तूबर से जुलाई तक नंधौर नदी ही उनकी प्यास बुझाती है। बैड़ा तोक के बुजुर्ग हरि दत्त पनेरू और देवी दत्त का कहना है सरकारी आंकड़ों में तो तोक को पेयजल युक्त दिखा दिया लेकिन यहां की हालत कुछ और है।
जनप्रतिनिधियों की बात
इस बार में प्रस्ताव तीन महीने पहले ही भेजा जा चुका है। अगली जिला योजना की बैठक में चारों तोकों के लिए फिर प्रस्ताव रखकर आठ से 10 लाख का बजट पास किया जाएगा ताकि पेयजल लाइन बन सके।
- राम सिंह कैड़ा, विधायक।
जनप्रतिनिधियों और जल संस्थान के अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन हर बार हमारी बात को गंभीरता से नहीं लिया जाता। और तो और कर्मचारी अपनी गलती सुधारने का भी प्रयास नहीं करते।
- कुंती जोशी, प्रधान
ट्यूलिप कॉलोनी के ट्यूबवेल संचालन पर रोक
हल्द्वानी। ट्यूलिप कॉलोनी में ट्यूबवेल के अवैध संचालन की शिकायत पर प्रशासन ने ट्यूलिप कॉलोनी में छापा मारा। छापेमारी के दौरान कॉलोनी के संचालक ट्यूबवेल की अनुमति नहीं दिखा सके। इस पर प्रशासन ने ट्यूबवेल के संचालन पर रोक लगा दी।
डीएम दीपेंद्र चौधरी के आदेश के बाद एसडीएम एपी वाजपेई ने तहसीलदार प्रहलाद राम और जलसंस्थान के एसडीओ एलएम पांडे को ट्यूबवेल की जांच करने को भेजा। दोनों अधिकारियों ने कॉलोनी संचालकों से ट्यूबवेल लगाने की अनुमति मांगी।
इस पर संचालकों ने उनके पास अनुमति न होने की बात कही। उनका कहना था कि उन्होंने ट्यूबवेल खोदा है लेकिन अभी इसका प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इस पर प्रशासन ने अनुमति न लेने तक इसके संचालन पर रोक लगा दी। वहीं संचालकों की ओर से प्रशासन को संचालन न करने का लिखित पत्र भी सौंपा गया है। ब्यूरो
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यहां पानी पहुंच सकता है लेकिन गांव की सियासत और जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों की बेरुखी से ऐसा नहीं हो पा रहा है। खास बात यह है कि सरकारी आंकड़ों में सात साल पहले बैड़ा तोक को पेयजल वंचित दिखाया गया था, मगर बिना पानी पहुंचे 2011 में इसे पेयजल युक्त दिखा दिया गया। तत्कालीन सीडीओ साहब कह गए गलती से चढ़ गया होगा, मगर सही कैसे होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं।
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खनोरी, छीड़, बुंगा, निमवाड़, मड्यू और प्राथमिक विद्यालय बैड़ा के लिए 18 साल पहले कलियागाड़ से पौने तीन किमी लंबी पेयजल लाइन बनी। वर्ष 2006-07 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत छीड़ाखान-मीडार मोटर मार्ग बनने के दौरान पेयजल लाइन ध्वस्त हुई तो खनोरी तोक को छोड़कर अन्य तोकों के लोगों को पानी मिलना बंद हो गया।
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घाड़ी तोक के आठ परिवारों के लिए कोई भी पेयजल लाइन नहीं बनी है। यहां के लोग गधेरे से पानी ला रहे हैं। गर्मी में गधेरे के पानी के सूखने पर उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। बैड़ा तोक के 20 परिवार का भी यही हाल है। 22 साल पहले कुनरा गधेरे से लगर तोक के लिए एक किमी लंबी पेयजल लाइन बनी थी लेकिन तीन साल बाद ही स्रोत के पास टैंक क्षतिग्रस्त होने और देखरेख के अभाव की कमियों के चलते यहां भी पानी का संकट हो गया।
समाधान तो यह भी है
ग्रामीणों का कहना है यदि कलियागाड़ से दो इंच की पाइपलाइन बिछाकर छीड़ में टैंक बने और यहां से तोक के सभी परिवारों के लिए पानी की आपूर्ति हो तो समस्या का समाधान हो सकता है।
ग्रामीणों का दर्द
छीड़ तोक के हेम पनेरू का कहना है निजी प्रयासों से ढाई किमी दूर से प्लास्टिक के पाइपों से पानी लाने की हमारी मुहिम सफल नहीं हो पाई। बूंगा तोक के खीमानंद पनेरू और कमलापति भट्ट का कहना है कि बरसात के बाद से एक किमी दूर से सिर पर ढोकर पानी ला रहे हैं।
बच्चों को काफी परेशानी होती है। घाड़ी के देवी दत्त और ईश्वरी दत्त बुगियाल का कहना है अक्तूबर से जुलाई तक नंधौर नदी ही उनकी प्यास बुझाती है। बैड़ा तोक के बुजुर्ग हरि दत्त पनेरू और देवी दत्त का कहना है सरकारी आंकड़ों में तो तोक को पेयजल युक्त दिखा दिया लेकिन यहां की हालत कुछ और है।
जनप्रतिनिधियों की बात
इस बार में प्रस्ताव तीन महीने पहले ही भेजा जा चुका है। अगली जिला योजना की बैठक में चारों तोकों के लिए फिर प्रस्ताव रखकर आठ से 10 लाख का बजट पास किया जाएगा ताकि पेयजल लाइन बन सके।
- राम सिंह कैड़ा, विधायक।
जनप्रतिनिधियों और जल संस्थान के अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन हर बार हमारी बात को गंभीरता से नहीं लिया जाता। और तो और कर्मचारी अपनी गलती सुधारने का भी प्रयास नहीं करते।
- कुंती जोशी, प्रधान
ट्यूलिप कॉलोनी के ट्यूबवेल संचालन पर रोक
हल्द्वानी। ट्यूलिप कॉलोनी में ट्यूबवेल के अवैध संचालन की शिकायत पर प्रशासन ने ट्यूलिप कॉलोनी में छापा मारा। छापेमारी के दौरान कॉलोनी के संचालक ट्यूबवेल की अनुमति नहीं दिखा सके। इस पर प्रशासन ने ट्यूबवेल के संचालन पर रोक लगा दी।
डीएम दीपेंद्र चौधरी के आदेश के बाद एसडीएम एपी वाजपेई ने तहसीलदार प्रहलाद राम और जलसंस्थान के एसडीओ एलएम पांडे को ट्यूबवेल की जांच करने को भेजा। दोनों अधिकारियों ने कॉलोनी संचालकों से ट्यूबवेल लगाने की अनुमति मांगी।
इस पर संचालकों ने उनके पास अनुमति न होने की बात कही। उनका कहना था कि उन्होंने ट्यूबवेल खोदा है लेकिन अभी इसका प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इस पर प्रशासन ने अनुमति न लेने तक इसके संचालन पर रोक लगा दी। वहीं संचालकों की ओर से प्रशासन को संचालन न करने का लिखित पत्र भी सौंपा गया है। ब्यूरो