{"_id":"56f9729c4f1c1b8e1af00246","slug":"nine-rebel-mlas-challenging-the-speaker-s-order-in-the-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"नौ बागी विधायकों ने स्पीकेर के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौ बागी विधायकों ने स्पीकेर के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Mon, 28 Mar 2016 11:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट में नौ बागी विधायकों ने स्पीकेर के आदेश को चुनौती दी है जिसमें स्पीकर की ओर से उनकी सदस्यता को समाप्त कर दिया गया है। इस प्रकरण पर सोमवार को रिट तैयार कर ली गई है जिसे मंगलवार को दाखिल कर दी जाएगी। इस प्रकरण पर मंगलवार को सुनवाई संभव है।
बता दें कि पूर्व में होली के अवकाश के चलते 25 मार्च को हाईकोर्ट में बागी विधायकों की ओर से विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दिए गए शोकॉज नोटिस को चुनौती दी गई थी जिसे प्री मेच्योर मानते हुए हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। साथ ही न्यायालय ने कहा कि यह स्पीकर का क्षेत्राधिकार बनता है या नही यह इस स्तर पर नहीं देखा जा सकता है क्योंकि यह केवल शोकॉज नोटिस है जिसका केवल जवाब देना है। स्पीकर ने कोई आदेश पास नहीं किया है। इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया था।
विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट से आए वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी व स्पीकर की ओर से पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल व उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत व कार्तिके हरिगुप्ता ने पैरवी की थी।
विज्ञापन
इस प्रकरण में पूर्व में नौ विधायकों को दिए गए नोटिस में से आठ विधायकों ने ही हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सदस्यता समाप्त करने के खिलाफ सभी नौ विधायकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा फिर खटखटाया है।
बता दें कि पूर्व में आठ विधायकों की ओर से पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त से हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने की बात कहीं जिसके बाद रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ के पास गए। मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अति आवश्यक माना, उनके आदेश के बाद होली के अवकाश के चलते इस प्रकरण पर सुनवाई के स्पेशल कोर्ट गठित की गई थी। सुनवाई शाम तीन बजे शुरू हुई तथा 4.30 बजे तक चली थी।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी जिसमें बागी विधायकों की तरफ से रामनगर विधायक अमृता रावत, रूद्रप्रयाग विधायक हरक सिंह रावत, खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, जसपुर विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंगल, केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत, नरेंद्रनगर विधायक सुबोध उनियाल, रायपुर विधायक उमेश शर्मा व विधायक प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से 19 मार्च 2016 को दिए गए शोकॉज नोटिस को चुनौती दी थी।
जिसमें कहा गया था उनके द्वारा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ नारे लगाए गए और भाजपा के विधायकों के साथ मिलकर सरकार को गिराने के कोशिश की। इस नोटिस का जवाब उन्हें 26 मार्च तक देना था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि वित्त मंत्री इंदिरा हृदेश की शिकायत के बाद विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उन्हें शोकॉज नोटिस दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने खिलाफत की है। लेकिन यदि सरकार कुछ गलत करती है तो उन्हें खिलाफत करने का अधिकार है।
स्पीकर की ओर से पैरवी कर रहे पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके द्वारा खिलाफत की गई है इसमें यह स्पष्ट होता है कि आपने विपक्षी दल से मिलकर सरकार को गिराने का प्रयास किया है तथा उन्हें जो कुछ कहना है वह स्पीकर के समक्ष कहा जा सकता है। कोर्ट इस स्टेज पर फिलहाल हस्तक्षेप नहीं कर सकती है क्योंकि यह प्री मेच्योर है । इस प्ररकण पर पूर्व में याचिका खारिज होने के बाद अब नौ विधायकों की ओर से उनकी सदस्यता को समाप्त करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
विज्ञापन
बता दें कि पूर्व में होली के अवकाश के चलते 25 मार्च को हाईकोर्ट में बागी विधायकों की ओर से विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दिए गए शोकॉज नोटिस को चुनौती दी गई थी जिसे प्री मेच्योर मानते हुए हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। साथ ही न्यायालय ने कहा कि यह स्पीकर का क्षेत्राधिकार बनता है या नही यह इस स्तर पर नहीं देखा जा सकता है क्योंकि यह केवल शोकॉज नोटिस है जिसका केवल जवाब देना है। स्पीकर ने कोई आदेश पास नहीं किया है। इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया था।
विज्ञापन
विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट से आए वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी व स्पीकर की ओर से पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल व उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत व कार्तिके हरिगुप्ता ने पैरवी की थी।
विज्ञापन
इस प्रकरण में पूर्व में नौ विधायकों को दिए गए नोटिस में से आठ विधायकों ने ही हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सदस्यता समाप्त करने के खिलाफ सभी नौ विधायकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा फिर खटखटाया है।
बता दें कि पूर्व में आठ विधायकों की ओर से पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल नरेंद्र दत्त से हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने की बात कहीं जिसके बाद रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ के पास गए। मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अति आवश्यक माना, उनके आदेश के बाद होली के अवकाश के चलते इस प्रकरण पर सुनवाई के स्पेशल कोर्ट गठित की गई थी। सुनवाई शाम तीन बजे शुरू हुई तथा 4.30 बजे तक चली थी।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी जिसमें बागी विधायकों की तरफ से रामनगर विधायक अमृता रावत, रूद्रप्रयाग विधायक हरक सिंह रावत, खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, जसपुर विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंगल, केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत, नरेंद्रनगर विधायक सुबोध उनियाल, रायपुर विधायक उमेश शर्मा व विधायक प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से 19 मार्च 2016 को दिए गए शोकॉज नोटिस को चुनौती दी थी।
जिसमें कहा गया था उनके द्वारा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ नारे लगाए गए और भाजपा के विधायकों के साथ मिलकर सरकार को गिराने के कोशिश की। इस नोटिस का जवाब उन्हें 26 मार्च तक देना था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि वित्त मंत्री इंदिरा हृदेश की शिकायत के बाद विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उन्हें शोकॉज नोटिस दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने खिलाफत की है। लेकिन यदि सरकार कुछ गलत करती है तो उन्हें खिलाफत करने का अधिकार है।
स्पीकर की ओर से पैरवी कर रहे पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके द्वारा खिलाफत की गई है इसमें यह स्पष्ट होता है कि आपने विपक्षी दल से मिलकर सरकार को गिराने का प्रयास किया है तथा उन्हें जो कुछ कहना है वह स्पीकर के समक्ष कहा जा सकता है। कोर्ट इस स्टेज पर फिलहाल हस्तक्षेप नहीं कर सकती है क्योंकि यह प्री मेच्योर है । इस प्ररकण पर पूर्व में याचिका खारिज होने के बाद अब नौ विधायकों की ओर से उनकी सदस्यता को समाप्त करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।