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आपदा को लेकर तैयारी एनएच पर गैंग, जेसीबी पहुंची
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Tue, 21 Jun 2016 11:57 PM IST
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प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग ने बरसात और आपदा को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। कुमाऊं के तीनों डिवीजनों में मार्ग खोलने, मरम्मत के लिए गैंग तैनात कर दिये गए हैं। इसके अलावा जेसीबी भी भेजी गई है। वहीं, हल्द्वानी तहसील में आपदा कंट्रोल रूम खोला गया है।
कुमाऊं में रानीबाग-नैनीताल, ज्योलीकोट एक्सटेंशन, टनकपुर-पिथौरागढ़ आदि एनएच के मुख्य मार्ग हैं। इन मार्गों में खासकर पहाड़ वाले इलाके में भूस्खलन और नाले आने से मार्ग के बंद होने का खतरा रहता है। इसके मद्देनजर एनएच ने अफसर, कर्मी और जेसीबी को तैनात किया है।
अधीक्षण अभियंता सीसी जोशी कहते हैं कि पूरे कुमाऊं में एनएच के मार्गों पर करीब 140 तक गैंग को तैनात किया गया है। संवेदनशील जगहों पर 26 जेसीबी को भेजा गया है। इन गैंग के नंबर प्रशासन और दूसरे विभागों को भी दिये गए हैं, जिससे तत्काल समन्वय बनाकर रास्ता खोला जाए। इस समय अल्मोड़ा मार्ग पर कैंची के पास और लोहाघाट मार्ग पर घाट के पास का इलाका संवेदनशील है। बाकी 12 अन्य जगह भी हैं, जो पहले से संवेदनशीलता की दृष्टि से चिह्नित हैं।
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तहसील में खोला गया आपदा कंट्रोल रूम
हल्द्वानी। प्रशासन ने तहसील भवन में आपदा कंट्रोल रूम खोल दिया है। एसडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि इसके अलावा 12 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। बिंदुखत्ता का श्री लंका टापू और गौला के किनारे वाले इलाके संवेदनशील क्षेत्र में हैं।
रपटों पर नहीं बन पाया पुल
हल्द्वानी। बरसात में रपटे मुसीबत और खतरा दोनों बन जाते हैं। चोरगलिया और कालाढूंगी रोड पर कई रपटे हैं। इसमें चोरगलिया रोड पर सूर्या नाला और शेर नाला पर पुल प्रस्तावित है। इन रपटों पर कई बार हादसा हो चुका है। अधिशासी अभियंता रणजीत सिंह रावत कहते हैं कि पुल निर्माण के लिए वन भूमि की जरूरत है, जिसके हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है।
भूमिगत रपटे कारगर नहीं
हल्द्वानी। रपटों पर सड़क (कंक्रीट) पर पानी बहकर निकलता है। इसकी जगह भूमिगत रपटे कारगर न होने की बात अधिकारी कहते हैं। अधिशासी अभियंता रणजीत रावत के अनुसार कई बार तेज बहाव के साथ ऊपर से पेड़, बडे़े बोल्डर भी बहकर आते हैं। अगर ह्यूम पाइप डालकर रपटा(इनवर्टेड रपटा) बनाया जाए, तो इनके फंसने का खतरा रहता है। जिससे ज्यादा नुकसान हो सकता है। इस पर पुल ही ज्यादा बेहतर विकल्प होता है।
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कुमाऊं में रानीबाग-नैनीताल, ज्योलीकोट एक्सटेंशन, टनकपुर-पिथौरागढ़ आदि एनएच के मुख्य मार्ग हैं। इन मार्गों में खासकर पहाड़ वाले इलाके में भूस्खलन और नाले आने से मार्ग के बंद होने का खतरा रहता है। इसके मद्देनजर एनएच ने अफसर, कर्मी और जेसीबी को तैनात किया है।
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अधीक्षण अभियंता सीसी जोशी कहते हैं कि पूरे कुमाऊं में एनएच के मार्गों पर करीब 140 तक गैंग को तैनात किया गया है। संवेदनशील जगहों पर 26 जेसीबी को भेजा गया है। इन गैंग के नंबर प्रशासन और दूसरे विभागों को भी दिये गए हैं, जिससे तत्काल समन्वय बनाकर रास्ता खोला जाए। इस समय अल्मोड़ा मार्ग पर कैंची के पास और लोहाघाट मार्ग पर घाट के पास का इलाका संवेदनशील है। बाकी 12 अन्य जगह भी हैं, जो पहले से संवेदनशीलता की दृष्टि से चिह्नित हैं।
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तहसील में खोला गया आपदा कंट्रोल रूम
हल्द्वानी। प्रशासन ने तहसील भवन में आपदा कंट्रोल रूम खोल दिया है। एसडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि इसके अलावा 12 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। बिंदुखत्ता का श्री लंका टापू और गौला के किनारे वाले इलाके संवेदनशील क्षेत्र में हैं।
रपटों पर नहीं बन पाया पुल
हल्द्वानी। बरसात में रपटे मुसीबत और खतरा दोनों बन जाते हैं। चोरगलिया और कालाढूंगी रोड पर कई रपटे हैं। इसमें चोरगलिया रोड पर सूर्या नाला और शेर नाला पर पुल प्रस्तावित है। इन रपटों पर कई बार हादसा हो चुका है। अधिशासी अभियंता रणजीत सिंह रावत कहते हैं कि पुल निर्माण के लिए वन भूमि की जरूरत है, जिसके हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है।
भूमिगत रपटे कारगर नहीं
हल्द्वानी। रपटों पर सड़क (कंक्रीट) पर पानी बहकर निकलता है। इसकी जगह भूमिगत रपटे कारगर न होने की बात अधिकारी कहते हैं। अधिशासी अभियंता रणजीत रावत के अनुसार कई बार तेज बहाव के साथ ऊपर से पेड़, बडे़े बोल्डर भी बहकर आते हैं। अगर ह्यूम पाइप डालकर रपटा(इनवर्टेड रपटा) बनाया जाए, तो इनके फंसने का खतरा रहता है। जिससे ज्यादा नुकसान हो सकता है। इस पर पुल ही ज्यादा बेहतर विकल्प होता है।